नई दिल्ली,16 मई (युआईटीवी)- इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) की आगामी तिमाही बैठकों को लेकर क्रिकेट जगत में हलचल तेज हो गई है। इस महीने के आखिर में भारत के अहमदाबाद में होने वाली इन अहम बैठकों पर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव की साफ छाया दिखाई दे रही है। खासतौर पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन मोहसिन नकवी की संभावित मौजूदगी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार,आईसीसी की मुख्य कार्यकारी समिति की बैठक 21 मई को वर्चुअल माध्यम से आयोजित होगी। इसके बाद 30 और 31 मई को अहमदाबाद में आईसीसी बोर्ड की आमने-सामने होने वाली महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जाएँगी। खास बात यह है कि यह कार्यक्रम उसी समय हो रहा है,जब इंडियन प्रीमियर लीग 2026 अपने अंतिम चरण में होगा और क्रिकेट जगत की नजरें भारत पर टिकी होंगी।
बताया जा रहा है कि इन बैठकों को पहले कतर की राजधानी दोहा में आयोजित करने की योजना थी। मार्च और अप्रैल के दौरान इन बैठकों के आयोजन पर विचार हुआ था,लेकिन पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए कार्यक्रम को भारत स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद अहमदाबाद को मेजबानी के लिए चुना गया।
हालाँकि,अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मोहसिन नकवी भारत की यात्रा करेंगे। नकवी अक्सर पाकिस्तान के प्रतिनिधि के तौर पर आईसीसी बैठकों में व्यक्तिगत रूप से शामिल होते रहे हैं,लेकिन मौजूदा राजनीतिक हालात और भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों ने इस बार स्थिति को जटिल बना दिया है।
सूत्रों के मुताबिक,भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और पीसीबी के बीच पिछले कुछ समय से संबंध लगातार खराब हुए हैं। क्रिकेट प्रशासन से जुड़े कई मुद्दों पर दोनों बोर्डों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। यही कारण है कि अहमदाबाद बैठक में नकवी की उपस्थिति को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है।
क्रिकेट जगत में चर्चा है कि जब से मोहसिन नकवी ने पीसीबी की कमान सँभाली है,तब से बीसीसीआई और पीसीबी के रिश्तों में और ज्यादा तनाव देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंध पहले से ही संवेदनशील रहे हैं और उसका असर अब क्रिकेट प्रशासनिक स्तर पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
तनाव को और बढ़ाने वाली सबसे बड़ी घटना दुबई में आयोजित एशिया कप 2025 के समापन समारोह के दौरान सामने आई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक,ट्रॉफी वितरण समारोह को लेकर दोनों बोर्डों के बीच गंभीर विवाद पैदा हो गया था। इस घटनाक्रम ने क्रिकेट प्रशासनिक संबंधों में नई तल्खी जोड़ दी।
बताया जाता है कि समापन समारोह के दौरान कुछ व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल को लेकर असहमति उत्पन्न हुई थी। विवाद इतना बढ़ गया कि मोहसिन नकवी ट्रॉफी और पदकों के साथ स्टेडियम से बाहर चले गए। इसके बाद यह मामला दोनों बोर्डों के बीच तनाव का प्रमुख कारण बन गया।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नकवी के निर्देश पर ट्रॉफी और पदक अब तक दुबई में ही रखे गए हैं। दूसरी ओर बीसीसीआई लगातार उन्हें वापस भेजने का अनुरोध कर रहा है। सूत्रों के अनुसार,भारतीय बोर्ड ने इस मुद्दे को आईसीसी के समक्ष भी उठाया है और इसे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर मामला माना जा रहा है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि आईसीसी की बैठकें केवल खेल से जुड़े फैसलों तक सीमित नहीं रहतीं,बल्कि ये वैश्विक क्रिकेट राजनीति का भी महत्वपूर्ण मंच होती हैं। ऐसे में बीसीसीआई और पीसीबी के बीच बढ़ता तनाव आईसीसी के अंदर शक्ति संतुलन और भविष्य की नीतियों पर भी असर डाल सकता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट संबंध पिछले कई वर्षों से सीमित रहे हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज लगभग बंद है और केवल आईसीसी तथा एशियाई टूर्नामेंटों में ही मुकाबले देखने को मिलते हैं। राजनीतिक तनाव के कारण दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डों के बीच भरोसे की कमी लगातार बढ़ती गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अहमदाबाद में होने वाली आईसीसी बैठकों में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने वाली है। इसमें वैश्विक क्रिकेट कैलेंडर,आगामी आईसीसी टूर्नामेंट,राजस्व वितरण,सदस्य देशों के अधिकार और क्रिकेट के विस्तार जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। ऐसे में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालाँकि,मौजूदा हालात को देखते हुए यह भी संभावना जताई जा रही है कि अगर मोहसिन नकवी भारत नहीं आते हैं,तो पीसीबी किसी अन्य अधिकारी को प्रतिनिधित्व के लिए भेज सकता है। हालाँकि,इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
क्रिकेट प्रशंसकों और विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों बोर्डों के बीच तनाव कम होता है या नहीं। क्योंकि आईसीसी जैसे मंच पर भारत और पाकिस्तान की मौजूदगी वैश्विक क्रिकेट राजनीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है।
अहमदाबाद में होने वाली बैठकें ऐसे समय में हो रही हैं,जब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कई बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है। टी20 लीग्स का बढ़ता प्रभाव,खिलाड़ियों का व्यस्त कार्यक्रम और क्रिकेट प्रशासन में आर्थिक असंतुलन जैसे मुद्दे पहले से ही चर्चा में हैं। ऐसे माहौल में बीसीसीआई और पीसीबी के बीच विवाद आईसीसी की कार्यप्रणाली पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि क्या मोहसिन नकवी भारत आने का फैसला लेते हैं या नहीं। यदि वह बैठक में शामिल नहीं होते हैं,तो यह केवल एक प्रशासनिक अनुपस्थिति नहीं होगी,बल्कि इसे भारत-पाक क्रिकेट संबंधों में बढ़ती दूरी के प्रतीक के रूप में भी देखा जाएगा।
