नई दिल्ली/गुवाहाटी,6 मार्च (युआईटीवी)- असम में नियमित प्रशिक्षण मिशन के दौरान भारतीय वायुसेना का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान में सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई। भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार सुबह इस दुखद घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर को गंभीर चोटें आईं,जिसके कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस हादसे ने वायुसेना और पूरे देश को शोक में डाल दिया है।
भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने आधिकारिक बयान में दोनों अधिकारियों के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। वायुसेना ने कहा कि वह इस कठिन समय में दोनों पायलटों के परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी सेवा तथा बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। बयान में कहा गया कि वायुसेना के सभी अधिकारी और जवान इस क्षति से बेहद दुखी हैं और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं।
दरअसल,गुरुवार को यह जानकारी सामने आई थी कि भारतीय वायुसेना का एक सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट असम के ऊपर उड़ान के दौरान अचानक लापता हो गया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार विमान असम के कार्बी आंगलोंग जिले के पहाड़ी क्षेत्र के ऊपर नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था,जब अचानक उसका ग्राउंड कंट्रोल से संपर्क टूट गया। विमान के रडार से गायब होने के बाद तुरंत खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया था।
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) ने बताया कि फाइटर जेट अपने निर्धारित रूटीन मिशन पर उड़ान भर रहा था और सब कुछ सामान्य था। लेकिन उड़ान के दौरान अचानक विमान का संपर्क ग्राउंड कंट्रोल से टूट गया और वह रडार से गायब हो गया। जैसे ही यह जानकारी सामने आई,वायुसेना ने तुरंत खोज अभियान शुरू किया और संबंधित क्षेत्र में कई टीमें भेजी गईं। जिस इलाके में विमान का संपर्क टूटा था,वह घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों से घिरा हुआ है,जिससे खोज अभियान को काफी चुनौती का सामना करना पड़ा।
घटना के अगले दिन भारतीय वायुसेना ने पुष्टि की कि लापता हुआ विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और इस हादसे में दोनों पायलटों की मौत हो गई। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए वायुसेना ने जाँच के आदेश दे दिए हैं। माना जा रहा है कि तकनीकी खराबी,मौसम या किसी अन्य कारण की जाँच की जाएगी,ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना के सबसे शक्तिशाली और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में से एक है। यह एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है,जो हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन को अंजाम देने में सक्षम है। रूस और भारत के सहयोग से विकसित यह विमान भारतीय वायुसेना की ताकत का अहम हिस्सा माना जाता है। लंबी दूरी की मारक क्षमता,अत्याधुनिक रडार सिस्टम और उन्नत हथियारों से लैस होने के कारण इसे भारतीय वायुसेना की फ्रंटलाइन फाइटर कैटेगरी में रखा जाता है।
हालाँकि,सुखोई-30 एमकेआई से जुड़ी दुर्घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। अगस्त 2019 में भी असम में एक सुखोई-30 एमकेआई विमान प्रशिक्षण मिशन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस समय विमान तेज़पुर के पास एक धान के खेत में गिर गया था। हालाँकि,उस हादसे में दोनों पायलट समय रहते इजेक्ट करने में सफल रहे थे और बाद में उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया था।
इसी तरह मई 2015 में भी एक अन्य सुखोई-30 एमकेआई विमान तेजपुर एयरफोर्स बेस से उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस घटना में भी दोनों पायलटों ने समय रहते विमान से बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली थी। इन घटनाओं के बावजूद सुखोई-30 एमकेआई को भारतीय वायुसेना का भरोसेमंद और शक्तिशाली लड़ाकू विमान माना जाता है।
असम में हुई ताजा दुर्घटना ने एक बार फिर वायुसेना के प्रशिक्षण मिशनों से जुड़े जोखिमों को उजागर कर दिया है। सैन्य विमानन में प्रशिक्षण उड़ानें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि इनके जरिए पायलट युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार होते हैं,लेकिन इन मिशनों के दौरान जोखिम भी काफी अधिक होता है,क्योंकि पायलटों को जटिल परिस्थितियों में उड़ान भरनी पड़ती है।
देशभर में इस हादसे को लेकर शोक की लहर है। कई सैन्य अधिकारियों,नेताओं और आम नागरिकों ने दोनों पायलटों के निधन पर दुख जताया है और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। भारतीय वायुसेना के अधिकारियों का कहना है कि दोनों पायलट बेहद कुशल और समर्पित अधिकारी थे,जिन्होंने देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
फिलहाल वायुसेना ने दुर्घटना की विस्तृत जाँच शुरू कर दी है। जाँच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विमान दुर्घटनाग्रस्त होने के पीछे वास्तविक कारण क्या था। तब तक यह घटना भारतीय वायुसेना के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में याद की जाएगी,जिसमें दो बहादुर पायलटों ने देश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवा दी।
