चंडीगढ़,25 फरवरी (युआईटीवी)- निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अपनी चंडीगढ़ शाखा में सामने आई कथित धोखाधड़ी की जाँच के बीच हरियाणा सरकार के विभागों को मूलधन और ब्याज सहित कुल 583 करोड़ रुपये का पूरा भुगतान कर दिया है। बैंक ने मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम ग्राहकों के विश्वास,पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बैंक ने स्पष्ट किया कि जाँच अभी जारी है,लेकिन इसके बावजूद सरकार के दावे का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया गया है।
बैंक के अनुसार,शुरुआती जाँच में संकेत मिले हैं कि चंडीगढ़ शाखा के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी पक्षों के साथ कथित मिलीभगत कर जाली दस्तावेजों और फर्जी भुगतान निर्देशों को क्लियर किया। इस प्रक्रिया के चलते हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों को वित्तीय नुकसान हुआ। बैंक ने कहा कि मामले की गहन जाँच संबंधित अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा की जा रही है,ताकि पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अपने बयान में कहा कि जाँच पूरी होने तक वह सभी जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। बैंक प्रबंधन ने यह भी भरोसा दिलाया कि आंतरिक नियंत्रण तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है,ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। बैंक का कहना है कि इस तरह की घटनाएं उसकी नीतियों और मूल्यों के विपरीत हैं और संस्था किसी भी स्तर पर अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी।
हालाँकि,जाँच अभी जारी है,लेकिन बैंक ने हरियाणा सरकार के दावे के अनुसार मूलधन और ब्याज की पूरी 583 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान कर दिया है। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम राशि में भविष्य में किसी अन्य दावे या समझौते के आधार पर बदलाव संभव है,लेकिन फिलहाल सरकार द्वारा प्रस्तुत दावे का पूर्ण निपटारा कर दिया गया है। इस कदम को बैंक की जिम्मेदारी स्वीकार करने और विवाद को शीघ्र सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
हरियाणा सरकार के विभागों ने बैंक की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि बैंक ने सिद्धांतों के आधार पर काम करते हुए बिना अनावश्यक देरी के भुगतान किया,जो वित्तीय संस्थानों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण है। प्रवक्ता के अनुसार,इस कदम से यह संदेश जाता है कि वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सर्वोपरि है, खासकर तब जब सार्वजनिक धन का मामला हो।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर लंबी कानूनी प्रक्रिया देखने को मिलती है,लेकिन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक द्वारा त्वरित भुगतान से यह संकेत मिलता है कि वह अपनी साख और विश्वसनीयता को प्राथमिकता दे रहा है। बैंकिंग क्षेत्र में भरोसा सबसे बड़ी पूँजी माना जाता है और इस प्रकार की त्वरित कार्रवाई से ग्राहकों तथा संस्थागत निवेशकों के बीच सकारात्मक संदेश जाता है।
बैंक ने अपने वित्तीय स्वास्थ्य को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। बयान के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक बैंक की पूँजी स्थिति मजबूत बनी हुई है। प्रमुख रेटिंग एजेंसी सीआरआईएसआईएल ने बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट को ट्रिपल ‘ए’ रेटिंग प्रदान की है,जो उच्चतम सुरक्षा और न्यूनतम जोखिम को दर्शाती है। इसके अलावा,सीआरआईएसआईएल, आईसीआरए,इंडिया रेटिंग्स और सीएआरई रेटिंग्स से बैंक को लॉन्ग-टर्म रेटिंग डबल ‘ए प्लस’ प्राप्त है। यह रेटिंग्स संकेत देती हैं कि बैंक की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिति स्थिर और भरोसेमंद है।
आँकड़ों के मुताबिक,बैंक का कुल कस्टमर बिजनेस,जिसमें लोन और डिपॉजिट दोनों शामिल हैं,5,62,090 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह साल-दर-साल 22.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। इस वृद्धि को बैंक की आक्रामक विस्तार रणनीति,डिजिटल बैंकिंग पर जोर और खुदरा ग्राहकों के बीच बढ़ती पैठ का परिणाम माना जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि भले ही चंडीगढ़ शाखा में कथित धोखाधड़ी का मामला गंभीर है,लेकिन बैंक द्वारा तुरंत नुकसान की भरपाई करना और जाँच में सहयोग देना उसकी संस्थागत मजबूती को दर्शाता है। अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि जाँच में किन तथ्यों का खुलासा होता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। साथ ही,बैंक के आंतरिक नियंत्रण और जोखिम प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत बनाने के प्रयासों पर भी निगाह रहेगी।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने एक चुनौतीपूर्ण स्थिति में त्वरित निर्णय लेते हुए हरियाणा सरकार को 583 करोड़ रुपये का भुगतान कर अपनी जवाबदेही दिखाई है। आने वाले समय में जाँच के नतीजे इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेंगे,लेकिन फिलहाल बैंक ने अपनी ओर से वित्तीय दायित्व निभाते हुए भरोसा बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
