प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप

मोदी-ट्रंप वार्ता: होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर जोर,पश्चिम एशिया में शांति के लिए बढ़े कदम

नई दिल्ली,25 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की पृष्ठभूमि में भारत और अमेरिका के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद तेज हो गया है। इसी कड़ी में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण टेलीफोनिक वार्ता हुई,जिसमें दोनों नेताओं ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चर्चा की। इस बातचीत में खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की निरंतरता पर जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस वार्ता के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचारों का उपयोगी आदान-प्रदान हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस समय तनाव कम करने और जल्द-से-जल्द शांति बहाल करने के पक्ष में है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला,सुरक्षित और सुगम बना रहना पूरी दुनिया के हित में है,क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है।

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को लगभग 25 दिन हो चुके हैं और इस दौरान क्षेत्र में स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की गतिविधियों और संभावित अवरोधों के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसका सीधा प्रभाव भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है,जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करते हैं। भारत लगभग 60 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल और गैस पश्चिम एशिया से आयात करता है,ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

इस टेलीफोनिक वार्ता में दोनों नेताओं ने न केवल वर्तमान हालात पर चर्चा की,बल्कि यह भी सहमति जताई कि क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति एवं स्थिरता बहाल करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि वे इस मुद्दे पर एक-दूसरे के संपर्क में बने रहेंगे और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बढ़ाएँगे।

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम में एक संतुलित और जिम्मेदार रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार,भारत कूटनीतिक माध्यमों के जरिए इस संकट का समाधान निकालने के प्रयासों का समर्थन करता है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करता रहा है। भारत का मानना है कि किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या हिंसा से समस्या का समाधान नहीं हो सकता,बल्कि इससे स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य,जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है,वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार का अवरोध वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकता है और ऊर्जा की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव ला सकता है। यही कारण है कि भारत ने इस जलमार्ग की सुरक्षा को वैश्विक हित से जोड़ते हुए इसे खुला और सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है,तो इसका असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक व्यापार,आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक स्थिरता पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा। भारत जैसे उभरते हुए अर्थतंत्र के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है,क्योंकि उसकी आर्थिक वृद्धि काफी हद तक ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता पर निर्भर करती है।

इस बीच,यह भी उल्लेखनीय है कि यह वार्ता पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच पहली सीधी बातचीत थी। इस संवाद को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पिछले वर्ष नवंबर में राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह इस वर्ष भारत की यात्रा कर सकते हैं,खासकर क्वाड शिखर सम्मेलन के सिलसिले में। क्वाड समूह,जिसमें भारत,अमेरिका,जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं,हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग और संतुलन बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। ऐसे में ट्रंप की संभावित भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत कर सकती है।

भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे रहा है,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक स्थिर और संतुलित व्यवस्था की ओर संकेत करता है। पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट के बीच दोनों देशों का यह संवाद इस बात का प्रमाण है कि वे अंतर्राष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई यह बातचीत न केवल वर्तमान संकट को लेकर उनकी गंभीरता को दर्शाती है,बल्कि यह भी संकेत देती है कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल संवाद,सहयोग और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह शांति,स्थिरता और वैश्विक हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करता रहेगा।