खामेनेई की मौत पर भारत में विरोध तेज (तस्वीर क्रेडिट@aajtak)

खामेनेई की मौत पर भारत में विरोध तेज,एएमयू से लखनऊ तक प्रदर्शन और बाजार बंद

अलीगढ़,2 मार्च (युआईटीवी)- ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित मौत को लेकर भारत में विरोध की लहर तेज होती जा रही है। इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद सामने आई इस खबर ने देश के कई हिस्सों में खासतौर पर मुस्लिम समुदाय के बीच गहरा आक्रोश और शोक पैदा किया है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से लेकर राजधानी लखनऊ तक प्रदर्शन,बाजार बंद और श्रद्धांजलि सभाओं का सिलसिला जारी है।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी परिसर में छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। परिसर के अंदर जुटे छात्रों ने खामेनेई के समर्थन में नारे लगाए और इजरायल तथा अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की। प्रदर्शन में केवल छात्र ही नहीं,बल्कि स्थानीय लोग भी शामिल हुए। माहौल गमगीन होने के साथ-साथ आक्रोश से भरा हुआ नजर आया। प्रदर्शनकारियों ने काले बैनर और पोस्टर लेकर अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं।

एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह नौ वर्षों तक ईरान में रह चुका है और खामेनेई को एक मजबूत और सिद्धांतवादी नेता के रूप में देखता है। उसने कहा कि खामेनेई की मौत के बाद उन्होंने पहले दोपहर में और फिर रात में प्रदर्शन किया। उसका कहना था कि यह विरोध आगे भी जारी रहेगा और वे अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे। प्रदर्शनकारी ने इजरायल और अमेरिका को संदेश देते हुए कहा कि ईरान पर हमले का अर्थ यह नहीं है कि देश समाप्त हो जाएगा। उसके अनुसार ईरान मजबूती से खड़ा रहेगा और जवाब भी उतनी ही मजबूती से देगा। उसने कहा कि खामेनेई ने अपने जीवन से यह साबित किया कि वह कभी झुकने वाले नेता नहीं थे।

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने खामेनेई को इंसानियत का नेता बताते हुए कहा कि वे केवल ईरान के नहीं,बल्कि दुनिया भर के पीड़ितों और वंचितों की आवाज थे। प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों ने कहा कि वे इस घटना को केवल एक देश के नेता की मौत के रूप में नहीं देख रहे,बल्कि इसे वैश्विक राजनीति में बढ़ती आक्रामकता के प्रतीक के तौर पर मान रहे हैं।

इस विरोध की गूँज राजधानी लखनऊ में भी सुनाई दी। पुराने लखनऊ के इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और शोक मार्च निकाला। स्थानीय व्यापारियों और धार्मिक संगठनों ने मिलकर तीन दिनों तक बाजार बंद रखने का निर्णय लिया। यह बंद खामेनेई के प्रति श्रद्धांजलि और विरोध के प्रतीक के रूप में रखा गया। कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर सन्नाटा दिखाई दिया।

ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा को भी निर्धारित अवधि के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया। यह फैसला शोक प्रकट करने के उद्देश्य से लिया गया। इसके साथ ही छोटा इमामबाड़ा परिसर में भी विशेष प्रार्थनाएँ आयोजित की गईं। शिया समुदाय के लोगों ने दोनों धार्मिक स्थलों पर खामेनेई के पोस्टर लगाए और काले झंडे फहराकर शोक व्यक्त किया। वातावरण में मातमी सन्नाटा और भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने लोगों से अपील की कि वे इंसानियत और एकजुटता के संदेश के तहत अपनी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करें। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की मौत का शोक नहीं,बल्कि उन मूल्यों के प्रति सम्मान है,जिनका प्रतिनिधित्व खामेनेई करते थे। उनकी अपील के बाद कई व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।

विरोध के प्रतीक के रूप में छोटा इमामबाड़ा के मुख्य द्वार पर इजरायल और अमेरिकी झंडे जमीन पर रखे गए। प्रदर्शनकारियों ने इसे प्रतीकात्मक विरोध बताया। हालाँकि,स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई,ताकि शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं का असर भारत जैसे बहुलतावादी समाज में भावनात्मक प्रतिक्रिया के रूप में देखने को मिलता है। ईरान और खामेनेई को लेकर विशेष रूप से शिया समुदाय में गहरी भावनात्मक जुड़ाव की भावना रही है। ऐसे में उनकी मौत की खबर ने स्वाभाविक रूप से शोक और आक्रोश दोनों को जन्म दिया है।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि विरोध शांतिपूर्ण रहे और किसी प्रकार की हिंसा या टकराव की स्थिति न बने। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे अपनी भावनाएँ लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विरोध किस दिशा में जाता है और क्या इसका विस्तार अन्य शहरों तक भी होता है।