निक्की हेली

ईरान पर सख्त रुख की वकालत,निक्की हेली ने ट्रंप के ‘ब्लॉकेड प्लान’ का किया समर्थन

वाशिंगटन,13 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारतीय मूल की प्रमुख रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख का समर्थन करते हुए साफ कहा है कि ईरान के साथ बातचीत से पीछे हटना सही फैसला था। उन्होंने ‘ब्लॉकेड प्लान’ को एक जरूरी रणनीतिक कदम बताते हुए चेतावनी दी कि तेहरान होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है। हेली के इस बयान ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी राजनीति में ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाने की माँग लगातार मजबूत हो रही है।

सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में हेली ने खुलासा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के प्रस्तावों में भारी अंतर था। उनके मुताबिक,अमेरिका के पास 15 बिंदुओं वाला प्रस्ताव था,जबकि ईरान 10 बिंदुओं के अपने एजेंडे पर अड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद इतने गहरे थे कि किसी समझौते की संभावना लगभग खत्म हो चुकी थी। हेली के अनुसार,ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को सीमित करने और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण छोड़ने के लिए तैयार नहीं था,जो बातचीत के विफल होने की मुख्य वजह बना।

हेली ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस फैसले का समर्थन किया,जिसमें उन्होंने बातचीत को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि ऐसी बातचीत,जिसमें कोई ठोस प्रगति न हो,अमेरिका के समय और संसाधनों की बर्बादी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब ट्रंप प्रशासन आगे बढ़ चुका है और वह ईरान पर वहाँ चोट करेगा,जहाँ उसे सबसे ज्यादा नुकसान होगा। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी नेतृत्व अब कूटनीतिक प्रयासों से आगे बढ़कर अधिक कठोर रणनीति अपनाने की ओर झुक रहा है।

निक्की हेली ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित समुद्री नाकाबंदी को ईरान को कमजोर करने की एक व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ईरान को वास्तविक रूप से कमजोर करने के लिए उस पर आर्थिक दबाव बनाना जरूरी है। उनके मुताबिक,होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यदि ईरान इस मार्ग का दुरुपयोग करता है,तो उसे रोकना अमेरिका और उसके सहयोगियों की जिम्मेदारी बनती है।

हेली ने चेतावनी दी कि ईरान अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि तेहरान इस स्थिति को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है,जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। उनके अनुसार,यह केवल अमेरिका और ईरान के बीच का मुद्दा नहीं है,बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल,20 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस और लगभग एक-तिहाई उर्वरक इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के दिनों में इस मार्ग पर गतिविधियों में भारी गिरावट आई है। जहाँ सामान्य रूप से एक दिन में लगभग 135 जहाज इस स्ट्रेट से गुजरते थे,वहीं अब स्थिति यह है कि केवल कुछ ही जहाज गुजर पा रहे हैं और सैकड़ों जहाजों का बैकलॉग बन चुका है। यह स्थिति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।

हालाँकि,हेली ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी लंबी और अंतहीन लड़ाई में नहीं उलझना चाहता। उन्होंने कहा कि उद्देश्य स्पष्ट और सीमित होना चाहिए,ताकि स्थिति को जल्दी से नियंत्रित किया जा सके। उनके अनुसार,अमेरिकी नौसेना पहले से ही इस क्षेत्र में तैनात है और वह समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के लिए लगातार काम कर रही है।

ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर हेली का रुख बेहद सख्त रहा। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह समाप्त नहीं करता,तब तक इस मुद्दे का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी दोहराया कि ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य है कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल न कर सके। हेली के मुताबिक,इस उद्देश्य को खाड़ी देशों का भी समर्थन प्राप्त है,जो क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

हेली ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ,तो एक सीमित और लक्षित सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह का ऑपरेशन संभवतः एक सप्ताह से दस दिन के भीतर पूरा किया जा सकता है और इसमें विशेष बलों की भूमिका अहम होगी। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ऐसा मिशन जोखिम भरा होगा और इसमें कई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।

इस पूरे मुद्दे में हेली ने चीन और रूस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने ईरान को सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें उपलब्ध कराई हैं और भविष्य में उसे और उन्नत रक्षा प्रणालियाँ देने की योजना बना सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ा रही हैं और अमेरिका को इस पर सख्त रुख अपनाने की जरूरत है।

चीन के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को लेकर भी हेली ने संदेह जताया। उन्होंने कहा कि जब तक चीन ईरान को समर्थन देना बंद नहीं करता,तब तक अमेरिका को उसके साथ किसी भी तरह की उच्चस्तरीय बातचीत से बचना चाहिए। उनके अनुसार,यह समय स्पष्ट संदेश देने का है कि अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

हालाँकि,हेली ने यह भी स्वीकार किया कि ट्रंप की नीतियाँ कभी-कभी विवाद पैदा कर सकती हैं। 2024 के चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप की आलोचना करने के बावजूद उन्होंने कहा कि वर्तमान में वह अमेरिका के दुश्मनों के खिलाफ मजबूत रुख अपना रहे हैं। उनके अनुसार,यह जरूरी है कि अमेरिका वैश्विक मंच पर अपनी ताकत और दृढ़ता दिखाए,ताकि उसके विरोधी देश किसी भी तरह की आक्रामक नीति अपनाने से पहले दो बार सोचें।

इस बीच,हेली ने घरेलू मुद्दों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था और बढ़ता राष्ट्रीय कर्ज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने करीब 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थिति लंबे समय में गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन सकती है। उन्होंने एंटाइटलमेंट प्रोग्राम्स पर बढ़ते दबाव को भी चिंता का विषय बताया।

निक्की हेली के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका में ईरान को लेकर सख्त नीति अपनाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। कूटनीतिक प्रयासों की विफलता के बाद अब आर्थिक और सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं और क्या यह तनाव किसी बड़े संघर्ष में बदलता है या फिर कोई नया कूटनीतिक रास्ता निकलता है।