प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (तस्वीर क्रेडिट@rekhaschaudhari)

ईरान के मिसाइल हमलों के बाद पीएम मोदी ने यूएई राष्ट्रपति से की बात,भारत ने जताया पूरा समर्थन

नई दिल्ली, 2 मार्च (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बातचीत कर हालिया मिसाइल हमलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है,जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है और ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात पर किए गए हमलों ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को अस्थिर कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमलों की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ितों के प्रति संवेदना जताई और स्पष्ट किया कि इस कठिन समय में भारत यूएई के साथ मजबूती से खड़ा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में कहा कि उन्होंने अपने “भाई” शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात की और यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने इन हमलों में जानमाल के नुकसान पर दुख व्यक्त किया और कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में संयुक्त अरब अमीरात के साथ एकजुटता से खड़ा है। प्रधानमंत्री ने यूएई में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और देखभाल के लिए राष्ट्रपति को धन्यवाद भी दिया। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में तनाव कम करने,शांति,सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के समर्थन की बात दोहराई।

गौरतलब है कि हालिया घटनाक्रम उस व्यापक क्षेत्रीय टकराव का हिस्सा है,जो अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद तेज हुआ है। जवाबी कार्रवाई के तहत ईरान ने खाड़ी के कई देशों को निशाना बनाया,जिनमें संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल है। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार शनिवार से अब तक ईरान ने देश पर 165 बैलिस्टिक मिसाइलें, 541 ड्रोन और 2 क्रूज मिसाइलें दागी हैं। मंत्रालय का दावा है कि इनमें से अधिकांश को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया,लेकिन कुछ हमलों से दुबई,अबू धाबी और अन्य क्षेत्रों में नुकसान हुआ है।

आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक इन हमलों में अब तक कम-से-कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है,जबकि 58 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों में कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालाँकि,यूएई की वायु रक्षा प्रणाली ने बड़े पैमाने पर हमलों को विफल कर दिया,लेकिन मिसाइलों और ड्रोन की भारी संख्या ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। दुबई और अबू धाबी जैसे प्रमुख शहरों में एहतियाती कदम बढ़ा दिए गए हैं और संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंध बीते वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित है,जिसमें ऊर्जा,व्यापार,निवेश,रक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। यूएई में लगभग 35 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं,जो वहाँ की अर्थव्यवस्था और समाज का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में क्षेत्रीय अस्थिरता भारत के लिए भी चिंता का विषय है।

प्रधानमंत्री मोदी और शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी घनिष्ठ संबंध रहे हैं। दोनों नेताओं ने कई मौकों पर एक-दूसरे के देशों का दौरा किया है और द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। हाल के वर्षों में व्यापार समझौतों और निवेश पहलों के जरिए दोनों देशों ने आर्थिक संबंधों को भी मजबूत किया है। ऐसे में मौजूदा संकट के समय भारत का खुलकर समर्थन जताना कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है,खासकर तेल बाजार पर। यूएई वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है,तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव देखने को मिल सकता है। भारत,जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है,इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।

भारत ने लगातार यह रुख अपनाया है कि किसी भी क्षेत्रीय विवाद का समाधान कूटनीतिक संवाद और शांतिपूर्ण माध्यमों से होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश भी उसी नीति की निरंतरता माना जा रहा है,जिसमें उन्होंने तनाव कम करने और स्थिरता बनाए रखने की अपील की है। भारत ने हमेशा खाड़ी क्षेत्र में संतुलित और रचनात्मक भूमिका निभाने की कोशिश की है,ताकि वहाँ शांति और सहयोग का वातावरण बना रहे।

फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात में सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हैं और संभावित खतरों को देखते हुए अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं। भारत सरकार भी वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखे हुए है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

ईरान के हमलों और उसके बाद की कूटनीतिक हलचल ने खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है,लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने रणनीतिक साझेदार के साथ मजबूती से खड़ा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या क्षेत्र में तनाव कम होता है या संघर्ष और व्यापक रूप लेता है। फिलहाल,प्रधानमंत्री मोदी की पहल को संकट की घड़ी में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।