ईरानी हमले पर कतर का कड़ा रुख (तस्वीर क्रेडिट@24_70xu)

ईरानी हमले पर कतर का कड़ा रुख,ईरानी राजनयिकों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश

दोहा, 19 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कतर ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। कतर ने रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाकर किए गए कथित ईरानी हमले की कड़ी निंदा की है और इसे अपनी संप्रभुता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला बताया है। इस घटनाक्रम के बाद कतर ने ईरानी दूतावास के सैन्य अटैशे,सुरक्षा अटैशे और उनके कार्यालय के स्टाफ को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित करते हुए 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दे दिया है।

कतर के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह हमला न केवल देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता का उल्लंघन है,बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी गंभीर खतरा है। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और नियमों के खिलाफ है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कतर ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का हवाला देते हुए कहा कि ईरान का यह कदम इस प्रस्ताव का खुला उल्लंघन है।

‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ की घोषणा अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में एक अत्यंत कठोर कदम माना जाता है। जब कोई देश किसी विदेशी राजनयिक को अपने यहाँ स्वीकार नहीं करता या उसे तत्काल देश छोड़ने के लिए कहता है,तो उसे यही दर्जा दिया जाता है। कतर द्वारा उठाया गया यह कदम इस बात का संकेत है कि वह इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रहा है और अपनी सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहता।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी कहा कि कतर शुरू से ही क्षेत्रीय संघर्षों से खुद को दूर रखने और संतुलित नीति अपनाने के पक्ष में रहा है। इसके बावजूद ईरान द्वारा लगातार उकसावे वाली कार्रवाइयाँ और पड़ोसी देशों को निशाना बनाना एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। मंत्रालय ने इसे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताते हुए कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है और अंतर्राष्ट्रीय शांति पर भी खतरा मंडरा रहा है।

कतर ने इस बात पर जोर दिया कि उसने पहले भी कई बार सभी पक्षों से संयम बरतने और विशेष रूप से नागरिक क्षेत्रों तथा ऊर्जा अवसंरचनाओं को निशाना न बनाने की अपील की थी। रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी,जो कतर के ऊर्जा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र है,पर हमला न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। ऐसे में इस हमले को कतर ने एक बड़ी रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा है।

बयान में कहा गया कि ईरान की नीतियां लगातार क्षेत्र को अस्थिरता की ओर धकेल रही हैं और इससे उन देशों के भी संघर्ष में शामिल होने का खतरा बढ़ रहा है,जो सीधे तौर पर इस विवाद का हिस्सा नहीं हैं। कतर ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की गतिविधियाँ जारी रहीं,तो इसका प्रभाव व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष के रूप में सामने आ सकता है।

कतर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से भी इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उसने कहा कि परिषद को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ऐसे गंभीर उल्लंघनों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए और दोषियों को जवाबदेह ठहराना चाहिए। कतर ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह इस मामले में निष्पक्ष और प्रभावी हस्तक्षेप करे ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखी जा सके।

इसके साथ ही कतर ने स्पष्ट किया कि उसके पास आत्मरक्षा का अधिकार सुरक्षित है। उसने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र को अपनी सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। मंत्रालय ने कहा कि कतर अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने में संकोच नहीं करेगा।

यह फैसला कतर के विदेश मंत्रालय में प्रोटोकॉल निदेशक इब्राहिम यूसुफ फखरो और कतर में ईरान के राजदूत अली सालेहाबादी के बीच हुई एक अहम बैठक के दौरान आधिकारिक नोट के जरिए सुनाया गया। इस बैठक में कतर ने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि वह इस प्रकार के हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि कतर का यह कदम केवल एक कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं,बल्कि एक रणनीतिक संकेत भी है। यह संदेश स्पष्ट रूप से ईरान के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के लिए भी है कि कतर अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाने को तैयार है। साथ ही,यह कदम अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कतर की स्थिति को भी मजबूत करता है,जहाँ वह खुद को एक जिम्मेदार और नियमों का पालन करने वाले देश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

इस घटनाक्रम के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पहले से ही क्षेत्र कई संघर्षों और विवादों से जूझ रहा है,ऐसे में इस तरह की घटनाएँ स्थिति को और जटिल बना सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया,तो यह विवाद बड़े संकट का रूप ले सकता है।

कतर द्वारा उठाया गया यह कदम उसकी सख्त नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते तनाव को कम करने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल,इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है, जिसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।