नई दिल्ली, 18 मई (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा को लेकर गहराती चिंताओं के बीच भारत के लिए एक राहतभरी खबर सामने आई है। 20 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर कतर से रवाना हुआ एक जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के बाद गुजरात तट स्थित दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण पहुँच गया। अधिकारियों ने बताया कि मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाला एमवी एसवाईएमआई नामक जहाज शनिवार रात करीब साढ़े ग्यारह बजे कांडला बंदरगाह पर पहुँचा। यह जहाज 13 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर रवाना हुआ था।
इस घटनाक्रम को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है,जब पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। ओमान के तट के पास स्थित यह संकरा जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए जीवनरेखा माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग एक-पाँचवें तेल और गैस निर्यात का परिवहन इसी मार्ग से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
अधिकारियों के अनुसार,मार्च की शुरुआत से अब तक 12 एलपीजी टैंकरों और एक कच्चे तेल के टैंकर सहित कुल 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। हालाँकि,हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष ने समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ा,जिसके जवाब में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद पूरे इलाके में अस्थिरता बढ़ गई और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान संकट हाल के दशकों के सबसे गंभीर ऊर्जा संकटों में से एक बनता जा रहा है। तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कई देशों ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आपात योजनाएँ बनानी शुरू कर दी हैं। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय है,क्योंकि देश अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर करता है।
भारत ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद की विशेष बैठक में भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि नागरिक चालक दल को निशाना बनाना और नौवहन की स्वतंत्रता को बाधित करना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
हरीश का यह बयान ऐसे समय आया,जब कुछ दिन पहले ही ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ था। यह जहाज सोमालिया से आ रहा था और उस पर मौजूद सभी 14 चालक दल के सदस्यों को ओमान के अधिकारियों ने सुरक्षित बचा लिया। हालाँकि,हमले के पीछे किसका हाथ था,इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी थी। इस घटना ने भारत सहित कई देशों की चिंता और बढ़ा दी थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल पश्चिम एशिया ही नहीं,बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस समुद्री मार्ग में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है,तो इसका असर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार,ऊर्जा कीमतों और वैश्विक बाजारों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से कई देशों में महँगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारत लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि उसकी ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। भारतीय नौसेना और समुद्री सुरक्षा एजेंसियाँ भी क्षेत्र में हालात पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार,भारत आने वाले दिनों में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति मार्गों पर भी ध्यान बढ़ा सकता है,ताकि किसी संभावित बड़े संकट की स्थिति में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने समुद्री सुरक्षा को लेकर भी नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। इस साल की शुरुआत से अब तक कम-से-कम तीन भारतीय ध्वज वाले जहाज हमलों का शिकार हो चुके हैं। लगातार बढ़ते जोखिम के बावजूद भारतीय जहाजों का इस मार्ग से गुजरना जारी है,क्योंकि वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर है।
कांडला बंदरगाह पर एलपीजी से भरे जहाज का सुरक्षित पहुँचना फिलहाल भारत के लिए राहत की खबर जरूर है,लेकिन क्षेत्र में जारी तनाव को देखते हुए चिंताएँ अभी खत्म नहीं हुई हैं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहा है,क्योंकि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
