नई दिल्ली,30 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान समाप्त होने के साथ ही लोकतंत्र के इस महापर्व में जनता की अभूतपूर्व भागीदारी सामने आई है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार,दूसरे चरण में शाम 7:45 बजे तक 91.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया,जो स्वतंत्रता के बाद इस चरण के लिए एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। इस शानदार मतदान प्रतिशत ने न केवल राज्य के चुनावी इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है,बल्कि देशभर में लोकतांत्रिक चेतना और नागरिक सहभागिता का एक मजबूत संदेश भी दिया है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस रिकॉर्ड मतदान के लिए पश्चिम बंगाल की जनता को बधाई दी और इसे लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का मतदान केंद्रों तक पहुँचना यह दर्शाता है कि नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से यह भी बताया गया कि पूरे मतदान प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी गई। आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों,जिनमें निर्वाचन आयुक्त डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल हैं,ने लाइव वेबकास्टिंग के माध्यम से हर पोलिंग स्टेशन की स्थिति पर नजर बनाए रखी।
इस बार के चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी का स्तर बेहद प्रभावशाली रहा। पहले चरण में लगभग 3 करोड़ 60 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया,जबकि दूसरे चरण में यह संख्या करीब 3 करोड़ 21 लाख रही। पुरुष मतदाताओं की बात करें तो पहले चरण में 1 करोड़ 84 लाख और दूसरे चरण में 1 करोड़ 65 लाख पुरुषों ने मतदान किया। वहीं महिला मतदाताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही,जहाँ पहले चरण में 1 करोड़ 76 लाख और दूसरे चरण में 1 करोड़ 57 लाख महिलाओं ने वोट डाले। तीसरे लिंग के मतदाताओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य के 5,343 पोलिंग स्टेशनों का डेटा अभी अपडेट होना बाकी है,जिसके बाद कुल मतदान प्रतिशत में और वृद्धि हो सकती है। यदि ऐसा होता है,तो यह आँकड़ा और भी ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच सकता है। वर्तमान आँकड़ों के अनुसार,पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 91.07 रहा,जबकि महिलाओं का प्रतिशत 92.8 तक पहुँच गया। यह अंतर दर्शाता है कि महिलाओं ने इस बार मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है,जो सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक सकारात्मक संकेत है।
इससे पहले पहले चरण में 93.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था,जो अपने आप में एक रिकॉर्ड था। दोनों चरणों को मिलाकर कुल औसत मतदान प्रतिशत 92.47 रहा है,जो राज्य के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे ऊँचा स्तर माना जा रहा है। यह आँकड़े यह साबित करते हैं कि पश्चिम बंगाल की जनता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कितनी सक्रिय और जागरूक है।
यदि ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए,तो पश्चिम बंगाल में मतदान प्रतिशत समय के साथ लगातार बढ़ता रहा है। 1951 के पहले विधानसभा चुनाव में जहाँ केवल 43.12 प्रतिशत मतदान हुआ था,वहीं 1957 में यह बढ़कर 47.64 प्रतिशत हो गया। 1960 और 1970 के दशक में यह आँकड़ा 60 प्रतिशत के आसपास पहुँचा और 1980 के दशक में 70 प्रतिशत के पार चला गया। 1990 के दशक में यह और बढ़कर 80 प्रतिशत के करीब पहुँच गया,जबकि 2011 में यह 84.72 प्रतिशत तक पहुँचा,जो उस समय का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था।
इसके बाद 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में भी मतदान प्रतिशत 80 प्रतिशत से ऊपर बना रहा,जो दर्शाता है कि राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति लोगों की आस्था लगातार मजबूत होती जा रही है। हालाँकि,इस बार के चुनाव में जो आँकड़े सामने आए हैं,वे पिछले सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक नया मानदंड स्थापित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रिकॉर्ड मतदान के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें चुनावी माहौल की गर्मी,राजनीतिक दलों की सक्रियता,मतदाता जागरूकता अभियान और चुनाव आयोग द्वारा किए गए बेहतर प्रबंधन शामिल हैं। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी ने भी मतदाताओं को निडर होकर मतदान करने के लिए प्रेरित किया है।
इस बार चुनाव आयोग ने तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया है। लाइव वेबकास्टिंग के जरिए हर मतदान केंद्र पर नजर रखी गई,जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। इससे मतदाताओं का भरोसा बढ़ा और वे बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुँचे। इसके साथ ही,कोविड-19 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर चुनाव हो रहे हैं,जिससे लोगों में मतदान के प्रति एक नया उत्साह भी देखने को मिला।
पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में इस तरह का शांतिपूर्ण और रिकॉर्ड मतदान लोकतंत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह न केवल राज्य के लिए,बल्कि पूरे देश के लिए एक सकारात्मक संकेत है कि जनता अपने अधिकारों का उपयोग करने के लिए तैयार है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रही है।
दूसरे चरण में 91.66 प्रतिशत मतदान का आँकड़ा केवल एक संख्या नहीं,बल्कि यह लोकतंत्र की ताकत,जनता की जागरूकता और चुनावी प्रणाली की सफलता का प्रतीक है। आने वाले चरणों और अंतिम परिणामों पर सभी की नजरें टिकी हैं,लेकिन यह स्पष्ट है कि इस बार का चुनाव इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल करने जा रहा है।
