नई दिल्ली,18 मई (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के लिए समय तेजी से खत्म हो रहा है और अगर उसने तुरंत कदम नहीं उठाए,तो उसके पास कुछ भी नहीं बचेगा। ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका तथा ईरान के बीच संभावित टकराव को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहराती जा रही है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि ईरान के लिए घड़ी की सुइयां तेजी से भाग रही हैं और बेहतर होगा कि वह तुरंत हरकत में आए,वरना बहुत देर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि समय सबसे कीमती चीज है और ईरान को इसे समझना चाहिए। ट्रंप के इस बयान को तेहरान पर बढ़ते अमेरिकी दबाव के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका अब ईरान को लेकर अधिक आक्रामक रणनीति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
इससे पहले भी ट्रंप ने एक एआई से तैयार तस्वीर साझा कर अप्रत्यक्ष रूप से ईरान को चेतावनी दी थी। उस पोस्ट में उन्होंने लिखा था, “यह तूफान से पहले की शांति है।” सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीर में ट्रंप अमेरिकी नौसेना के एक एडमिरल के साथ नौसैनिक जहाज पर खड़े दिखाई दे रहे थे। उन्होंने अपने समर्थकों के बीच लोकप्रिय ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ टोपी पहन रखी थी। तस्वीर में समुद्र में तूफानी माहौल और बिजली कड़कती दिखाई गई थी,जबकि पृष्ठभूमि में ईरानी जहाज भी नजर आ रहे थे। इस पोस्ट को लेकर व्यापक चर्चा हुई और इसे ईरान के लिए एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश माना गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की भाषा और सोशल मीडिया पोस्ट अमेरिकी प्रशासन के बदलते तेवरों की ओर इशारा कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। परमाणु कार्यक्रम,क्षेत्रीय सुरक्षा,मिसाइल परीक्षण और मध्य पूर्व में प्रभाव बढ़ाने की होड़ को लेकर दोनों देशों के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में ट्रंप के ताजा बयान ने यह संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी अमेरिका की चेतावनियों का जवाब दिया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तेहरान बातचीत के जरिए समाधान चाहता है,लेकिन इसके लिए गंभीर और धैर्यपूर्ण वार्ता जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका या कोई अन्य पक्ष दोबारा युद्ध थोपने की कोशिश करता है,तो परिणाम पहले जैसा ही होगा और ईरान अपनी रक्षा करने में सक्षम है।
अराघची ने कहा कि यह केवल राजनीति का मुद्दा नहीं बल्कि युद्ध और शांति का सवाल है। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में समाधान निकालना है,तो जटिल और विस्तृत बातचीत की आवश्यकता होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान पहले भी दबाव और संघर्ष का सामना कर चुका है और भविष्य में भी वह पीछे हटने वाला नहीं है। उनके बयान को तेहरान की ओर से अमेरिका को सीधा जवाब माना जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में भी इस तनाव को लेकर कई तरह की रिपोर्ट सामने आ रही हैं। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान को लेकर बड़ा फैसला लेने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार,ट्रंप के करीबी सहयोगी कथित तौर पर वैकल्पिक सैन्य योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं,तो अमेरिका संभावित नए एयर ऑपरेशन की दिशा में भी कदम बढ़ा सकता है। हालाँकि,अमेरिकी प्रशासन की ओर से इन रिपोर्टों पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इस तरह की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
मध्य पूर्व पहले से ही कई संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र बना हुआ है। इजरायल-ईरान तनाव,खाड़ी देशों की सुरक्षा,तेल आपूर्ति और परमाणु कार्यक्रम को लेकर हालात संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव केवल क्षेत्रीय ही नहीं,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़े प्रभाव डाल सकता है। तेल बाजार, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर इसका असर पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की रणनीति दबाव बढ़ाकर ईरान को वार्ता की मेज पर लाने की हो सकती है। हालाँकि,दूसरी ओर यह भी आशंका जताई जा रही है कि लगातार बढ़ती बयानबाजी किसी गलत आकलन या आकस्मिक सैन्य टकराव का कारण बन सकती है। यही वजह है कि कई देश दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील कर रहे हैं।
ईरान लंबे समय से यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है,जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आशंका है कि तेहरान परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर वर्षों से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। कई दौर की बातचीत और समझौतों के बावजूद स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
ट्रंप के हालिया बयान और ईरान की प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका और ईरान कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे या फिर मध्य पूर्व एक नए बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है।
