वॉशिंगटन,4 सितंबर (युआईटीवी)- भारत,अमेरिका,जापान और ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार को नई दिल्ली में क्वाड शेरपा बैठक के दौरान समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा,महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों तथा मानवीय सहायता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की व्यापक समीक्षा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है,जब चार देशों का समूह क्वाड अपनी अगली विदेश मंत्रियों की बैठक की तैयारियों में जुटा है। बैठक का मुख्य उद्देश्य पिछले मंत्रिस्तरीय स्तर के फैसलों को आगे बढ़ाना और भविष्य के लिए व्यावहारिक एवं परिणाम आधारित सहयोग को मजबूत करना रहा।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार,भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में आयोजित क्वाड शेरपा बैठक की मेजबानी की। बैठक में अमेरिका की ओर से दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत तथा भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हिस्सा लिया। ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व उसके विदेश मंत्रालय की उप सचिव एली लॉसन ने किया, जबकि जापान की ओर से वरिष्ठ उप विदेश मंत्री हिरोयुकी नमाजू बैठक में शामिल हुए। चारों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों के बीच क्वाड के सहयोग को और प्रभावी बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
यह बैठक 26 मई को नई दिल्ली में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद आयोजित की गई। मई में हुई मंत्रिस्तरीय बैठक में जिन विषयों और पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी,शेरपा स्तर की बैठक में उनकी प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि क्वाड की विभिन्न पहलों को केवल घोषणाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जमीन पर लागू किया जाए और उनका ठोस परिणाम दिखाई दे।
अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि बैठक में क्वाड की विभिन्न पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई और व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर विचार किया गया। चारों देशों ने एक स्वतंत्र,खुले,समावेशी और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। अधिकारियों के बीच हुई चर्चा में क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया,क्योंकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
बैठक के दौरान समुद्री और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के अलावा आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा को लेकर चारों देशों के बीच सहयोग लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने,रणनीतिक क्षेत्रों में निर्भरता कम करने तथा महत्वपूर्ण वस्तुओं और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे विषय क्वाड के व्यापक एजेंडे का हिस्सा बन चुके हैं।
महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियां भी बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता,उन्नत तकनीक,डिजिटल ढाँचे और अन्य रणनीतिक तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने की दिशा में क्वाड देश लगातार प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों ने इस बात पर विचार किया कि तकनीकी विकास के साथ-साथ सुरक्षा और विश्वसनीयता को भी किस तरह सुनिश्चित किया जा सकता है। तकनीकी क्षेत्र में सहयोग को चारों देशों की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
मानवीय सहायता और आपदा प्रतिक्रिया पर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। हिंद-प्रशांत क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील है और कई देशों को समय-समय पर चक्रवात, भूकंप, बाढ़ और अन्य आपदाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आपदा के समय राहत,बचाव और आवश्यक संसाधनों की त्वरित उपलब्धता के लिए क्वाड देशों के बीच बेहतर समन्वय विकसित करने पर जोर दिया गया। मानवीय सहायता और आपदा राहत को क्वाड के उन क्षेत्रों में माना जाता है,जहाँ सहयोग का सीधा लाभ क्षेत्रीय देशों और आम लोगों तक पहुँच सकता है।
बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया। अधिकारियों ने मौजूदा चुनौतियों और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच आपसी संवाद तथा समन्वय बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया। उनका जोर इस बात पर रहा कि चारों देश साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर नियमित परामर्श जारी रखें और जरूरत के अनुसार व्यावहारिक कदम उठाएं।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार,क्वाड शेरपाओं ने ठोस और परिणाम आधारित पहलों पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व को फिर से रेखांकित किया। इसके साथ ही अगली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले आपसी परामर्श और सहयोग को जारी रखने पर सहमति बनी। शेरपा स्तर की बैठक को इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि यह मंत्रिस्तरीय बैठकों के बीच नीतिगत फैसलों को आगे बढ़ाने और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराती है।
क्वाड में भारत,अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस समूह का एजेंडा पारंपरिक सुरक्षा मुद्दों से आगे बढ़कर आर्थिक,तकनीकी और मानवीय सहयोग तक विस्तारित हुआ है। समुद्री निगरानी और सुरक्षा के साथ-साथ महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ,बुनियादी ढाँचा,मजबूत आपूर्ति शृंखला,आर्थिक सुरक्षा और आपदा राहत जैसे क्षेत्र अब क्वाड की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
भारत के लिए क्वाड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग और रणनीतिक समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच है। वहीं,अमेरिका,जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत की साझेदारी समुद्री सुरक्षा,तकनीकी सहयोग और आर्थिक लचीलापन बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। नई दिल्ली में हुई शेरपा बैठक से संकेत मिलता है कि चारों देश आने वाले समय में क्वाड के एजेंडे को और अधिक व्यावहारिक तथा परिणाम आधारित बनाने पर जोर दे रहे हैं। अगली विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले हुई यह चर्चा चारों देशों के बीच समन्वय को मजबूत करने और साझा पहलों को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
