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स्विगी का वार्षिक घाटा बढ़कर 4,154 करोड़ रुपए पहुँचा, फिर भी चौथी तिमाही में कारोबार में दिखी मजबूती

मुंबई,9 मई (युआईटीवी)- स्विगी लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी करते हुए बताया कि कंपनी का कुल वार्षिक शुद्ध घाटा बढ़कर 4,154 करोड़ रुपए हो गया है। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी का घाटा 3,117 करोड़ रुपए था। हालाँकि,कंपनी ने यह भी कहा कि चौथी तिमाही में उसके घाटे में कमी आई है और कारोबार के कई प्रमुख संकेतकों में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।

ऑनलाइन फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि 31 मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही में उसका शुद्ध घाटा घटकर 800 करोड़ रुपए रह गया,जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 1,081 करोड़ रुपए था। कंपनी का कहना है कि परिचालन क्षमता में सुधार,ऑर्डर वृद्धि और विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के कारण तिमाही स्तर पर घाटे में कमी आई है।

स्विगी ने बताया कि जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में परिचालन से उसकी आय यानी रेवेन्यू 45 प्रतिशत बढ़कर 6,383 करोड़ रुपए पहुँच गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आँकड़ा 4,410 करोड़ रुपए था। वहीं कंपनी की कुल आय 46.74 प्रतिशत बढ़कर 6,649 करोड़ रुपए रही,जो एक साल पहले इसी अवधि में 4,531 करोड़ रुपए थी। कंपनी के अनुसार,फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स दोनों क्षेत्रों में मजबूत माँग के कारण आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

हालाँकि,बढ़ती आय के साथ कंपनी के खर्चों में भी तेज बढ़ोतरी हुई। विशेष रूप से विज्ञापन और बिक्री प्रमोशन पर खर्च बढ़कर 1,577 करोड़ रुपए पहुँच गया,जो पिछले साल की समान अवधि के 1,161 करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 36 प्रतिशत अधिक है। कंपनी ने माना कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रमोशनल गतिविधियों पर अधिक निवेश करना पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के ऑनलाइन फूड और क्विक कॉमर्स बाजार में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। कंपनियाँ ग्राहकों को बनाए रखने और नए उपभोक्ताओं को जोड़ने के लिए भारी डिस्काउंट,विज्ञापन और डिलीवरी नेटवर्क पर निवेश कर रही हैं। इसका असर फिलहाल लाभप्रदता पर पड़ रहा है,लेकिन कंपनियां लंबी अवधि में बाजार हिस्सेदारी मजबूत करने की रणनीति अपना रही हैं।

स्विगी के प्रबंध निदेशक और समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीहरशा मजेटी ने कहा कि कंपनी की क्विक कॉमर्स सेवा इंस्टामार्ट अब यूनिट इकॉनॉमिक्स सुधारने और परिचालन क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि क्विक कॉमर्स के अगले चरण में केवल ग्राहकों की मौजूदा जरूरतों को पूरा करना ही पर्याप्त नहीं होगा,बल्कि ग्राहकों की जरूरतों का पहले से अनुमान लगाना भी महत्वपूर्ण होगा।

मजेटी ने कहा कि कंपनी की यूनिट इकॉनॉमिक्स हर तिमाही में बेहतर हो रही है और स्विगी तय समयसीमा के अनुसार योगदान मार्जिन ब्रेकईवन की दिशा में आगे बढ़ रही है। उनका कहना है कि कंपनी का फोकस केवल तेजी से विस्तार करना नहीं,बल्कि स्थायी और संतुलित विकास सुनिश्चित करना भी है।

स्विगी की क्विक कॉमर्स सेवा इंस्टामार्ट ने चौथी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी के अनुसार इंस्टामार्ट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू यानी जीओवी सालाना आधार पर 68.8 प्रतिशत बढ़कर 7,881 करोड़ रुपए पहुँच गया। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि उपभोक्ताओं के बीच तेजी से सामान पहुँचाने वाली सेवाओं की माँग लगातार बढ़ रही है।

भारत में क्विक कॉमर्स सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से उभरा है। उपभोक्ता अब किराना, दैनिक जरूरत के सामान और छोटे घरेलू उत्पादों की डिलीवरी कुछ ही मिनटों में चाहते हैं। इसी बदलती उपभोक्ता आदत का लाभ स्विगी और अन्य कंपनियाँ उठाने की कोशिश कर रही हैं। हालाँकि,इस क्षेत्र में भारी निवेश और तेज प्रतिस्पर्धा के कारण लाभ कमाना अब भी चुनौती बना हुआ है।

फूड डिलीवरी कारोबार में भी स्विगी ने स्थिर वृद्धि दर्ज की। कंपनी के अनुसार चौथी तिमाही में फूड डिलीवरी कारोबार का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 9,005 करोड़ रुपए रहा। वहीं कुल ऑर्डर संख्या 18.3 मिलियन तक [पहुँच गई। यह संकेत देता है कि ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग की मांग शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लगातार मजबूत बनी हुई है।

विश्लेषकों का कहना है कि भारत में डिजिटल भुगतान,स्मार्टफोन उपयोग और तेज इंटरनेट पहुँच बढ़ने से ऑनलाइन फूड डिलीवरी बाजार का विस्तार जारी है। इसके अलावा युवा आबादी,बदलती जीवनशैली और सुविधा आधारित सेवाओं की माँग भी इस उद्योग को आगे बढ़ा रही है।

हालाँकि,निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी हुई है कि स्विगी जैसी कंपनियाँ लगातार बढ़ते कारोबार को कब स्थायी लाभप्रदता में बदल पाएँगी। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उच्च परिचालन लागत के बीच कंपनियों के लिए संतुलन बनाए रखना आसान नहीं माना जा रहा है। इसके बावजूद स्विगी का कहना है कि वह चरणबद्ध तरीके से अपने वित्तीय प्रदर्शन में सुधार कर रही है।

शेयर बाजार में भी कंपनी के नतीजों पर निवेशकों की नजर बनी रही। शुक्रवार को बीएसई पर स्विगी का शेयर 0.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ 281.30 रुपए पर बंद हुआ। कंपनी के शेयर ने पिछले 52 हफ्तों में 473 रुपए का उच्चतम और 256.40 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्विगी के लिए क्विक कॉमर्स,फूड डिलीवरी और तकनीकी नवाचार प्रमुख विकास क्षेत्र बने रहेंगे। कंपनी यदि खर्चों पर नियंत्रण और यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार बनाए रखने में सफल रहती है,तो भविष्य में उसके घाटे में और कमी आ सकती है।

ऑनलाइन डिलीवरी उद्योग में तेजी से बदलती प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता व्यवहार के बीच स्विगी अपने कारोबार को मजबूत करने की दिशा में लगातार निवेश कर रही है। हालाँकि,फिलहाल कंपनी को भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा है,लेकिन बढ़ती आय और ऑर्डर वॉल्यूम यह संकेत दे रहे हैं कि बाजार में उसकी पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है।