ऑस्ट्रेलिया का नेशनल इंडियन फिल्म फेस्टिवल 'बूंग' के साथ शुरू हुआ (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

ऑस्ट्रेलिया में भारतीय सिनेमा की धूम,नेशनल इंडियन फिल्म फेस्टिवल 2026 का भव्य आगाज

मुंबई,19 मार्च (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलिया में भारतीय सिनेमा के चाहने वालों के लिए एक बार फिर जश्न का माहौल है। नेशनल इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ ऑस्ट्रेलिया (एनआईएफएफए) के दूसरे संस्करण का शानदार आगाज हो चुका है। इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव की शुरुआत एक भव्य रेड-कार्पेट प्रीमियर के साथ हुई,जिसमें बाफ्टा अवॉर्ड जीतने वाली चर्चित भारतीय फिल्म ‘बूंग’ को प्रदर्शित किया गया। इस आयोजन ने न केवल भारतीय फिल्मों की वैश्विक पहुँच को दर्शाया,बल्कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ती दिलचस्पी को भी उजागर किया।

फेस्टिवल का उद्घाटन कार्यक्रम ऑस्ट्रेलिया के ग्रेटर जिलॉन्ग शहर में आयोजित किया गया,जहाँ स्थानीय प्रशासन और फिल्म जगत के कई प्रमुख लोगों की मौजूदगी ने इसे और खास बना दिया। इस कार्यक्रम की मेजबानी ग्रेटर जिलॉन्ग के मेयर ने की,जबकि आयोजन को सफल बनाने में जिलॉन्ग वॉटरफ्रंट फिल्म फाउंडेशन और स्थानीय प्रशासन की अहम भूमिका रही। यह सहयोग दर्शाता है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय सिनेमा को लेकर किस तरह का उत्साह और समर्थन मौजूद है।

फिल्म ‘बूंग’ इस बार के फेस्टिवल की ओपनिंग फिल्म रही,जिसने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में सफलता हासिल की। यह फिल्म एक छोटे बच्चे ‘बूंग’की कहानी पर आधारित है,जो अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ अपने पिता को खोजने की यात्रा पर निकलता है। फिल्म की संवेदनशील कहानी और मजबूत प्रस्तुति ने इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना दिलाई है और यही वजह है कि इसे इस महोत्सव की शुरुआत के लिए चुना गया।

यह फेस्टिवल 18 मार्च से शुरू होकर 5 जुलाई तक चलेगा और इस दौरान पूरे ऑस्ट्रेलिया में विभिन्न शहरों में फिल्म स्क्रीनिंग, इंटरैक्टिव सत्र और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। एनआईएफएफए का उद्देश्य केवल फिल्मों का प्रदर्शन करना नहीं है,बल्कि भारतीय संस्कृति,कहानियों और रचनात्मकता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना भी है।

इस बार फेस्टिवल की पहुँच और भी व्यापक हो गई है। यह ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख शहरों जैसे सिडनी,मेलबर्न और पर्थ में तो आयोजित होगा ही,साथ ही ब्रोकन हिल और एलिस स्प्रिंग्स जैसे दूर-दराज के इलाकों तक भी पहुँचेगा। इससे उन दर्शकों को भी भारतीय सिनेमा का अनुभव मिलेगा,जो आमतौर पर ऐसे आयोजनों से दूर रहते हैं। यह पहल भारतीय फिल्मों को एक नई ऑडियंस तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

फेस्टिवल का एक और खास आकर्षण रहा भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर को ‘इंटरनेशनल इंडियन सिनेमा आइकन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जाना। अनुपम खेर का करियर कई दशकों में फैला हुआ है और उन्होंने न केवल भारतीय फिल्मों में,बल्कि अंतराष्ट्रीय सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी फिल्मों में विविधता और अभिनय की गहराई ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है।

इस सम्मान को प्राप्त करने के बाद अनुपम खेर ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद गर्व और सम्मान का क्षण है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए कहा कि यहाँ के लोगों में भारतीय संस्कृति और कहानियों के प्रति सच्ची जिज्ञासा और अपनापन हमेशा से रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के फिल्म फेस्टिवल सांस्कृतिक पुल का काम करते हैं,जो अलग-अलग देशों और समुदायों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं।

एनआईएफएफए जैसे आयोजनों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वे सिनेमा को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखते,बल्कि इसे एक सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बनाते हैं। भारतीय सिनेमा अपनी विविधता,भावनात्मक गहराई और सामाजिक विषयों के कारण दुनिया भर में पसंद किया जाता है। ऐसे में इस तरह के फेस्टिवल भारतीय फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं।

फेस्टिवल के दौरान दर्शकों को नई फिल्मों के साथ-साथ क्लासिक भारतीय फिल्मों का भी आनंद लेने का मौका मिलेगा। इसके अलावा,फिल्म निर्माताओं,कलाकारों और दर्शकों के बीच संवाद के लिए भी कई विशेष सत्र आयोजित किए जाएँगे,जहाँ सिनेमा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। यह न केवल मनोरंजन का अवसर है,बल्कि सीखने और समझने का भी मंच है।

ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की बढ़ती संख्या और उनकी सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी ने भी इस फेस्टिवल की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय सिनेमा के प्रति यहाँ के लोगों का बढ़ता रुझान इस बात का संकेत है कि भारतीय कहानियाँ अब वैश्विक दर्शकों के साथ भी गहराई से जुड़ रही हैं।

नेशनल इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ ऑस्ट्रेलिया का यह दूसरा संस्करण भारतीय सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह न केवल फिल्मों के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दे रहा है,बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों को भी और मजबूत बना रहा है। आने वाले महीनों में यह फेस्टिवल और भी नई कहानियों, प्रतिभाओं और सांस्कृतिक अनुभवों को सामने लाएगा,जिससे भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान और सशक्त होगी।