नई दिल्ली,27 फरवरी (युआईटीवी)- भारत-इजराइल संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण में,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यरुशलम में संसद की संसद (केंसीसेट) के विशेष पूर्ण सत्र को संबोधित किया,जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इजराइल की पहली यात्रा थी।
यह संबोधन भारत और इजराइल के बीच राजनयिक संबंधों में एक नए अध्याय का प्रतीक था। अपने भाषण में,प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र,नवाचार और लचीलेपन के उन साझा मूल्यों पर जोर दिया जो दोनों देशों को आपस में जोड़ते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे दोनों देशों ने दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व के माध्यम से चुनौतियों को अवसरों में परिवर्तित किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि,जल प्रबंधन, रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्र में इजरायल की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि व्यापार,रक्षा,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी,अंतरिक्ष अनुसंधान और आतंकवाद-विरोधी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। उन्होंने दोनों देशों के पारस्परिक लाभ के लिए इस रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।
इस सत्र में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू,इजरायली संसद के सदस्य, राजनयिक और विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए दोनों देशों के संबंधों को आधुनिक आकांक्षाओं वाली दो प्राचीन सभ्यताओं की साझेदारी बताया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने मध्य पूर्व में स्थायी समाधान की दिशा में भारत के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और संवाद के प्रति दीर्घकालिक समर्थन को दोहराया।
इस ऐतिहासिक भाषण पर संसद के सदस्यों ने खड़े होकर तालियाँ बजाईं,जो दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ते सौहार्द को दर्शाता है। इस यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया और नवाचार,सुरक्षा,कृषि और जन-समुदायों के बीच आदान-प्रदान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की नींव रखी।
यह संबोधन कूटनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण बना हुआ है,जो भारत और इज़राइल की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और साझा भविष्य की दृष्टि का प्रतीक है।
