वॉशिंगटन,16 मई (युआईटीवी)- पेंटागन ने पोलैंड में 4,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों की प्रस्तावित तैनाती को अस्थायी रूप से रद्द कर दिया है। इस फैसले ने यूरोप और नाटो सहयोगियों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। कई अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह निर्णय अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के कार्यालय से लिया गया,हालाँकि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक,जिन सैनिकों की तैनाती रोकी गई है,वे सेकेंड आर्मर्ड ब्रिगेड कॉम्बैट टीम से जुड़े थे। यह यूनिट यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से पोलैंड भेजी जानी थी,लेकिन अंतिम समय में इस योजना को रोक दिया गया। इस फैसले को यूरोप में अमेरिका की बदलती सैन्य रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
क्रिस्टोफर ला नेव ने कांग्रेस की सुनवाई के दौरान इस मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी यूरोपीय कमान के प्रमुख को सैन्य बलों में कटौती से जुड़े निर्देश प्राप्त हुए थे। उन्होंने बताया कि इस पर विस्तृत चर्चा के बाद यह तय किया गया कि संबंधित ब्रिगेड को फिलहाल थिएटर में तैनात न करना सबसे उपयुक्त होगा।
ला नेव ने कहा कि यूनिट के कुछ हिस्सों को पहले ही विदेश भेजा जा चुका था और सैन्य उपकरण भी रास्ते में थे। इससे साफ है कि तैनाती की तैयारी काफी आगे बढ़ चुकी थी,लेकिन बाद में रणनीतिक स्तर पर इसे रोकने का निर्णय लिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल सैन्य नहीं बल्कि राजनीतिक और आर्थिक रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है।
इस फैसले को लेकर अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने भी सवाल उठाए हैं। सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति की डेमोक्रेट सदस्य जीन शाहीन ने कहा कि कांग्रेस को इस फैसले के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार सांसदों को इस महत्वपूर्ण सैन्य निर्णय की सूचना नहीं दी गई।
इस घटनाक्रम से पहले पेंटागन ने यह भी घोषणा की थी कि अगले छह से बारह महीनों के भीतर जर्मनी से लगभग 5,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाया जाएगा। इस फैसले ने पहले ही यूरोप में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया था। अब पोलैंड में तैनाती रोकने के निर्णय ने इन चर्चाओं को और बढ़ा दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की विदेश और रक्षा नीति का असर इन फैसलों में साफ दिखाई दे रहा है। ट्रंप लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने कई बार नाटो देशों पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव भी बनाया है।
हाल ही में ट्रंप ने इटली के एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वह इटली में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों से सैनिकों को हटाने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा था कि “जब अमेरिका को जरूरत थी,तब इटली हमारे साथ नहीं था।” उनके इस बयान को यूरोपीय सहयोगियों के प्रति नाराजगी के संकेत के रूप में देखा गया।
ट्रंप के बयान पर गुइडो क्रोसेट्टो ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस फैसले के पीछे की “तर्कसंगतता को समझ नहीं पा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि इटली क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों के साथ लगातार काम कर रहा है।
इटली की समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार,इटली अन्य देशों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों को हटाने और समुद्री नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिशन की तैयारी कर रहा है। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों की संभावित वापसी को लेकर वहाँ चिंता देखी जा रही है।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि ट्रंप ने स्पेन और इटली में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति घटाने की संभावना पर विचार किया है। उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के सैन्य प्रयासों में पर्याप्त सहयोग नहीं किया।
इटली में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। अमेरिकी रक्षा विभाग के आँकड़ों के अनुसार,2025 के अंत तक इटली में लगभग 12,700 सक्रिय अमेरिकी सैनिक स्थायी रूप से तैनात थे। जर्मनी के बाद इटली यूरोप में अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी सैन्य तैनाती वाला देश है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम करने या तैनाती योजनाओं को रोकने के फैसलों का असर नाटो की सामूहिक सुरक्षा रणनीति पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पूर्वी यूरोप में सुरक्षा चिंताएँ बढ़ी हुई हैं। पोलैंड को नाटो के पूर्वी मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी माना जाता है और वहाँ अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी को सुरक्षा संतुलन के लिए अहम समझा जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की नीति अब अमेरिका के वैश्विक सैन्य खर्च को कम करने और सहयोगी देशों पर अधिक जिम्मेदारी डालने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालाँकि,इस रणनीति को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच मतभेद भी उभरते दिखाई दे रहे हैं।
फिलहाल पेंटागन की ओर से पोलैंड तैनाती रद्द करने पर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है,लेकिन इस फैसले ने यूरोप में अमेरिकी सैन्य रणनीति और नाटो की भविष्य की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। आने वाले समय में अमेरिका के अन्य यूरोपीय सैन्य अड्डों को लेकर भी बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।
