मतदान

बंगाल चुनाव के पहले चरण में मुर्शिदाबाद में तनाव,नवादा क्षेत्र में दो गुटों के बीच झड़प से बढ़ी सियासी गर्मी

कोलकाता, 23 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत गुरुवार को 152 सीटों पर मतदान जारी है और राज्यभर में लोकतंत्र के इस महापर्व को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें नजर आईं,जहाँ लोग बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। हालाँकि,इस उत्साह के बीच मुर्शिदाबाद जिले के नवादा विधानसभा क्षेत्र से आई तनाव की खबर ने चुनावी माहौल को थोड़ा असहज जरूर बना दिया है।

नवादा इलाके में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और आम जनता उन्नयन पार्टी के समर्थकों के बीच अचानक झड़प हो गई,जिससे स्थिति कुछ समय के लिए नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दी। बताया जा रहा है कि यह तनाव उस समय और बढ़ गया,जब आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर घटनास्थल का जायजा लेने पहुँचे। उनके पहुँचते ही स्थानीय लोगों और तृणमूल समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया,जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और बहस देखने को मिली।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार पहले तो बहस तक ही मामला सीमित था,लेकिन जल्द ही माहौल गरमा गया और दोनों गुट आमने-सामने आ गए। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया,लेकिन इस दौरान पुलिस और हुमायूं कबीर के बीच भी तीखी बहस हो गई। इस घटना के कई वीडियो सामने आए हैं,जिनमें साफ देखा जा सकता है कि मौके पर तनावपूर्ण हालात बन गए थे और पुलिस स्थिति को सँभालने की कोशिश कर रही थी।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। अतिरिक्त पुलिस बल के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी तैनात कर दिया गया है,ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो।

बताया जा रहा है कि हुमायूं कबीर उस इलाके में उस घटना के बाद पहुँचे थे,जिसमें एक दिन पहले कथित तौर पर क्रूड बम फेंके जाने की खबर सामने आई थी। इसी घटना को लेकर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इलाके में जानबूझकर तनाव का माहौल बनाया जा रहा है और गुंडागर्दी को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनके बयान से साफ है कि चुनावी माहौल में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी अपने चरम पर हैं।

हुमायूं कबीर ने अपने बयान में कहा कि वह इलाके में तब तक मौजूद रहेंगे,जब तक लोग शांतिपूर्ण तरीके से मतदान नहीं कर लेते। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुर्शिदाबाद में राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और उनकी पार्टी तेजी से मजबूत हो रही है। उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में चर्चा और तेज हो गई है,क्योंकि यह चुनाव पहले से ही काफी संवेदनशील माना जा रहा है।

दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्षी दल चुनाव के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि जनता उनके साथ है और इस तरह के आरोप केवल राजनीतिक लाभ के लिए लगाए जा रहे हैं। इस तरह दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है,जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया है।

मुर्शिदाबाद जैसे संवेदनशील जिले में इस तरह की घटनाएँ प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं। चुनाव आयोग पहले ही इस क्षेत्र को संवेदनशील घोषित कर चुका है और यहाँ विशेष निगरानी रखी जा रही है। बावजूद इसके,बीच-बीच में सामने आने वाली ऐसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि जमीनी स्तर पर तनाव अब भी मौजूद है।

हालाँकि,राज्य के अन्य हिस्सों में मतदान अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण तरीके से जारी है और लोग बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुँच रहे हैं। चुनाव आयोग और प्रशासन की ओर से लगातार यह अपील की जा रही है कि मतदाता किसी भी अफवाह या उकसावे में न आएँ और शांति बनाए रखें।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल का चुनाव केवल राजनीतिक मुकाबला ही नहीं,बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी एक बड़ी परीक्षा है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह हर स्थिति पर नजर बनाए रखे और किसी भी तरह के तनाव को समय रहते नियंत्रित करे।

फिलहाल नवादा क्षेत्र में हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं और मतदान प्रक्रिया जारी है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी से लोगों में भरोसा बना हुआ है कि वे बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। अब देखना होगा कि आने वाले समय में स्थिति किस तरह से आगे बढ़ती है और क्या बाकी मतदान चरणों में भी शांति बनी रहती है या नहीं।