ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम (तस्वीर क्रेडिट@Sanghunews1)

ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम ने पहले वनडे में भारत को 6 विकेट से हराया,सीरीज में 1-0 की बढ़त

ब्रिस्बेन,25 फरवरी (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम ने भारत के खिलाफ एलन बॉर्डर फील्ड में खेले गए तीन मैचों की वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में 6 विकेट से जीत दर्ज कर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। इस जीत के साथ मेजबान टीम ने शानदार शुरुआत की है,जबकि भारतीय टीम को अपने प्रदर्शन में सुधार की जरूरत महसूस होगी। सीरीज के शेष दो मुकाबले 27 फरवरी और 1 मार्च को होबार्ट में खेले जाएँगे,जहाँ भारतीय टीम वापसी की कोशिश करेगी।

एलन बॉर्डर फील्ड पर खेले गए इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। बल्लेबाजी के लिए उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। पारी की दूसरी ही गेंद पर भारत को बड़ा झटका लगा जब युवा बल्लेबाज प्रतीका रावल बिना खाता खोले आउट हो गईं। इसके बाद टीम दबाव में आ गई और 52 रन के स्कोर तक पहुँचते-पहुँचते उसने शेफाली वर्मा और जेमिमा रोड्रिगेज के विकेट भी गंवा दिए। शेफाली मात्र 4 रन और जेमिमा 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। शुरुआती झटकों ने भारतीय बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया।

ऐसे मुश्किल समय में कप्तान हरमनप्रीत कौर और अनुभवी सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने पारी को सँभालने की कोशिश की। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 72 गेंदों में 48 रन की साझेदारी की और टीम का स्कोर 100 रन तक पहुँचाया। मंधाना ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए 68 गेंदों में 7 चौकों की मदद से 58 रन बनाए। उनका यह अर्धशतक भारतीय पारी का सबसे मजबूत स्तंभ साबित हुआ। हालाँकि,मंधाना के आउट होने के बाद एक बार फिर भारतीय पारी लड़खड़ा गई।

कप्तान हरमनप्रीत कौर ने जिम्मेदारी सँभालते हुए मध्यक्रम में अहम योगदान दिया। उन्होंने ऋचा घोष के साथ छठे विकेट के लिए 37 रन जोड़े और फिर काश्वी गौतम के साथ सातवें विकेट के लिए 53 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। कौर ने 84 गेंदों पर 3 चौकों की मदद से 53 रन बनाए। उनकी यह पारी दबाव में खेली गई कप्तानी पारी थी,जिसने टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाने में मदद की। काश्वी गौतम ने भी 43 रन का उपयोगी योगदान दिया,जबकि ऋचा घोष ने 23 रन जोड़े। हालाँकि,इन प्रयासों के बावजूद भारतीय टीम 48.3 ओवरों में 214 रन पर सिमट गई,जो ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ चुनौतीपूर्ण तो था,लेकिन पूरी तरह सुरक्षित स्कोर नहीं माना जा सकता था।

ऑस्ट्रेलिया की ओर से गेंदबाजी में एश्ले गार्डनर ने शानदार प्रदर्शन किया और 3 विकेट हासिल किए। मेगन शट्ट ने 2 विकेट चटकाए। इसके अलावा डार्सी ब्राउन,अलाना किंग,ताहलिया मैकग्राथ और सोफी मोलिनेक्स ने 1-1 विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी को कभी भी खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा और नियमित अंतराल पर विकेट निकालते रहे।

215 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया को कप्तान एलिसा हीली और फोएबे लिचफील्ड की सलामी जोड़ी ने मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों ने तेज रन गति से बल्लेबाजी करते हुए 10.3 ओवरों में 55 रन जोड़ दिए। लिचफील्ड ने 32 गेंदों में 6 चौकों की मदद से 32 रन बनाए। हालाँकि,उनके आउट होते ही भारत को थोड़ी राहत मिली,क्योंकि अगली ही गेंद पर श्री चरणी ने जॉर्जिया वोल को शून्य पर पवेलियन भेज दिया। लगातार दो विकेट मिलने से भारतीय टीम ने मैच में वापसी की उम्मीद जगाई।

इसके बाद क्रीज पर आईं अनुभवी बल्लेबाज बेथ मूनी ने पारी को सँभाला और लक्ष्य की ओर टीम को मजबूती से बढ़ाया। मूनी ने धैर्य और आक्रामकता का संतुलित प्रदर्शन करते हुए 79 गेंदों में 2 छक्कों और 5 चौकों की मदद से 76 रन बनाए। उनकी यह पारी ऑस्ट्रेलिया की जीत की आधारशिला साबित हुई। जब वह आउट हुईं तब तक टीम जीत के बेहद करीब पहुँच चुकी थी।

अंतिम चरण में एनाबेल सदरलैंड ने नाबाद 48 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली और एश्ले गार्डनर के साथ मिलकर टीम को 38.2 ओवरों में ही जीत दिला दी। ऑस्ट्रेलिया ने लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया और भारत की गेंदबाजी आक्रमण को ज्यादा दबाव बनाने का मौका नहीं दिया। भारतीय गेंदबाजों में श्री चरणी ने सर्वाधिक 2 विकेट लिए,जबकि क्रांति गौड़ और दीप्ति शर्मा को 1-1 सफलता मिली।

इस मुकाबले में भारतीय टीम की हार की बड़ी वजह शुरुआती बल्लेबाजी का लड़खड़ाना और लक्ष्य का अपेक्षाकृत कम होना रहा। हालाँकि,हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना की पारियों ने संघर्ष का परिचय दिया,लेकिन अन्य बल्लेबाजों से अपेक्षित योगदान नहीं मिल सका। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया ने एक चैंपियन टीम की तरह संतुलित प्रदर्शन किया और हर विभाग में बढ़त बनाए रखी।

अब सीरीज के अगले दो मुकाबले होबार्ट में खेले जाएँगे,जहाँ भारतीय टीम वापसी की कोशिश करेगी। यदि भारत को सीरीज में बने रहना है तो उसे बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में अधिक स्थिरता और आक्रामकता दिखानी होगी। वहीं ऑस्ट्रेलिया अपनी लय बरकरार रखते हुए सीरीज अपने नाम करने की कोशिश करेगा। पहला मुकाबला मेजबान टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला साबित हुआ है,जबकि भारत के लिए यह आत्ममंथन का अवसर है।