अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@garrywalia_)

ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी शुरू,ट्रंप बोले—“तेहरान को परमाणु हथियार नहीं मिलेगा”

वाशिंगटन,14 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि अमेरिका ने तेहरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नौसैनिक नाकाबंदी शुरू कर दी है। ओवल ऑफिस के बाहर अचानक आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि यह कदम ईरान को दोबारा बातचीत की मेज पर लाने और उसकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का मूल मुद्दा केवल और केवल परमाणु क्षमताएँ हैं। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा, “यह इस बात को लेकर है कि उन्हें कभी भी परमाणु हथियार नहीं मिलेगा। ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा।” ट्रंप के इस बयान से साफ हो गया है कि अमेरिका इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है।

ट्रंप ने यह भी बताया कि हाल की बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी,लेकिन परमाणु हथियारों के मुद्दे पर ईरान ने सहमति नहीं दी। उन्होंने विश्वास जताया कि अंततः ईरान को अमेरिका की इस शर्त को मानना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा, “मुझे लगभग पूरा भरोसा है। दरअसल,मुझे पूरा यकीन है कि वे मान जाएँगे। अगर वे सहमत नहीं होते,तो कोई समझौता नहीं होगा।” यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका इस वार्ता को लेकर आशावादी तो है,लेकिन अपनी शर्तों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।

राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि ईरान की ओर से बातचीत फिर से शुरू करने के लिए संपर्क किया गया है। उन्होंने कहा कि “दूसरी तरफ से हमें कॉल आई है” और ईरान समझौता करने के लिए इच्छुक दिख रहा है। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जब तक ईरान परमाणु हथियारों के मुद्दे पर झुकाव नहीं दिखाता,तब तक किसी भी समझौते की संभावना नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण घोषणा अमेरिका द्वारा शुरू की गई नौसैनिक नाकाबंदी है। ट्रंप ने पुष्टि की कि यह नाकाबंदी सुबह 10 बजे से लागू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह कदम ईरान की गतिविधियों का जवाब देने और वैश्विक स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह दुनिया को “ब्लैकमेल” और “जबरन वसूली” करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने कहा, “हम किसी देश को दुनिया को ब्लैकमेल करने की अनुमति नहीं दे सकते। वे वास्तव में दुनिया को ब्लैकमेल कर रहे हैं, और हम ऐसा होने नहीं देंगे।”

ट्रंप के अनुसार,यह नाकाबंदी केवल एक सैन्य कदम नहीं है,बल्कि इसके पीछे कई रणनीतिक उद्देश्य हैं। उन्होंने कहा कि इससे ईरान पर दबाव बढ़ेगा,जिससे वह फिर से वार्ता के लिए मजबूर होगा। इसके साथ ही यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में भी मदद करेगा। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के जरिए अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।

हालाँकि,ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका खुद ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर है और उसे हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, “हम इस जलडमरूमध्य का उपयोग नहीं करते। हमारे पास अपना तेल और गैस है,जरूरत से कहीं ज्यादा।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का तेल उत्पादन सऊदी अरब और रूस से भी अधिक है। इसके बावजूद उन्होंने यह स्वीकार किया कि इस जलमार्ग का वैश्विक महत्व बहुत बड़ा है और दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति इसी पर निर्भर करती है।

ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना,वायुसेना,वायु रक्षा प्रणाली और रडार क्षमताएँ काफी हद तक कमजोर हो चुकी हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा कि “उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है,उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है,उनकी वायु रक्षा खत्म हो चुकी है।” हालाँकि,उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस जानकारी साझा नहीं की।

राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को नहीं माना,तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा, “यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा,” लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका आगे क्या कदम उठा सकता है। उनके इस बयान से यह संकेत जरूर मिलता है कि आने वाले समय में तनाव और बढ़ सकता है।

ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि इस नाकाबंदी में अन्य देशों ने भी सहयोग की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि कई देशों ने अपनी सेवाएँ देने की इच्छा जताई है और इस पर जल्द ही और जानकारी साझा की जाएगी। इससे यह साफ होता है कि अमेरिका इस मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।

चीन की भूमिका पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि बीजिंग ने सीधे तौर पर संपर्क नहीं किया है,लेकिन वह भी इस स्थिति का समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के संबंध अच्छे हैं और दोनों देश इस तनाव को खत्म होते देखना चाहते हैं। यह बयान इस बात का संकेत है कि इस मुद्दे पर वैश्विक शक्तियाँ भी नजर बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा उठाया गया यह कदम मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकता है। नौसैनिक नाकाबंदी जैसे कदम का सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। हालाँकि,अमेरिका का दावा है कि वह इस कार्रवाई के जरिए वैश्विक स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक नए चरण में पहुँच चुका है। जहाँ एक ओर अमेरिका सख्त रुख अपनाए हुए है,वहीं ईरान की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाते हैं या फिर यह तनाव किसी बड़े संघर्ष का रूप ले लेता है।

फिलहाल,राष्ट्रपति ट्रंप के बयान और नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। यह स्थिति न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों को प्रभावित करेगी,बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।