व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट (तस्वीर क्रेडिट@ArianaAriana65)

ईरान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की चेतावनी,नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील

वाशिंगटन,23 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक आधिकारिक सलाह जारी करते हुए ईरान में रह रहे अमेरिकियों से जल्द से जल्द देश छोड़ने की अपील की है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है,जब ईरान ने लंबे समय तक बंद रहने के बाद अपने हवाई क्षेत्र को आंशिक रूप से फिर से खोलना शुरू किया है,जिससे अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए सीमित रास्ते उपलब्ध हो पाए हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग के कांसुलर मामलों के ब्यूरो ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी साझा की और नागरिकों से कहा कि वे स्थानीय मीडिया पर लगातार नजर बनाए रखें। साथ ही उन्हें यह भी सलाह दी गई है कि वे देश से बाहर जाने वाली उड़ानों के बारे में जानकारी के लिए वाणिज्यिक एयरलाइंस से संपर्क करें। इस एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि हवाई मार्ग पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हो पाता है,तो नागरिक भूमि मार्ग के जरिए भी ईरान छोड़ सकते हैं। इसके लिए आर्मेनिया,अजरबैजान,तुर्किये और तुर्कमेनिस्तान के रास्तों को विकल्प के तौर पर सुझाया गया है। हालाँकि,अफगानिस्तान, इराक और पाकिस्तान-ईरान सीमा क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सख्त चेतावनी दी गई है,क्योंकि इन इलाकों को बेहद संवेदनशील और असुरक्षित माना जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में हाल ही में हुए संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमले हैं,जिनकी शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी। इन हमलों के बाद ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को पूरी तरह बंद कर दिया था,जिससे अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा था और देश के भीतर आवाजाही भी सीमित हो गई थी। हालाँकि,अब ईरान ने धीरे-धीरे स्थिति को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाते हुए अपने पूर्वी हवाई क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए फिर से खोल दिया है। इससे कुछ हद तक हवाई यातायात बहाल हुआ है और यात्रियों को बाहर निकलने का अवसर मिल रहा है।

ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक ब्रॉडकास्टिंग के अनुसार,देश का हवाई क्षेत्र चार चरणों में फिर से खोला जाएगा। नागरिक उड्डयन संगठन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी ताकि सुरक्षा और संचालन दोनों को संतुलित रखा जा सके। हालाँकि,विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्र में पूरी तरह शांति स्थापित नहीं होती, तब तक हवाई सेवाएँ पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाएँगी।

इसी बीच अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के साथ अपने युद्धविराम को भी आगे बढ़ाने का फैसला किया है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोका गया है,लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान पर दबाव कम किया गया है। इसके विपरीत,अमेरिका ने आर्थिक और समुद्री प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया है,जिससे तेहरान पर दबाव बनाए रखा जा सके।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने इस रणनीति को दोहरी नीति बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक ओर सैन्य हमलों को रोककर स्थिति को और बिगड़ने से बचाने की कोशिश कर रहा है,वहीं दूसरी ओर वित्तीय और नौसैनिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान की आर्थिक क्षमता को कमजोर कर रहा है। उनके अनुसार ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ के तहत यह रणनीति लगातार जारी है और इसका असर भी देखने को मिल रहा है।

लीविट ने दावा किया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस नाकेबंदी के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था को जकड़ दिया गया है और उसे रोजाना करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके चलते ईरान के लिए तेल निर्यात करना और अंतर्राष्ट्रीय भुगतान बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। यह स्थिति देश की आर्थिक स्थिरता पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।

हालाँकि,इस बढ़ते दबाव के बावजूद अमेरिका ने बातचीत के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है। लीविट ने साफ कहा कि इस मामले में अंतिम निर्णय राष्ट्रपति के हाथ में है और वही तय करेंगे कि कब और कैसे आगे बढ़ना है। उन्होंने उन रिपोर्टों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि बातचीत के लिए सीमित समय दिया गया है। उनके अनुसार अमेरिका अपनी शर्तों और रणनीति को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है और किसी जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह रणनीति ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर कर उसे बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश है। हालाँकि,इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि इस तरह का दबाव क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। मध्य पूर्व पहले से ही कई संघर्षों का केंद्र रहा है और ऐसे में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चिंता ईरान में फँसे विदेशी नागरिकों को लेकर है, जिनकी सुरक्षा अब प्राथमिक मुद्दा बन गई है। अमेरिका द्वारा जारी की गई एडवाइजरी इसी चिंता को दर्शाती है और यह संकेत देती है कि आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में नागरिकों को सतर्क रहने और जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी जा रही है।

मध्य पूर्व की स्थिति फिलहाल बेहद नाजुक बनी हुई है। एक ओर जहाँ युद्धविराम से कुछ राहत मिली है,वहीं दूसरी ओर आर्थिक और रणनीतिक दबाव ने स्थिति को पूरी तरह सामान्य नहीं होने दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह तनाव कम होता है या फिर क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ती है।