नई दिल्ली,15 अप्रैल (युआईटीवी)- देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर अब मनोरंजन जगत से भी जोरदार प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इस विधेयक को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कई जानी-मानी अभिनेत्रियों और सार्वजनिक हस्तियों ने इसका खुलकर समर्थन किया है। उनका मानना है कि यह कानून न केवल महिलाओं को राजनीतिक मंच पर मजबूत बनाएगा,बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी समान भागीदारी देगा।
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने इस बिल को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत है। कंगना के अनुसार,लंबे समय से महिलाओं को राजनीति में बराबरी का अवसर नहीं मिल पाया था,लेकिन अब यह बदलाव संभव होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के लागू होने से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें सत्ता के उच्च पदों तक पहुँचने का अवसर मिलेगा। कंगना ने यह भी कहा कि देश के लिए यह गर्व की बात है कि हम ऐसे समय के गवाह बन रहे हैं,जब महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
कंगना ने विपक्ष की आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस तरह के प्रयासों को पहले भी रोका जाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने हमेशा इस बिल को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की,लेकिन अब जब यह संभव हुआ है,तो यह प्रधानमंत्री के मजबूत नेतृत्व का परिणाम है। उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
वहीं अभिनेत्री अमीषा पटेल ने भी इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि महिलाएँ समाज की असली समस्याओं को बेहतर तरीके से समझती हैं। उन्होंने कहा कि घर-परिवार से जुड़े मुद्दों से लेकर सामाजिक चुनौतियों तक,महिलाओं का दृष्टिकोण अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक होता है। अमीषा के अनुसार,जब संसद और नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी,तो देश के विकास को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए जरूरी है,ताकि उनकी आवाज प्रभावी रूप से सुनी जा सके।
मनोरंजन जगत के अलावा सौंदर्य प्रतियोगिता से जुड़ी हस्तियों ने भी इस विधेयक को सकारात्मक कदम बताया है। फेमिना मिस इंडिया हरियाणा की विजेता देबास्मित ने कहा कि यह कानून महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ संसद को अधिक समावेशी बनाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में भी महिलाओं को हमेशा समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है और यह विधेयक उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का काम करेगा।
देबास्मित ने यह भी कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में हर वर्ग और हर क्षेत्र की महिलाओं की आवाज को समान महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने आदिवासी और गैर-आदिवासी महिलाओं के साथ-साथ अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर भी जोर दिया। उनके अनुसार,जब संसद में हर वर्ग की महिलाओं की भागीदारी होगी,तभी देश का समग्र विकास संभव हो पाएगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देशभर में व्यापक चर्चा हो रही है। यह विधेयक महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लंबे समय से इसकी माँग की जा रही थी और अब इसके लागू होने की दिशा में प्रगति को महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से ऐतिहासिक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधेयक के लागू होने से राजनीति में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी और इससे नीति निर्माण में विविधता आएगी। महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से सामाजिक मुद्दों पर ज्यादा संवेदनशीलता और संतुलन देखने को मिल सकता है। इसके अलावा यह कदम युवा महिलाओं को भी राजनीति में आने के लिए प्रेरित करेगा।
हालाँकि,इस विधेयक को लेकर कुछ राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। विपक्ष के कुछ दलों ने इसके कार्यान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं,जबकि सत्ता पक्ष इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बता रहा है,लेकिन मनोरंजन जगत की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि समाज के विभिन्न वर्गों में इस पहल को लेकर सकारात्मक भावना देखने को मिल रही है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने देश में एक नई बहस को जन्म दिया है,जिसमें महिलाओं की भूमिका,अधिकार और भागीदारी को लेकर गंभीरता से चर्चा हो रही है। फिल्मी सितारों और सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा केवल राजनीति तक सीमित नहीं है,बल्कि समाज के हर वर्ग से जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विधेयक किस तरह से लागू होता है और महिलाओं के जीवन में किस हद तक बदलाव लाने में सफल होता है।
