नई दिल्ली,20 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच कूटनीतिक सक्रियता तेज हो गई है। इसी कड़ी में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को यूएई की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मामलों की राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी से मुलाकात की। इस अहम बैठक में दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा की और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर साझा चिंता व्यक्त की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि रीम अल हाशिमी से मिलकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने यूएई सरकार द्वारा वहाँ रह रहे भारतीय समुदाय की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों के लिए आभार भी जताया। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक वहाँ काम कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट की शुरुआत 28 फरवरी को हुए बड़े हमलों के बाद हुई,जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल की ओर से हमले किए गए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबरों ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। इसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए,जिनमें उसने अमेरिकी और इजरायली ठिकानों के साथ-साथ उनके सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बनाया।
इस बढ़ते टकराव ने खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है,जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है। भारत,जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है,इस संकट को बेहद गंभीरता से देख रहा है। यही वजह है कि भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है और क्षेत्रीय शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग कर रहा है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी बातचीत की थी। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की और यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की,जिनमें निर्दोष लोगों की जान गई और नागरिक ढाँचे को नुकसान पहुँचा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत के दौरान यूएई के साथ भारत की एकजुटता दोहराई और कहा कि भारत हर मुश्किल घड़ी में अपने मित्र देशों के साथ खड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में होर्मुज जलडमरूमध्य का भी उल्लेख किया,जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। उन्होंने कहा कि इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इस मुद्दे पर भारत और यूएई के बीच पूरी सहमति बनी है और दोनों देश इस दिशा में मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत और यूएई के बीच संबंध हाल के वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। व्यापार,निवेश,ऊर्जा और प्रवासी भारतीयों के हित जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
विदेश मंत्री जयशंकर और रीम अल हाशिमी की बैठक इसी व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है। इस बैठक में न केवल वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई,बल्कि भविष्य में संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता की बहाली के लिए संवाद और सहयोग ही सबसे प्रभावी माध्यम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह सक्रिय कूटनीति उसकी संतुलित विदेश नीति को दर्शाती है। एक ओर भारत अपने रणनीतिक हितों की रक्षा कर रहा है,वहीं दूसरी ओर वह वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी योगदान दे रहा है। पश्चिम एशिया में भारत के मजबूत संबंध और विश्वसनीय छवि उसे इस संकट में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करते हैं।
कुल मिलाकर,विदेश मंत्री एस. जयशंकर और यूएई की मंत्री रीम अल हाशिमी के बीच हुई यह बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी,बल्कि यह उस व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है,जिसके जरिए भारत और यूएई मिलकर पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन प्रयासों का क्षेत्रीय हालात पर क्या प्रभाव पड़ता है,लेकिन फिलहाल दोनों देशों की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से सामने आ रही है।
