नई दिल्ली,15 मई (युआईटीवी)- ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान गुरुवार को नरेंद्र मोदी और सैयद अब्बास अराघची के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस बैठक में भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों,क्षेत्रीय घटनाक्रमों और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। नई दिल्ली में आयोजित इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया,जहाँ वैश्विक शांति,सुरक्षा,आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय समन्वय जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से चर्चा के केंद्र में रहे।
भारत में स्थित ईरान दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ईरान के विदेश मंत्री दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत पहुँचे थे और इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक को भारत और ईरान के बीच रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है,खासकर ऐसे समय में जब मध्य पूर्व क्षेत्र में लगातार भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
बैठक में दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता,आर्थिक सहयोग और वैश्विक कूटनीतिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। माना जा रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा,व्यापारिक संपर्क और अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारों जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। भारत और ईरान लंबे समय से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध साझा करते रहे हैं और दोनों देश क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयासरत हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए ईरान के विदेश मंत्री बुधवार रात नई दिल्ली पहुँचे थे। गुरुवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा तीर्थ में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त मुलाकात की। इस दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक चुनौतियों,क्षेत्रीय संघर्षों और आर्थिक साझेदारी को लेकर अपने विचार साझा किए।
शाम को एस. जयशंकर की ओर से भारत मंडपम में एक विशेष रात्रिभोज का आयोजन किया गया,जिसमें दुनिया के कई देशों से आए विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में एस. जयशंकर ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से सामने रखा।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि शांति और सुरक्षा किसी भी वैश्विक व्यवस्था की मूल आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में दुनिया ने कई संघर्ष और संकट देखे हैं,जिन्होंने यह साबित किया है कि संवाद और कूटनीति ही समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज की जटिल और अनिश्चित दुनिया में सभी देशों को समानता,सहयोग और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों के सिद्धांत के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।
जयशंकर ने तकनीकी प्रगति और बदलते वैश्विक परिदृश्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीकें दुनिया को तेजी से बदल रही हैं और यदि उनका सही तरीके से उपयोग किया जाए,तो वे सुशासन,पारदर्शिता और समावेशी विकास को मजबूत कर सकती हैं। इसके अलावा उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस बीच ईरान सरकार के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा जानकारी में बताया गया कि विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज उन सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए खुला है,जो ईरानी नौसेना के साथ सहयोग करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा व्यापारिक और समुद्री बाधाओं के पीछे मुख्य कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हैं।
अराघची के इस बयान को वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहाँ से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में इस क्षेत्र की स्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान ईरान के विदेश मंत्री ने कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने मोहम्मद हसन के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने आर्थिक साझेदारी और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
इसके अलावा अराघची ने मौरो विएरा से भी मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और बहुपक्षीय संस्थाओं के भीतर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। ब्रिक्स मंच पर सदस्य देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में इन बैठकों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन के दौरान ईरान के विदेश मंत्री ने सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की। इस बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों,क्षेत्रीय घटनाक्रमों और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर समन्वय को लेकर चर्चा हुई। रूस और ईरान के बीच हाल के वर्षों में रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और दोनों देश कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली में आयोजित यह ब्रिक्स सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है,जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रही है। मध्य पूर्व में तनाव,वैश्विक ऊर्जा संकट,आर्थिक अनिश्चितता और बदलते अंतर्राष्ट्रीय समीकरणों के बीच ब्रिक्स देशों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
भारत इस मंच के जरिए विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने और वैश्विक दक्षिण के हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं ईरान जैसे देशों के साथ बढ़ता संवाद यह संकेत देता है कि क्षेत्रीय सहयोग और बहुपक्षीय कूटनीति आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का अहम आधार बनने जा रही है।
