शक्तिकांत दास

वैश्विक तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्र सरकार का बड़ा फोकस,शक्तिकांत दास बोले- ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ऊर्जा सर्वोच्च प्राथमिकता

मुंबई,12 मई (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि जैव ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत आने वाले समय में देश की रणनीतिक जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाले हैं। मुंबई में आयोजित ‘सीआईआई एनुअल बिजनेस समिट 2026’ को संबोधित करते हुए शक्तिकांत दास ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और सरकार सुधारों के रास्ते पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।

शक्तिकांत दास ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी मजबूत आर्थिक स्थिरता है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में देश की बैंकिंग व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और संतुलित स्थिति में है। साथ ही सरकार की वित्तीय स्थिति भी स्थिर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट कंपनियों की बैलेंस शीट में उल्लेखनीय सुधार हुआ है,जिससे निजी निवेश को नई गति मिलने की संभावना बढ़ी है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार आर्थिक सुधारों को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इस दिशा में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। शक्तिकांत दास के अनुसार,वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत लगातार विकास और निवेश का आकर्षक केंद्र बना हुआ है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत ऊर्जा,तकनीक और विनिर्माण के क्षेत्र में और तेजी से आगे बढ़ेगा।

हालाँकि,अपने संबोधन के दौरान शक्तिकांत दास ने वैश्विक हालात को लेकर चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भारी असर डाल सकता है। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें भी वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इन हालात का असर केवल तेल और ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इससे दुनिया भर में उत्पादन लागत और महँगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सबसे बड़ा प्रभाव ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है,इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में तेजी से काम कर रही है,ताकि भविष्य में ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

शक्तिकांत दास की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में देशवासियों से वैश्विक आर्थिक संकट के प्रभाव को कम करने के लिए कई सावधानियाँ अपनाने की अपील की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से कहा था कि जहाँ संभव हो,लोग घर से काम करने को प्राथमिकता दें। उन्होंने गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने और अनावश्यक सोने की खरीदारी न करने की भी सलाह दी थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से खाने के तेल,विदेशी उत्पादों और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने की अपील भी की थी। माना जा रहा है कि सरकार इन उपायों के जरिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना चाहती है। साथ ही ऊर्जा आयात पर पड़ने वाले दबाव को भी कम करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच सरकार घरेलू संसाधनों और वैकल्पिक ऊर्जा पर अधिक जोर दे रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ग्रीन हाइड्रोजन को स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा विकल्प माना जा रहा है,क्योंकि इससे प्रदूषण कम होता है और यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने में मदद करता है। भारत सरकार पहले ही राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत कर चुकी है और इस क्षेत्र में बड़े निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

वहीं जैव ऊर्जा को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि जैव ऊर्जा के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और ऊर्जा उत्पादन को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत को भविष्य की चुनौतियों के लिए अभी से तैयार रहना होगा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता उसी दिशा में सबसे बड़ा कदम है।

इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी देशवासियों से घबराने की जरूरत नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों से निपटने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। सोमवार को राजनाथ सिंह ने मंत्रियों के अनौपचारिक सशक्त समूह की पाँचवीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके कारण ऊर्जा सप्लाई चेन पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा की गई।

बैठक में देश में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अंतर्राष्ट्रीय संकट का असर आम लोगों तक कम से कम पहुँचे। सूत्रों के अनुसार सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं,ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि भारत फिलहाल वैश्विक संकट के बीच अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार,स्थिर बैंकिंग व्यवस्था और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। हालाँकि,आने वाले समय में ऊर्जा कीमतों और वैश्विक व्यापार की स्थिति पर काफी कुछ निर्भर करेगा।

फिलहाल केंद्र सरकार ऊर्जा सुरक्षा,आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता को लेकर बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ऊर्जा को प्राथमिकता देना इसी व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है,जिसका उद्देश्य भारत को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करना है।