मध्य-पूर्व संकट के बीच भारतीय नौसेना अलर्ट (तस्वीर क्रेडिट@narendramodi)

मध्य-पूर्व संकट के बीच भारतीय नौसेना अलर्ट: ओमान की खाड़ी में तैनात आईएनएस सूरत,जरूरत पड़ने पर शुरू हो सकता है बड़ा राहत अभियान

नई दिल्ली,3 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। हवाई हमलों,मिसाइल हमलों और समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव के कारण अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर व्यापक असर पड़ा है। कई एयरलाइंस ने सुरक्षा कारणों से अपनी उड़ानें स्थगित कर दी हैं,जिसके चलते बड़ी संख्या में भारतीय यात्री खाड़ी और आसपास के देशों में फँसे हुए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने विशेष उड़ानों के जरिए भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही भारतीय नौसेना भी पूरी तरह सतर्क है और क्षेत्र में पहले से तैनात उसके युद्धपोत किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

भारतीय नौसेना वर्ष 2017 से ‘मिशन डेप्लॉयमेंट’ के तहत हिंद महासागर क्षेत्र और उससे जुड़े रणनीतिक समुद्री मार्गों पर लगातार उपस्थिति बनाए हुए है। इसी मिशन के तहत ओमान की खाड़ी के पास ‘ऑपरेशन संकल्प’ और अदन की खाड़ी में ‘एंटी-पायरेसी ऑपरेशन’ चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के तहत भारतीय नौसेना के एक-एक युद्धपोत ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के पास तैनात रहते हैं,ताकि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों को तुरंत अंजाम दिया जा सके।

फिलहाल ओमान की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर आईएनएस सूरत तैनात है। यह युद्धपोत अपनी मारक क्षमता और तकनीकी दक्षता के कारण नौसेना की सबसे शक्तिशाली संपत्तियों में गिना जाता है। सूत्रों के अनुसार,यदि क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं या भारतीय नागरिकों की निकासी की जरूरत पड़ती है,तो यह युद्धपोत राहत और बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा अदन की खाड़ी में तैनात अन्य भारतीय युद्धपोतों को भी आवश्यकता पड़ने पर कम समय में इस क्षेत्र में स्थानांतरित किया जा सकता है।

आईएनएस सूरत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टील्थ क्षमता है। यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आए बिना अपने मिशन को अंजाम दे सकता है। यह सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली आधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लैस है। इसमें 16-16 मिसाइलों के दो वर्टिकल लॉन्चर लगे हैं,जिनके माध्यम से कुल 32 मीडियम रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइलें दागी जा सकती हैं। इसके अलावा एंटी-सर्फेस वॉरफेयर के लिए इसमें ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम भी लगा है,जिससे 16 ब्रह्मोस मिसाइलें दागी जा सकती हैं। दुश्मन की पनडुब्बियों से निपटने के लिए इसमें आधुनिक रॉकेट लॉन्चर और टॉरपीडो लॉन्चर भी मौजूद हैं। 163 मीटर लंबा और लगभग 7,400 टन वजनी यह युद्धपोत चार शक्तिशाली गैस टर्बाइनों से संचालित होता है और इसकी अधिकतम रफ्तार लगभग 30 नॉटिकल मील प्रति घंटा है।

मध्य-पूर्व में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की प्राथमिकता रही है। पिछले वर्षों में खाड़ी क्षेत्र और अफ्रीकी देशों में उत्पन्न संकटों के दौरान भारतीय नौसेना ने कई सफल राहत अभियान चलाए हैं। वर्ष 2023 में सूडान में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनने पर भारत ने ‘ऑपरेशन कावेरी’ चलाया,जिसमें फँसे भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान ‘ऑपरेशन समुद्र सेतु’ के तहत खाड़ी देशों, मालदीव और श्रीलंका से हजारों भारतीयों की सुरक्षित वापसी कराई गई। इससे पहले 2015 में यमन संकट के दौरान ‘ऑपरेशन राहत’ चलाया गया था,जिसमें बड़ी संख्या में भारतीयों को युद्धग्रस्त क्षेत्र से निकाला गया। वर्ष 2011 में लीबिया से ‘ऑपरेशन सेफ होमकमिंग’ और 2006 में लेबनान से ‘ऑपरेशन सुकून’ के तहत भी भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया था। इन अभियानों ने वैश्विक स्तर पर भारतीय नौसेना की दक्षता और तत्परता को स्थापित किया है।

