अमेरिका में ‘प्रेसिडेंशियल फिटनेस टेस्ट’ की वापसी (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

अमेरिका में ‘प्रेसिडेंशियल फिटनेस टेस्ट’ की वापसी,ट्रंप सरकार ने युवाओं की सेहत और खेल संस्कृति पर दिया जोर

वाशिंगटन,6 मई (युआईटीवी)- अमेरिका में युवाओं की गिरती शारीरिक फिटनेस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने पुराने “प्रेसिडेंशियल फिटनेस टेस्ट” कार्यक्रम को फिर से शुरू करने की घोषणा की है। यह वही कार्यक्रम है,जो कभी अमेरिकी स्कूलों में बच्चों की शारीरिक क्षमता को मापने और उन्हें फिटनेस के प्रति जागरूक करने के लिए चलाया जाता था। वर्षों तक यह कार्यक्रम छात्रों के जीवन का अहम हिस्सा रहा,लेकिन बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान इसे बंद कर दिया गया था। अब ट्रंप प्रशासन इसे नए रूप में वापस लाकर युवाओं के स्वास्थ्य और अनुशासन को प्राथमिकता देने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

व्हाइट हाउस में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इस फैसले की घोषणा की गई। इस मौके पर कई मशहूर खिलाड़ी,अधिकारी और बच्चे मौजूद थे। कार्यक्रम में पेशेवर खेल जगत की जानी-मानी हस्तियों ने भी भाग लिया,जिससे इस पहल को व्यापक समर्थन मिलता नजर आया। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अवसर पर कहा कि उन्होंने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं,जिसके तहत राष्ट्रीय युवा खेल और फिटनेस को नई पहचान दी जा रही है। साथ ही उन्होंने “प्रेसिडेंशियल फिटनेस टेस्ट अवार्ड” की शुरुआत भी की,जो उन छात्रों को दिया जाएगा,जो शारीरिक फिटनेस के सर्वोच्च मानकों को हासिल करेंगे।

इस कार्यक्रम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी काफी महत्वपूर्ण रही है। इसकी शुरुआत अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी के कार्यकाल में हुई थी। उस समय शीत युद्ध का दौर था और अमेरिका को यह चिंता सताने लगी थी कि यूरोपीय देशों के मुकाबले अमेरिकी युवा शारीरिक रूप से कमजोर होते जा रहे हैं। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए स्कूल स्तर पर यह फिटनेस टेस्ट शुरू किया गया,जिसमें छात्रों की ताकत,सहनशक्ति और फुर्ती को परखा जाता था। समय के साथ यह कार्यक्रम एक परंपरा बन गया और कई पीढ़ियों ने इसमें हिस्सा लिया।

हालाँकि,2013 में इस कार्यक्रम को बंद कर दिया गया और इसकी जगह एक नया,कम प्रतिस्पर्धात्मक कार्यक्रम शुरू किया गया,जिसमें बच्चों के स्वास्थ्य पर तो ध्यान दिया गया,लेकिन प्रतियोगिता के तत्व को कम कर दिया गया। अब ट्रंप प्रशासन इसे फिर से उसी प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ शुरू कर रहा है,जिसमें बच्चों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया जाएगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतिस्पर्धा अमेरिका की पहचान रही है और यही देश को आगे बढ़ाने की ताकत देती है। उनका मानना है कि खेल और फिटनेस के जरिए बच्चों में अनुशासन,आत्मविश्वास और मेहनत करने की आदत विकसित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर देश को भविष्य में मजबूत बनाना है तो युवाओं की सेहत पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

इस मौके पर अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका दुनिया के सबसे ज्यादा बीमार देशों में शामिल हो गया है। उन्होंने आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बच्चों में मोटापे का स्तर 5 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुँच चुका है,जबकि लगभग 70 प्रतिशत वयस्क मोटापे या अधिक वजन की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 77 प्रतिशत बच्चे सेना में भर्ती होने के लिए जरूरी शारीरिक मानकों को पूरा नहीं कर पाते,जो देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी एक गंभीर चिंता का विषय है।

रॉबर्ट कैनेडी ने अपने भाषण में इस कार्यक्रम के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि उनके अंकल,राष्ट्रपति केनेडी के समय शुरू हुआ यह कार्यक्रम एक यादगार पहल थी,जिसे उनकी पीढ़ी के लोग आज भी याद करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यक्रम की वापसी से नई पीढ़ी में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी इस पहल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की शारीरिक फिटनेस सीधे तौर पर सेना की तैयारियों से जुड़ी होती है। यदि युवा शारीरिक रूप से मजबूत नहीं होंगे,तो देश की रक्षा क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान में बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती होने के योग्य नहीं हैं,जो भविष्य के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है।

“प्रेसिडेंशियल फिटनेस टेस्ट” में आमतौर पर पुल-अप्स,सिट-अप्स,शटल रन और लंबी दूरी की दौड़ जैसे अभ्यास शामिल होते हैं। इन गतिविधियों के जरिए छात्रों की ताकत,गति और सहनशक्ति का आकलन किया जाता है। जो छात्र इन मानकों पर खरे उतरते हैं, उन्हें प्रमाण पत्र और पुरस्कार दिए जाते हैं,जिससे उनमें और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब पूरी दुनिया में बच्चों और युवाओं के बीच बढ़ते मोटापे, मोबाइल और स्क्रीन की लत तथा कोविड महामारी के बाद कम हुई शारीरिक गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ रही है। भारत सहित कई देशों में भी सरकारें इस दिशा में कदम उठा रही हैं और फिटनेस तथा खेल को बढ़ावा देने के लिए अभियान चला रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे न केवल उनका शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है,बल्कि मानसिक रूप से भी वे मजबूत बनते हैं। खेल गतिविधियाँ बच्चों में टीम वर्क,नेतृत्व क्षमता और अनुशासन जैसे गुण विकसित करती हैं,जो जीवन के हर क्षेत्र में काम आते हैं।

अमेरिका में “प्रेसिडेंशियल फिटनेस टेस्ट” की वापसी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है,जो युवाओं की सेहत और खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा योगदान दे सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पहल का कितना प्रभाव पड़ता है और क्या यह कार्यक्रम फिर से वैसी ही लोकप्रियता हासिल कर पाता है,जैसी कभी इसे मिली थी।