वाशिंगटन,16 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिका की एच-1बी वीजा नीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस प्रणाली के दुरुपयोग को लेकर तीखी टिप्पणी की है। वेंस ने साफ तौर पर कहा कि एच-1बी वीजा के तहत अमेरिका आने वाले लोगों को केवल अपने व्यक्तिगत हितों के बजाय देश के विकास और समृद्धि के बारे में भी सोचना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है,जब अमेरिका अपनी इमिग्रेशन नीतियों को और सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
वेंस ने एच-1बी वीजा सिस्टम को लेकर दो अलग-अलग पहलुओं की बात की। उन्होंने कहा कि एक ओर इस व्यवस्था में धांधली की शिकायतें सामने आती रही हैं,वहीं दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं,जिन्होंने इस वीजा के माध्यम से अमेरिका आकर देश के विकास में अहम योगदान दिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए अपने ससुराल पक्ष के लोगों का जिक्र किया,जिन्होंने अमेरिका में बसकर आर्थिक और सामाजिक रूप से योगदान दिया। वेंस का कहना था कि ऐसे लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि वे खुद को अमेरिकी समाज का हिस्सा समझें और उसी दृष्टिकोण से काम करें।
उनके अनुसार,यह प्रणाली तभी प्रभावी तरीके से काम कर सकती है,जब इसमें शामिल हर व्यक्ति खुद को “अमेरिकन” मानकर योगदान दे। उन्होंने यह भी कहा कि केवल अपने मूल देश या किसी विशेष समूह के हितों को प्राथमिकता देने से इस व्यवस्था का उद्देश्य कमजोर पड़ता है। वेंस के इस बयान को अमेरिकी प्रशासन की उस सोच के रूप में देखा जा रहा है,जिसमें विदेशी पेशेवरों से न केवल कौशल,बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की भी अपेक्षा की जा रही है।
इसी बीच,एच-1बी वीजा नीति में हाल ही में किए गए बदलावों ने भी इस बहस को और तेज कर दिया है। 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वीजा से जुड़े शुल्क बढ़ाने और चयन प्रक्रिया में बदलाव के निर्देश दिए थे। इसके तहत पारंपरिक रैंडम लॉटरी सिस्टम को खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह “वेटेड सेलेक्शन प्रोसेस” लागू किया गया है। इस नई प्रक्रिया में उन आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी,जो अधिक कुशल हैं और जिन्हें उच्च वेतन की पेशकश की गई है।
हालाँकि,एच-1बी वीजा की कुल संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हर साल 65,000 वीजा जारी किए जाते हैं,जबकि अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च डिग्री प्राप्त करने वाले विदेशी छात्रों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा का प्रावधान है,लेकिन नए नियमों के तहत अब चयन की संभावना उन उम्मीदवारों के पक्ष में झुकी हुई है,जो तकनीकी रूप से अधिक दक्ष और उच्च वेतन वर्ग में आते हैं। इससे कम वेतन वाले या शुरुआती स्तर के पेशेवरों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो सकती है।
यह नया नियम 27 फरवरी 2026 से लागू होने की बात कही गई है और इसे वित्त वर्ष 2027 की एच-1बी कैप रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में प्रभावी बनाया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों को उच्च कौशल वाले पेशेवर उपलब्ध कराना है,साथ ही यह सुनिश्चित करना भी है कि वीजा प्रणाली का दुरुपयोग न हो।
वहीं,इस साल की शुरुआत में एच-1बी वीजा को समाप्त करने के लिए एक नया विधेयक भी पेश किया गया था,जिसने इस बहस को और व्यापक बना दिया है। अमेरिकी सरकार का तर्क है कि इस वीजा के कारण विदेशी कामगारों को प्राथमिकता मिलती है,जिससे स्थानीय अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं। हालाँकि,इस प्रस्ताव को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
इसी संदर्भ में उपराष्ट्रपति वेंस का बयान यह संकेत देता है कि अमेरिकी प्रशासन इस नीति को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में है। उनका यह भी कहना है कि एच-1बी वीजा केवल एक रोजगार का माध्यम नहीं होना चाहिए,बल्कि यह उन लोगों के लिए अवसर होना चाहिए जो अमेरिका के विकास में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।
इस बीच,वेंस ने ईरान के साथ अमेरिका के संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति स्पष्ट है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर बातचीत जारी है और फिलहाल दोनों देशों के बीच एक तरह का युद्धविराम बना हुआ है। वेंस के अनुसार,अमेरिका किसी छोटे समझौते के बजाय एक व्यापक और मजबूत समझौते की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक ऐतिहासिक थी,क्योंकि पिछले कई दशकों में इस स्तर पर दोनों देशों के बीच बातचीत नहीं हुई थी। वेंस ने इसे कूटनीतिक प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
एच-1बी वीजा को लेकर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान और हालिया नीतिगत बदलाव यह दर्शाते हैं कि अमेरिका अपनी इमिग्रेशन प्रणाली को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह बदलाव न केवल विदेशी पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण हैं,बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिभा के प्रवाह और रोजगार के अवसरों को भी प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन नीतियों का वास्तविक प्रभाव क्या होता है और यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को किस दिशा में ले जाता है।
