वाशिंगटन,8 मई (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर तक पहुँचता दिखाई दे रहा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज हो गया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान द्वारा अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले किए जाने का दावा किया गया है,जिसकी पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के तीन डिस्ट्रॉयर्स पर मिसाइलों,ड्रोन और छोटी नावों के जरिए हमला किया गया,लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को नाकाम करते हुए जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुँचाया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लंबा बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना के तीन अत्याधुनिक डिस्ट्रॉयर्स सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट से बाहर निकल आए। उन्होंने दावा किया कि जहाजों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ,जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों की कई छोटी नावें पूरी तरह तबाह हो गईं। ट्रंप ने लिखा कि ये छोटी नावें ईरानी नौसेना की कमजोर होती ताकत की जगह इस्तेमाल की जा रही थीं और अब वे समुद्र की गहराइयों में समा चुकी हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइलें दागी गईं,लेकिन उन्हें हवा में ही मार गिराया गया। इसके अलावा ड्रोन हमलों को भी अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने विफल कर दिया। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सेना ने “पूरी सटीकता” के साथ कार्रवाई की और सभी हमलावर समुद्र में गिर गए। उन्होंने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि ईरानी हमलावर ऐसे गिरे मानो “तितली अपनी कब्र में गिर रही हो।”
ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरान को “पागल लोग” चला रहे हैं और यदि उन्हें परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का अवसर मिला,तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के ऐसा करेंगे। हालाँकि,उन्होंने दावा किया कि अमेरिका कभी ईरान को यह मौका नहीं देगा। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान ने जल्द समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए,तो भविष्य में उसे और भी कठोर तथा हिंसक जवाब का सामना करना पड़ेगा।
अपने बयान में ट्रंप ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को “वॉल ऑफ स्टील” यानी “स्टील की दीवार” करार दिया। यह शब्द आमतौर पर बेहद मजबूत और अभेद्य सैन्य सुरक्षा घेराबंदी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी डिस्ट्रॉयर्स अब दोबारा उस नौसैनिक अभियान में शामिल हो जाएँगे,जो होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ गया है। अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने भी बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी सेना ने उन ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया,जो अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल,ड्रोन और छोटी नावों के जरिए “बिना उकसावे” के हमलों के लिए जिम्मेदार थे। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहाँ किसी भी सैन्य संघर्ष का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता,बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। हालिया घटनाओं के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी चिंता बढ़ गई है और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात की नेशनल इमरजेंसी क्राइसिस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने भी सुरक्षा चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइल खतरों का जवाब दे रहे हैं। लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और केवल आधिकारिक चैनलों से जारी चेतावनियों तथा अपडेट्स का पालन करने की अपील की गई है।
क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव को और गंभीर बना सकता है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम,आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर लगातार टकराव देखने को मिला है। हालाँकि,बीच में संघर्षविराम और बातचीत की कोशिशें भी हुईं,लेकिन अब हालात फिर से विस्फोटक होते दिखाई दे रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का बयान केवल सैन्य प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं है,बल्कि यह ईरान पर दबाव बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों पर सीमाएँ स्वीकार करे। वहीं तेहरान लगातार कहता रहा है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
इजरायल की भूमिका को लेकर भी चर्चाएँ तेज हो गई हैं। ईरान बार-बार अमेरिका और इजरायल पर क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाता रहा है। दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल का कहना है कि ईरान की सैन्य गतिविधियाँ और उसका परमाणु कार्यक्रम पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया की बड़ी शक्तियाँ लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते,तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय टकराव का रूप ले सकता है। अभी पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव बातचीत की मेज तक पहुँचता है या फिर युद्ध जैसी स्थिति और गहराती है।