वर्तमान संकट के संदर्भ में ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी का सामरिक महत्व और भी बढ़ जाता है। स्ट्रेट ऑफ होरमुज के पास स्थित ओमान की खाड़ी से होकर भारत का लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार गुजरता है। यदि इस मार्ग में किसी प्रकार की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। अदन की खाड़ी से होकर भारत का लगभग 90 प्रतिशत अन्य व्यापार होता है,जो स्वेज नहर और रेड सी के रास्ते अरब सागर तक पहुँचता है। यह क्षेत्र समुद्री डकैती के लिए भी संवेदनशील माना जाता है। जिबूती और सोमालिया के समुद्री लुटेरे इसी इलाके में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में भारतीय नौसेना की निरंतर उपस्थिति न केवल भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों की स्थिरता में भी योगदान देती है।

यदि अदन की खाड़ी का मार्ग बाधित हो जाता है,तो व्यापारी जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाकर आना-जाना पड़ता है। इससे न केवल समय बढ़ता है,बल्कि ईंधन और बीमा लागत भी काफी बढ़ जाती है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। इसलिए भारत सहित कई देशों की नौसेनाएँ इस क्षेत्र में सक्रिय रहती हैं और आपसी सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा को मजबूत करती हैं।

भारतीय नौसेना के ‘मिशन डेप्लॉयमेंट’ के तहत वर्तमान में छह युद्धपोत विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में तैनात रहते हैं। अरब सागर में स्ट्रेट ऑफ होरमुज के पास तैनाती ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अदन की खाड़ी में तैनाती समुद्री डकैती और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। सेशेल्स के पास तैनाती केप ऑफ गुड होप मार्ग से आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी के लिए है। मालदीव के पास तैनाती हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। अंडमान-निकोबार के पास तैनाती पूर्वी समुद्री मार्गों और मलक्का जलडमरूमध्य की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है,जबकि म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास बंगाल की खाड़ी में तैनाती पूर्वी तट की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

इन तैनातियों के दौरान भारतीय युद्धपोत मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास भी करते हैं। इससे आपसी तालमेल बढ़ता है और संकट की स्थिति में समन्वित कार्रवाई संभव हो पाती है। समुद्री दुर्घटना,प्राकृतिक आपदा या युद्ध जैसी परिस्थितियों में भारतीय नौसेना ने हमेशा मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है।

मध्य-पूर्व में मौजूदा संघर्ष के बीच भारत की रणनीति दोहरी है। एक ओर वह कूटनीतिक स्तर पर शांति और स्थिरता की अपील कर रहा है,वहीं दूसरी ओर अपने नागरिकों और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए सैन्य और मानवीय तैयारियाँ भी मजबूत कर रहा है। विशेष उड़ानों के जरिए भारतीयों की वापसी और समुद्र में युद्धपोतों की तैनाती इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों,व्यापार मार्गों और भू-राजनीतिक संतुलन पर पड़ेगा। ऐसे में भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना की सक्रिय उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन कितने महत्वपूर्ण हैं। ओमान की खाड़ी में तैनात आईएनएस सूरत और अन्य युद्धपोत भारत की तैयारियों का प्रतीक हैं। यदि जरूरत पड़ी,तो भारतीय नौसेना एक बार फिर बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाने में सक्षम है। वर्तमान हालात में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करना ही भारत की प्राथमिकता है और नौसेना इसके लिए पूरी तरह अलर्ट मोड में है।