अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (तस्वीर क्रेडिट@IndiaAwakened_)

ईरान और होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी वैश्विक चिंता,अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ की अहम बातचीत

वाशिंगटन, 12 मई (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर अमेरिका ने अपने प्रमुख सहयोगी देशों के साथ कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बातचीत की। इन चर्चाओं का मुख्य फोकस ईरान की स्थिति और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखना रहा। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बातचीत की पुष्टि करते हुए बताया कि क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री स्थिरता को लेकर अमेरिका लगातार अपने सहयोगी देशों के संपर्क में है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और ब्रिटेन की विदेश सचिव इवेट कूपर से अलग-अलग बातचीत की। इन चर्चाओं को ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है,जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका बनी हुई है। अमेरिका इस पूरे क्षेत्र की स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और अपने साझेदार देशों के साथ रणनीतिक समन्वय को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार,मार्को रुबियो और पेनी वोंग के बीच हुई बातचीत में “स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र” को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा,समुद्री व्यापार और रणनीतिक स्थिरता पर विस्तार से चर्चा की। अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान में कहा कि रुबियो ने अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया गठबंधन को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

इस बातचीत के दौरान ईरान और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का मुद्दा विशेष रूप से उठाया गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित बनाए रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी प्रकार की रुकावट आती है,तो उसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ेगा।

मार्को रुबियो ने ब्रिटेन की विदेश सचिव इवेट कूपर से भी इसी मुद्दे पर चर्चा की। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक इस बातचीत में भी समुद्री सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट के महत्व पर जोर दिया गया। हालांकि विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन बैठकों में किसी संभावित सैन्य या कूटनीतिक कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा हुई या नहीं,लेकिन माना जा रहा है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर किसी भी संभावित संकट से निपटने की तैयारी कर रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यह संकरा समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया भर में निर्यात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव या अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। पिछले कुछ वर्षों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट कई बार अंतर्राष्ट्रीय चिंता का केंद्र बन चुका है।

भारत सहित कई एशियाई देशों के लिए भी यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है और इनमें से अधिकांश तेल आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही भारत पहुँचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना भारत की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस मार्ग में व्यवधान उत्पन्न होता है,तो तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है,जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

ऑस्ट्रेलिया की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका का करीबी रणनीतिक सहयोगी है। वह क्वाड समूह का भी सदस्य है,जिसमें भारत,जापान और अमेरिका शामिल हैं। क्वाड का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता,सुरक्षा और स्वतंत्र समुद्री मार्गों को सुनिश्चित करना माना जाता है। ऐसे में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस मुद्दे पर बातचीत को क्षेत्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

वहीं ब्रिटेन ने भी हाल के वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाई है। ब्रिटेन लगातार इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक और रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से मजबूत सुरक्षा साझेदारी रही है और दोनों देश कई वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करते रहे हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया की स्थिति पर दोनों देशों की बातचीत को वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

इसी बीच मार्को रुबियो ने इथियोपिया के विदेश मंत्री गेदियन तिमोथियोस से भी मुलाकात की। यह बैठक अमेरिका और इथियोपिया के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान हुई। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार,इस बातचीत में पूर्वी अफ्रीका की सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय संघर्षों को कम करने के प्रयासों पर चर्चा हुई। रुबियो ने पूर्वी अफ्रीका में शांति और स्थिरता बनाए रखने में इथियोपिया की भूमिका की सराहना की।

दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने और व्यापारिक अवसरों को बढ़ाने पर भी बातचीत हुई। अमेरिका अफ्रीका में अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है और इथियोपिया को क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच अमेरिका की ये लगातार कूटनीतिक बैठकें इस बात का संकेत हैं कि वाशिंगटन अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अमेरिका किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी में जुटा दिखाई दे रहा है।