श्रीलंका क्रिकेट (तस्वीर क्रेडिट ऑफिशियलएसएलसी "एक्स")

श्रीलंका क्रिकेट में बड़ा बदलाव: शम्मी सिल्वा के इस्तीफे के बाद एरन विक्रमरत्ने अंतरिम समिति के अध्यक्ष बने

नई दिल्ली,30 अप्रैल (युआईटीवी)- श्रीलंका क्रिकेट प्रशासन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहाँ लंबे समय से जारी विवाद और आलोचनाओं के बीच आखिरकार शीर्ष नेतृत्व ने इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद खेल मंत्री सुनील कुमारा गमागे ने नई अंतरिम समिति का गठन करते हुए पूर्व सांसद और इन्वेस्टमेंट बैंकर एरन विक्रमरत्ने को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह समिति फिलहाल श्रीलंका क्रिकेट के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में काम करेगी।

यह फैसला उस समय लिया गया,जब श्रीलंका क्रिकेट के अध्यक्ष शम्मी सिल्वा और उनकी पूरी कार्यकारी समिति ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं,जिनमें प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर लगातार हो रही आलोचना,वित्तीय अनियमितताओं के आरोप और हाल के समय में राष्ट्रीय टीम का खराब प्रदर्शन प्रमुख हैं। इन सभी मुद्दों ने मिलकर बोर्ड के अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर असंतोष का माहौल बना दिया था।

अंतरिम समिति में कई अनुभवी और प्रतिष्ठित नामों को शामिल किया गया है,जो श्रीलंका क्रिकेट को संकट से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसमें पूर्व राष्ट्रीय कप्तान रोशन महानामा और महान बल्लेबाज कुमार संगकारा जैसे दिग्गज शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व सलामी बल्लेबाज सिदाथ वेट्टिमुनी को भी समिति में जगह दी गई है। प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए थुशिरा राडेला,अवंती कोलंबगे,प्रकाश शैफ्टर और उपुल कुमारप्पेरुमा जैसे नाम भी समिति का हिस्सा बनाए गए हैं।

इस नई समिति के गठन को श्रीलंका क्रिकेट के मुख्यालय मैटलैंड प्लेस में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से बोर्ड के कामकाज को लेकर सवाल उठते रहे हैं और अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि नई टीम पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करते हुए संस्था की छवि को सुधारने में सफल होगी। एरन विक्रमरत्ने के पास वित्तीय और प्रशासनिक अनुभव है,जो इस समय बोर्ड के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

शम्मी सिल्वा का कार्यकाल काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। वह साल 2019 में पहली बार अध्यक्ष बने थे और इसके बाद 2021, 2023 और 2025 में बिना किसी विरोध के दोबारा चुने गए। उनके कार्यकाल में कुछ सकारात्मक पहल भी हुईं,लेकिन समय के साथ-साथ आलोचनाएँ भी बढ़ती गईं। खासकर टीम के प्रदर्शन में गिरावट और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों ने उनकी स्थिति को कमजोर कर दिया।

सिल्वा ने साल 2025 में एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया था, जहाँ उन्होंने जय शाह की जगह यह जिम्मेदारी सँभाली थी। हालाँकि,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका को सराहा गया,लेकिन घरेलू स्तर पर बढ़ते विवादों ने उनके कार्यकाल को प्रभावित किया।

श्रीलंका क्रिकेट में चल रहे इस संकट का असर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ा। इसका सबसे बड़ा उदाहरण आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2024 की मेजबानी का श्रीलंका से छिन जाना है,जिसे बाद में दक्षिण अफ्रीका को सौंप दिया गया। यह फैसला बोर्ड की साख पर बड़ा आघात माना गया और इससे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट समुदाय में भी चिंता बढ़ी।

अब नई अंतरिम समिति के सामने कई चुनौतियाँ हैं। सबसे पहले बोर्ड के प्रशासनिक ढाँचे को सुधारना,वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना और टीम के प्रदर्शन को बेहतर बनाना प्राथमिकता होगी। इसके अलावा,खिलाड़ियों और प्रशासकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना भी जरूरी होगा,ताकि भविष्य में इस तरह के संकट से बचा जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि कुमार संगकारा और रोशन महानामा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी से टीम और बोर्ड के बीच संवाद बेहतर हो सकता है। वहीं एरन विक्रमरत्ने का वित्तीय अनुभव बोर्ड की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकता है। यदि यह समिति प्रभावी ढंग से काम करती है,तो श्रीलंका क्रिकेट एक बार फिर अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को हासिल कर सकता है।

श्रीलंका क्रिकेट में यह बदलाव एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है। हालाँकि,चुनौतियाँ बड़ी हैं,लेकिन सही नेतृत्व और स्पष्ट रणनीति के साथ इस संकट को अवसर में बदला जा सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नई अंतरिम समिति किस तरह से इन चुनौतियों का सामना करती है और श्रीलंका क्रिकेट को एक नई दिशा देती है।