नई दिल्ली,5 मई (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इस घटनाक्रम में तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए हमले की निंदा की है और नागरिकों व नागरिक ढाँचों को निशाना बनाने पर तत्काल रोक लगाने की माँग की है। भारत ने साथ ही सभी पक्षों से संयम बरतने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है।
सोमवार को स्थानीय समय के अनुसार फुजैराह में हुए इन हमलों में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया,जिससे सार्वजनिक स्थानों और नागरिक सुविधाओं को नुकसान पहुँचा। इस हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए,जिनका इलाज स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है। संयुक्त अरब अमीरात ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है,जिससे क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और अधिक गहरा गया है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि फुजैराह पर हुआ हमला अस्वीकार्य है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि निर्दोष नागरिकों और नागरिक ढाँचों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। भारत ने इस तरह की दुश्मनी और हिंसक गतिविधियों को तुरंत रोकने की अपील करते हुए अंतर्राष्ट्रीय कानून के सम्मान पर जोर दिया है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के जरिए मुक्त और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। यह मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी प्रकार की बाधा पूरी दुनिया के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। भारत ने कहा कि वह सभी पक्षों के बीच संवाद और कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है,ताकि स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सके।
संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय दूतावास ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि फुजैराह में हुए हमलों में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। दूतावास ने बताया कि वह स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि घायल भारतीयों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा और देखभाल मिल सके। दूतावास ने यह भी कहा कि प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा और भलाई उनकी प्राथमिकता है।
दूसरी ओर,संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने भी इन हमलों की तीखी निंदा की है और इसे बिना किसी उकसावे के किया गया हमला बताया है। मंत्रालय ने कहा कि मिसाइलों और ड्रोन के जरिए किए गए ये हमले न केवल देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा हैं,बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और एकता को भी प्रभावित करते हैं। यूएई ने स्पष्ट किया कि इन हमलों के लिए ईरान पूरी तरह जिम्मेदार है और उसने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है।
यूएई के बयान में कहा गया कि इस तरह के हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि देश अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। यूएई ने यह भी कहा कि वह अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए ऐसे हमलों का जवाब देने के लिए तैयार है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिति कितनी संवेदनशील बनी हुई है। पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इस तरह की घटनाएँ उस तनाव को और अधिक भड़का सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया,तो इसका असर वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया इस संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है,क्योंकि भारत के संयुक्त अरब अमीरात और अन्य मध्य पूर्वी देशों के साथ मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। इसके अलावा,इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं,जिनकी सुरक्षा भारत के लिए प्राथमिकता है। ऐसे में भारत का यह रुख न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है,बल्कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में सभी पक्षों को संयम बरतने की आवश्यकता है और कूटनीतिक रास्तों को अपनाना ही सबसे बेहतर विकल्प है। किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या प्रतिशोधात्मक कदम स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
फिलहाल,दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में क्या घटनाक्रम सामने आते हैं। क्या तनाव और बढ़ेगा या फिर कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकेगा,यह देखना महत्वपूर्ण होगा। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शांति और स्थिरता के पक्ष में खड़ा है और किसी भी प्रकार की हिंसा या उकसावे की कार्रवाई का विरोध करता है।
फुजैराह में हुआ यह हमला न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती है,बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी एक चेतावनी है। ऐसे समय में सभी देशों के लिए यह जरूरी है कि वे जिम्मेदारी से काम लें और संवाद के जरिए समाधान तलाशें,ताकि निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और क्षेत्र में शांति बहाल हो सके।
