नई दिल्ली,20 मई (युआईटीवी)- मेटा प्लेटफॉर्म्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पुनर्गठन के तहत करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान कर वैश्विक टेक उद्योग में नई बहस छेड़ दी है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,कंपनी अपने संगठनात्मक ढाँचे में बड़े बदलाव कर रही है,जिसके चलते दुनिया भर में उसके लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक,इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है,जब पूरी टेक इंडस्ट्री तेजी से एआई-केंद्रित मॉडल की ओर बढ़ रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार,कंपनी ने चरणबद्ध तरीके से कर्मचारियों को छंटनी से संबंधित सूचनाएँ भेजनी शुरू कर दी हैं। इसके साथ ही मेटा के भीतर कई भूमिकाओं को बदला जा रहा है और कर्मचारियों को नई एआई-आधारित जिम्मेदारियों में स्थानांतरित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि कंपनी का उद्देश्य अपनी कार्यप्रणाली को अधिक तेज,सरल और तकनीक आधारित बनाना है।
एक इंटरनल मेमो के हवाले से दावा किया गया है कि मेटा लगभग 7,000 कर्मचारियों को नई एआई-केंद्रित भूमिकाओं में ट्रांसफर करने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में एआई केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं रहेगा,बल्कि पूरी कॉर्पोरेट संरचना और निर्णय प्रक्रिया का मुख्य आधार बनेगा। इसी वजह से मेटा अपने कर्मचारियों और टीमों को नई रणनीति के अनुसार तैयार कर रही है।
मेटा की मानव संसाधन प्रमुख जेनेल गेल ने कर्मचारियों को भेजे गए मेमो में कहा कि कई टीमों को एआई आधारित सिद्धांतों के अनुसार दोबारा संगठित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कंपनी छोटी लेकिन अधिक प्रभावी टीमों का निर्माण करना चाहती है,जो तेज गति से काम कर सकें और अधिक जिम्मेदारी सँभाल सकें। उनके अनुसार,नई संरचना का उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाना और उत्पाद विकास की गति को बढ़ाना है।
जेनेल गेल ने मेमो में कहा कि बदलावों के दौरान कई टीमों ने एआई-आधारित डिजाइन सिद्धांतों को अपनी नई संगठनात्मक संरचनाओं में शामिल किया है। कंपनी का मानना है कि इससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और एआई टूल्स के इस्तेमाल से कम संसाधनों में अधिक परिणाम हासिल किए जा सकेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक,उत्तरी अमेरिका में काम कर रहे कर्मचारियों को उस दिन घर से काम करने के लिए कहा गया,जिस दिन छंटनी प्रभावी हुई। मेटा ने पहले भी बड़े पैमाने पर छंटनी के दौरान इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई थी। कंपनी आमतौर पर ऐसे समय कर्मचारियों की सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करती है।
मेटा का यह पुनर्गठन ऐसे समय में हो रहा है,जब कंपनी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार,कंपनी ने 2026 के लिए 125 अरब डॉलर से 145 अरब डॉलर तक के पूँजीगत व्यय का अनुमान लगाया है। यह निवेश मुख्य रूप से एआई डेटा सेंटर,कस्टम चिप्स,सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े एआई मॉडल के प्रशिक्षण पर केंद्रित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेटा अब केवल सोशल मीडिया कंपनी बनकर नहीं रहना चाहती,बल्कि वह खुद को एआई आधारित टेक्नोलॉजी दिग्गज के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने मेटावर्स,मशीन लर्निंग और जनरेटिव एआई जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश किए हैं। अब एआई को कंपनी की भविष्य की रणनीति का मुख्य आधार माना जा रहा है।
मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जकरबर्ग ने कथित तौर पर कर्मचारियों को यह भरोसा दिलाया कि कंपनी द्वारा एकत्र किया जा रहा डेटा केवल एआई सिस्टम को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मकसद कर्मचारियों की निगरानी करना नहीं है। जकरबर्ग ने कहा कि एआई तकनीक को अधिक सक्षम और उपयोगी बनाने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा और कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत होती है।
हालाँकि,मेटा के इस फैसले ने कर्मचारियों और टेक इंडस्ट्री में चिंता भी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई तकनीक के तेजी से विस्तार के कारण कई पारंपरिक नौकरियाँ प्रभावित हो सकती हैं। दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियाँ अब ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रही हैं,जहाँ कम कर्मचारियों के साथ अधिक ऑटोमेशन और एआई आधारित कार्यप्रणाली अपनाई जा सके।
पिछले कुछ वर्षों में गूगल,अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कई बड़ी कंपनियाँ भी हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। इन कंपनियों का कहना रहा है कि बदलते तकनीकी माहौल और एआई के बढ़ते उपयोग के कारण संगठनात्मक ढाँचे में बदलाव जरूरी हो गया है। मेटा का ताजा कदम इसी वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा माना जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार,मेटा आने वाले वर्षों में एआई आधारित उत्पादों और सेवाओं को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाना चाहती है। कंपनी पहले ही अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एआई चैटबॉट,स्मार्ट रिकमेंडेशन सिस्टम और कंटेंट जनरेशन टूल्स पर काम कर रही है। इसके अलावा विज्ञापन और डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में भी एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
कंपनी के इस फैसले का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इससे पूरी टेक इंडस्ट्री में रोजगार और कार्य संस्कृति को लेकर नई चर्चा शुरू हो सकती है। एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच अब कंपनियाँ मानव संसाधन और तकनीकी ऑटोमेशन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रही हैं।
मेटा का कहना है कि यह पुनर्गठन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है और इसका उद्देश्य कंपनी को अधिक प्रतिस्पर्धी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है। हालाँकि,कर्मचारियों के लिए यह बदलाव अनिश्चितता और चिंता लेकर आया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि एआई आधारित इस नई रणनीति का मेटा की कारोबारी सफलता और वैश्विक टेक उद्योग पर कितना बड़ा प्रभाव पड़ता है।
