विदेश मंत्री जयशंकर ने त्रिनिदाद और टोबैगो के पीएम से की मुलाकात (तस्वीर क्रेडिट@PM_Kamla)

त्रिनिदाद और टोबैगो में भारत की कूटनीतिक सक्रियता,विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मजबूत किए द्विपक्षीय संबंध

नई दिल्ली/पोर्ट ऑफ स्पेन,9 मई (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने कैरिबियाई दौरे के अंतिम चरण में त्रिनिदाद और टोबैगो पहुँचकर कई महत्वपूर्ण बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस दौरान भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के बीच द्विपक्षीय सहयोग,सांस्कृतिक संबंधों,शिक्षा,ऊर्जा,पर्यटन और क्षेत्रीय साझेदारी को नई दिशा देने पर व्यापक चर्चा हुई। विदेश मंत्री का यह दौरा केवल राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं,बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

शनिवार सुबह त्रिनिदाद और टोबैगो पहुँचने पर विदेश मंत्री जयशंकर का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि त्रिनिदाद और टोबैगो वापस आकर उन्हें खुशी महसूस हो रही है। उन्होंने वहाँ के विदेश मंत्री शॉन सोबर्स का स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया और अगले दो दिनों में सार्थक चर्चा और सहयोग की उम्मीद जताई। विदेश मंत्री के स्वागत के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों के बीच प्रारंभिक बातचीत भी हुई,जिसमें क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

अपने दौरे के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के बीच लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। बातचीत में व्यापार,निवेश,शिक्षा,स्वास्थ्य,ऊर्जा और डिजिटल सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर की क्षेत्रीय मुद्दों पर दी गई सलाह और दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि भारत कैरिबियाई देशों के साथ अपने संबंधों को और अधिक गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस दौरे का सबसे चर्चित कार्यक्रम त्रिनिदाद और टोबैगो के स्कूली बच्चों के लिए ‘मेड इन इंडिया’ लैपटॉप वितरण समारोह रहा। इस कार्यक्रम में विदेश मंत्री जयशंकर और प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने संयुक्त रूप से भाग लिया। यह पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले वर्ष किए गए वादे को पूरा करने के रूप में देखी जा रही है। कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि यह केवल लैपटॉप वितरण नहीं है,बल्कि यह शिक्षा,तकनीकी जागरूकता और नए अवसरों का संदेश भी है। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि नई पीढ़ी आधुनिक तकनीक के माध्यम से बेहतर शिक्षा प्राप्त करे और डिजिटल दुनिया में आगे बढ़े।

भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं हैं,बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से भी बेहद गहरे हैं। उन्होंने कहा कि साझा इतिहास, उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष और क्रिकेट के प्रति समान जुनून ने दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने त्रिनिदाद और टोबैगो के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में अहम योगदान दिया है और यह रिश्ता आने वाले समय में और मजबूत होगा।

विदेश मंत्री ने त्रिनिदाद और टोबैगो के विदेश मंत्रालय और कैरिकॉम मामलों से जुड़े कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इस दौरान आयोजित झंडा फहराने की सेरेमनी में उन्होंने भारत और कैरिबियाई देशों के बीच बढ़ते सहयोग को नई दिशा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत कैरिबियन समुदाय के साथ जलवायु परिवर्तन,ऊर्जा सुरक्षा,डिजिटल विकास और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर दोनों देशों के अधिकारियों ने आपसी साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।

दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों की भी घोषणा की गई। विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि पर्यटन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने,विदेश मंत्रालय और कैरिकॉम भवन के सोलराइजेशन,क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स तथा आयुर्वेद चेयर की स्थापना से जुड़े समझौतों को अंतिम रूप दिया गया है। इन समझौतों को दोनों देशों के बीच विकासात्मक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेष रूप से आयुर्वेद चेयर की स्थापना भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

विदेश मंत्री जयशंकर का त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद में भी विशेष स्वागत किया गया। संसद में उनका सम्मान किए जाने को भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के मजबूत संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने भारत की भूमिका और दोनों देशों के संबंधों की सराहना की। विदेश मंत्री ने संसद में मिले सम्मान के लिए आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान दोनों देशों की मित्रता और साझेदारी का प्रतीक है।

इस पूरे दौरे में सांस्कृतिक जुड़ाव भी खास आकर्षण का केंद्र रहा। विदेश मंत्री जयशंकर ने वेस्टइंडीज के महान क्रिकेटर ब्रायन लारा से मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया पर ब्रायन लारा के साथ तस्वीर साझा करते हुए उन्हें “वन एंड ओनली ब्रायन लारा” बताया। क्रिकेट को भारत और कैरिबियाई देशों के बीच सांस्कृतिक पुल माना जाता है और इस मुलाकात ने दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक संबंधों को और मजबूत करने का संदेश दिया।

इसके अलावा विदेश मंत्री ने त्रिनिदाद और टोबैगो के विदेश मंत्रालय में आयोजित समारोह में भी भाग लिया,जहाँ ब्रायन लारा की मौजूदगी विशेष आकर्षण रही। जयशंकर ने कहा कि क्रिकेट केवल खेल नहीं,बल्कि भारत और कैरिबियाई देशों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक माध्यम है।

गौरतलब है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह दौरा व्यापक कैरिबियाई कूटनीतिक यात्रा का हिस्सा था। इससे पहले वह जमैका और सूरीनाम का भी दौरा कर चुके हैं। इन दौरों के माध्यम से भारत कैरिबियाई और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ अपने संबंधों को नई मजबूती देने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह सक्रिय कूटनीति वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती भूमिका और विकासशील देशों के साथ मजबूत साझेदारी की रणनीति को दर्शाती है।