प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@ErSureshSah1)

काशी विश्वनाथ में पूजा-अर्चना के बाद प्रधानमंत्री का हरदोई दौरा,गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन आज

वाराणसी,29 अप्रैल (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान के साथ दर्शन-पूजन किया। मंदिर परिसर में उनके आगमन के साथ ही पूरे वातावरण में धार्मिक उल्लास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘डमरू’ और ‘शंखनाद’ की गूँज के बीच प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया गया,जिससे पूरा परिसर शिवमय हो उठा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रधानमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए भगवान शिव का अभिषेक और आरती की तथा देश की समृद्धि और जनता के कल्याण की कामना की।

मंदिर में दर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा-अर्चना में लीन नजर आए। उन्होंने भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया और देश के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर प्रशासन की ओर से उन्हें ‘त्रिशूल’ और ‘डमरू’ भेंट स्वरूप प्रदान किया गया,जिसे उन्होंने आदरपूर्वक स्वीकार किया। यह भेंट भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक मानी जाती है,जो इस अवसर को और भी विशेष बनाती है।

जैसे ही प्रधानमंत्री मंदिर परिसर में पहुँचे,वहाँ मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। लोगों ने ‘जय श्री राम’, ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से वातावरण को गूंजायमान कर दिया। विशेष रूप से बच्चों में प्रधानमंत्री के प्रति उत्साह देखते ही बन रहा था। कई बच्चे बैरिकेड्स के पास पहुँचकर मुस्कुराते हुए उनका अभिवादन करते नजर आए,जिसका प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर जवाब दिया। यह दृश्य न केवल भावनात्मक था,बल्कि जनता और नेतृत्व के बीच जुड़ाव को भी दर्शाता है।

अपने इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का भी अवलोकन किया। यह घड़ी भारतीय समय गणना और प्राचीन वैदिक परंपराओं का अद्भुत उदाहरण मानी जाती है। प्रधानमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए भारतीय संस्कृति और विज्ञान के इस अनूठे संगम को गौरव का विषय बताया।

काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद प्रधानमंत्री हरदोई के लिए रवाना होंगे,जहाँ वे एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा परियोजना,गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के विकास के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। लगभग 36,230 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे लंबे और आधुनिक हाई-स्पीड कॉरिडोर में से एक है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार,गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा,छह लेन वाला,एक्सेस-नियंत्रित ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड मार्ग है। यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है और रास्ते में कई महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ता है। इनमें बुलंदशहर, हापुड़,अमरोहा,संभल,बदायूं,शाहजहांपुर,हरदोई,उन्नाव,रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिले शामिल हैं। इस परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के पश्चिमी,मध्य और पूर्वी हिस्सों को एक ही हाई-स्पीड नेटवर्क के जरिए जोड़ा जाएगा,जिससे राज्य के समग्र विकास को गति मिलेगी।

गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण से न केवल यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी,बल्कि व्यापार और परिवहन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएँ खुलेंगी। वर्तमान में मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा में लगभग 10 से 12 घंटे का समय लगता है,लेकिन इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यह समय घटकर करीब 6 घंटे रह जाएगा। इससे लोगों को तेज,सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बेहतर सड़क संपर्क के कारण औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि होगी,जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके अलावा,यह एक्सप्रेसवे कृषि उत्पादों के तेजी से परिवहन में भी सहायक साबित होगा,जिससे किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई में आयोजित एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे,जहाँ वे इस परियोजना के महत्व और इसके दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डालेंगे। उम्मीद की जा रही है कि वे राज्य के विकास,बुनियादी ढाँचे और भविष्य की योजनाओं को लेकर भी अपने विचार साझा करेंगे।

प्रधानमंत्री का यह दौरा धार्मिक आस्था और विकास के दो महत्वपूर्ण पहलुओं का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करता है। एक ओर उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर आध्यात्मिक जुड़ाव को प्रदर्शित किया,वहीं दूसरी ओर गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट का उद्घाटन कर विकास की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट किया। यह दौरा न केवल वाराणसी और हरदोई,बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।