केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की तैयारी तेज,कोलकाता पहुँचेंगे अमित शाह,नए मुख्यमंत्री के नाम पर लगेगी मुहर

कोलकाता,8 मई (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के बीच अब नई सरकार के गठन की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाने जा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को कोलकाता पहुँचेंगे,जहाँ वे भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि इसी बैठक में विधायक दल का नेता चुना जाएगा और पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।

राज्य की राजनीति में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है,क्योंकि पश्चिम बंगाल लंबे समय तक क्षेत्रीय दलों के प्रभाव वाला राज्य रहा है। अब पहली बार भाजपा स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आने जा रही है। पार्टी नेतृत्व इस ऐतिहासिक मौके को पूरी रणनीति और सावधानी के साथ आगे बढ़ाना चाहता है। यही कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व स्वयं सरकार गठन की प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है।

भाजपा विधायक दल की बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बढ़ गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार,विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह औपचारिक होगी,लेकिन अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से लिया जाएगा। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद वही राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनेगा। इस पद के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं, हालाँकि,पार्टी की ओर से अभी तक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

उधर,राज्य में एक और राजनीतिक चर्चा उस समय शुरू हो गई,जब गुरुवार को पिछली विधानसभा का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। इसके बाद राज्यपाल की ओर से 17वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया। संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभी तक अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से मुख्यमंत्री का पदनाम नहीं हटाया है। फेसबुक,इंस्टाग्राम और ‘एक्स’ जैसे प्लेटफॉर्म पर वे अब भी खुद को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बता रही हैं। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।

हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। लंबे समय तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहने वाली तृणमूल कांग्रेस इस बार जनता का भरोसा कायम रखने में सफल नहीं हो सकी। सबसे बड़ा झटका खुद ममता बनर्जी को लगा,जो अपनी पारंपरिक भवानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव हार गईं। चुनाव नतीजों के बाद विपक्षी दलों ने उनसे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की माँग की थी,लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की जनता ने इस चुनाव में बदलाव के पक्ष में मतदान किया है। भाजपा ने राज्य में जोरदार चुनाव अभियान चलाया था और विकास,कानून-व्यवस्था तथा राजनीतिक हिंसा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिया कि भाजपा की रणनीति मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल रही।

इस बार विधानसभा की कुल 293 सीटों में से भाजपा ने अकेले 207 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। यह परिणाम पार्टी के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। भाजपा ने न केवल 2021 में जीती गई अपनी 77 सीटों को बरकरार रखा,बल्कि 130 नई सीटें भी अपने खाते में जोड़ लीं। इस प्रदर्शन ने पार्टी को राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित कर दिया है।

भाजपा की इस जीत को राष्ट्रीय राजनीति के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल लंबे समय से भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण राज्य रहा है,जहाँ पहले वाम दलों और बाद में तृणमूल कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा,लेकिन इस बार पार्टी ने बूथ स्तर तक मजबूत संगठन,आक्रामक प्रचार अभियान और केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता के दम पर सत्ता तक पहुँचने में सफलता हासिल की है।

अब सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि भाजपा पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री किसे बनाएगी। पार्टी नेतृत्व ऐसा चेहरा सामने लाना चाहता है,जो प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी मजबूत हो और राज्य में भाजपा के संगठन को लंबे समय तक मजबूती दे सके। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का चयन केवल राज्य की राजनीति ही नहीं,बल्कि आने वाले राष्ट्रीय चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा।

इसी बीच,तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी चुनावी हार को लेकर मंथन शुरू हो गया है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने संगठनात्मक कमजोरियों और जनता के बीच बढ़ती नाराजगी को हार की बड़ी वजह माना है। हालाँकि,पार्टी नेतृत्व अभी सार्वजनिक रूप से ज्यादा बयान देने से बच रहा है।

राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियाँ तेज हो चुकी हैं। राजभवन और भाजपा नेतृत्व के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। माना जा रहा है कि विधायक दल की बैठक के तुरंत बाद राज्यपाल नई सरकार बनाने के लिए भाजपा को औपचारिक निमंत्रण दे सकते हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय की जाएगी।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन भर नहीं माना जा रहा,बल्कि इसे राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि भाजपा राज्य में किस नेतृत्व के साथ अपनी नई सरकार की शुरुआत करती है और जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाती है। फिलहाल पूरे राज्य की नजरें कोलकाता में होने वाली विधायक दल की बैठक और नए मुख्यमंत्री के ऐलान पर टिकी हुई हैं।