ज़ेलेंस्की और ट्रम्प

रूस-यूक्रेन युद्ध में तीन दिन के युद्धविराम पर सहमति,ट्रंप ने बताया शांति की दिशा में बड़ा कदम

वाशिंगटन,9 मई (युआईटीवी)- डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों ने तीन दिन के युद्धविराम पर सहमति बना ली है। ट्रंप ने इसे लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार यह युद्धविराम 9 मई से 11 मई तक प्रभावी रहेगा और इस दौरान दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई रोकेंगे। ट्रंप ने कहा कि यह पहल केवल अस्थायी विराम नहीं,बल्कि स्थायी शांति की दिशा में एक अहम शुरुआत साबित हो सकती है।

अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में 9, 10 और 11 मई को युद्धविराम रहेगा। उन्होंने बताया कि यह अवधि रूस के ‘विक्ट्री डे’ समारोह के दौरान की है,जिसे रूस में बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसर माना जाता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि दूसरे विश्व युद्ध में केवल रूस ही नहीं,बल्कि यूक्रेन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी और इसलिए यह समय दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है।

विक्ट्री डे रूस में हर वर्ष 9 मई को मनाया जाता है। यह दिन दूसरे विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की याद में आयोजित किया जाता है। रूस में इस अवसर पर बड़े सैन्य परेड और राष्ट्रीय समारोह आयोजित होते हैं। हालाँकि,यूक्रेन ने हाल के वर्षों में सोवियत प्रतीकों और परंपराओं से दूरी बनाने की कोशिश की है,लेकिन दूसरे विश्व युद्ध की विरासत वहाँ भी ऐतिहासिक महत्व रखती है।

ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम के दौरान दोनों देशों के बीच सभी सैन्य कार्रवाई अस्थायी रूप से रोक दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस अवधि में किसी भी प्रकार के हमले,गोलीबारी और सैन्य अभियान नहीं चलाए जाएँगे। अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार यह कदम मानवीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लगातार जारी युद्ध ने हजारों लोगों की जान ली है और लाखों लोगों को प्रभावित किया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी जानकारी दी कि युद्धविराम के साथ-साथ रूस और यूक्रेन कैदियों की बड़ी अदला-बदली पर भी सहमत हुए हैं। उनके अनुसार दोनों देश एक-दूसरे के 1,000-1,000 कैदियों को रिहा करेंगे। इसे युद्ध शुरू होने के बाद सबसे बड़े कैदी विनिमय समझौतों में से एक माना जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने और आगे की बातचीत के लिए माहौल तैयार करने में मदद करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि इस पहल की शुरुआत उन्होंने स्वयं की थी। ट्रंप ने कहा, “यह अनुरोध सीधे मैंने ही किया था।” उन्होंने इस समझौते को स्वीकार करने के लिए व्लादिमीर पुतिन और वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की दोनों की सराहना की। ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद बातचीत और समझौते की दिशा में कदम बढ़ाया है, जो वैश्विक शांति के लिए सकारात्मक संकेत है।

ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह युद्धविराम केवल तीन दिनों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आगे चलकर व्यापक शांति प्रक्रिया का आधार बनेगा। उन्होंने इस संघर्ष को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा और सबसे विनाशकारी युद्ध बताया। राष्ट्रपति के अनुसार दुनिया अब ऐसे मोड़ पर पहुँच चुकी है,जहाँ युद्ध को आगे बढ़ाने के बजाय समाधान तलाशना जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि बातचीत लगातार जारी है और हर गुजरते दिन के साथ समाधान के करीब पहुँचा जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि आने वाले समय में और भी कूटनीतिक प्रयास किए जाएँगे,ताकि स्थायी युद्धविराम और राजनीतिक समझौते का रास्ता तैयार हो सके। हालाँकि,उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की कि आगे की वार्ता किस स्तर पर होगी या उसमें कौन-कौन से मुद्दे शामिल होंगे।

अगर यह युद्धविराम पूरी तरह लागू होता है,तो इसे रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अब तक के सबसे बड़े संघर्ष विरामों में से एक माना जाएगा। इससे पहले भी कई बार अस्थायी युद्धविराम की कोशिशें हुई थीं,लेकिन वे ज्यादा समय तक प्रभावी नहीं रह सकीं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौतों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए थे,जिसके कारण लड़ाई दोबारा शुरू हो जाती थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार अंतर्राष्ट्रीय दबाव पहले की तुलना में अधिक है। लगातार जारी युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था,ऊर्जा बाजार और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक असर डाला है। यूरोप समेत दुनिया के कई देशों ने दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। ऐसे में तीन दिन का युद्धविराम भविष्य की बड़ी शांति प्रक्रिया के लिए एक परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है।

रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और तब से अब तक हजारों सैनिकों और नागरिकों की मौत हो चुकी है। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए और कई शहर भारी तबाही का सामना कर चुके हैं। युद्ध ने केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और आर्थिक स्थिरता को भी प्रभावित किया है।

इस बीच अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह अस्थायी युद्धविराम लंबे समय तक चलने वाली शांति वार्ता में बदल पाएगा। अमेरिका,यूरोपीय देशों और अन्य वैश्विक शक्तियों की भूमिका भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ट्रंप के इस बयान ने फिलहाल उम्मीद की एक नई किरण जरूर पैदा की है,लेकिन यह देखना बाकी है कि जमीन पर यह समझौता कितनी प्रभावशीलता से लागू हो पाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों पक्ष तीन दिन तक संघर्ष रोकने और कैदियों की अदला-बदली को सफलतापूर्वक पूरा कर लेते हैं,तो इससे विश्वास बहाली की दिशा में सकारात्मक माहौल बन सकता है। हालाँकि,युद्ध के मूल मुद्दों को हल करना अभी भी बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। फिर भी यह घोषणा ऐसे समय में आई है,जब पूरी दुनिया इस लंबे और विनाशकारी संघर्ष के अंत की उम्मीद कर रही है।