नई दिल्ली,5 मई (युआईटीवी)- संयुक्त अरब अमीरात के एक महत्वपूर्ण बंदरगाह पर हुए हमले ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने के बाद भारत समेत दुनिया के कई प्रमुख देशों ने इसकी कड़ी निंदा की है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए यूएई के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयान में कहा कि यूएई पर हुआ यह हमला बेहद निंदनीय है,जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आम नागरिकों और नागरिक ढाँचों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत इस कठिन समय में संयुक्त अरब अमीरात के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री ने कूटनीति और संवाद के जरिए समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग से सुरक्षित और बिना रुकावट के आवाजाही सुनिश्चित करना न केवल क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए जरूरी है,बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं,बल्कि वैश्विक चिंता के रूप में देख रहा है।
इस हमले को लेकर यूरोप और उत्तरी अमेरिका के नेताओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने यूएई के लोगों के साथ एकजुटता जताते हुए कहा कि इस तरह के मिसाइल और ड्रोन हमले अंतर्राष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन हैं। उन्होंने ईरान से अपील की कि वह मध्य पूर्व में शांति बनाए रखने के लिए संवाद का रास्ता अपनाए और युद्धविराम का सम्मान करे।
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि संयुक्त अरब अमीरात एक बार फिर हमलों का शिकार बना है,जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जर्मनी इस कठिन समय में यूएई और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान को तुरंत बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की नाकाबंदी को समाप्त करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाने चाहिए।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस हमले को बिना उकसावे की कार्रवाई बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कनाडा यूएई के लोगों के साथ पूरी तरह एकजुट है और नागरिकों तथा बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करता है। उन्होंने इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी यूएई पर हुए हमले के लिए ईरान की आलोचना की और कहा कि उनका देश खाड़ी क्षेत्र में अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव को जल्द से जल्द समाप्त किया जाना चाहिए और ईरान को एक स्थायी कूटनीतिक समाधान की दिशा में ईमानदारी से बातचीत करनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर मध्य पूर्व की संवेदनशील स्थिति को उजागर कर दिया है। क्षेत्र में पहले से ही मौजूद तनाव के बीच इस तरह के हमले स्थिति को और जटिल बना सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समय सभी पक्षों ने संयम नहीं बरता,तो इसका असर वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है,क्योंकि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। इसके अलावा,यूएई में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं,जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान न केवल कूटनीतिक दृष्टि से अहम है,बल्कि यह भारत की अपने नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी को भी दर्शाता है।
यह भी उल्लेखनीय है कि इस हमले को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में व्यापक सहमति देखने को मिल रही है। लगभग सभी प्रमुख देशों ने इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है और शांति बहाल करने की अपील की है। यह एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है कि वैश्विक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर एकजुटता दिखाई दे रही है।
फिलहाल,दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है। क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव को कम किया जा सकेगा या फिर यह संकट और गहराएगा,यह देखना महत्वपूर्ण होगा। भारत समेत कई देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे शांति और स्थिरता के पक्षधर हैं और किसी भी प्रकार की हिंसा या आक्रामक कार्रवाई का विरोध करते हैं।
यूएई पर हुआ यह हमला न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती है,बल्कि यह वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। ऐसे समय में सभी देशों के लिए यह जरूरी है कि वे जिम्मेदारी के साथ कदम उठाएँ और संवाद तथा कूटनीति के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ें,ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और दुनिया में स्थायी शांति स्थापित हो सके।
