डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग

होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बड़ा बयान,चीन और ईरान को लेकर कूटनीतिक संकेतों से बढ़ी हलचल

वाशिंगटन,16 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर जारी गतिरोध के बीच ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह इस अहम जलमार्ग को “हमेशा के लिए खुला” रखने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनके इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है,खासकर चीन और ईरान को लेकर उनके दावों ने कूटनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि चीन इस बात से बेहद खुश होगा कि वह होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि यह कदम न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के हित में है। उनके मुताबिक, “चीन बहुत खुश है कि मैं होर्मुज स्ट्रेट को हमेशा के लिए खोल रहा हूँ। मैं यह उनके लिए भी कर रहा हूँ और दुनिया के लिए भी।” ट्रंप के इस बयान को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की दिशा में एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है,जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहाँ किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और अमेरिकी नौसेना की गतिविधियाँ भी इस क्षेत्र में बढ़ी हुई हैं।

अपने बयान में ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जिनपिंग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि चीन ईरान को हथियार मुहैया नहीं करा रहा है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें पहले ऐसी खबरें मिली थीं कि चीन,ईरान को हथियार दे रहा है,जिसके बाद उन्होंने जिनपिंग को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद चीनी राष्ट्रपति ने उन्हें भरोसा दिलाया कि ऐसा नहीं हो रहा है।

ट्रंप ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि आने वाले समय में जब वह चीन जाएँगे,तो जिनपिंग उनके साथ गर्मजोशी से मिलेंगे और दोनों देश मिलकर “स्मार्ट तरीके” से काम करेंगे। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया और कहा कि यह लड़ाई से बेहतर विकल्प है। हालाँकि,उन्होंने अपने पारंपरिक अंदाज में यह भी जोड़ दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका लड़ने के लिए भी पूरी तरह तैयार है।

दूसरी ओर,चीन ने ट्रंप के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि बीजिंग ईरान को हथियार उपलब्ध नहीं करा रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि अमेरिका इन आरोपों के आधार पर चीन पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला करता है,तो चीन इसका जवाब देगा। इस बयान से यह साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच व्यापार और कूटनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है।

ईरान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है,जब क्षेत्र में पहले से ही अस्थिरता का माहौल है। ईरान के साथ अमेरिका के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं और हाल के घटनाक्रमों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में संभावित नाकेबंदी और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान एक तरह से चीन को संदेश देने की कोशिश भी है,जिसमें वह सहयोग और टकराव दोनों के संकेत दे रहे हैं। एक ओर वह चीन के साथ मिलकर काम करने की बात कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर टैरिफ और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दे रहे हैं। यह रणनीति अमेरिका की पारंपरिक “कैरट एंड स्टिक” नीति का हिस्सा मानी जा रही है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप का यह बयान केवल एक कूटनीतिक टिप्पणी नहीं है,बल्कि इसके पीछे कई रणनीतिक संकेत छिपे हुए हैं। यह बयान वैश्विक ऊर्जा बाजार,अमेरिका-चीन संबंधों और मध्य पूर्व की राजनीति पर दूरगामी असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव कम होता है या फिर यह और बढ़ता है। फिलहाल,दुनिया की नजरें इस अहम जलमार्ग और उससे जुड़ी कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।