डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा खुलासा,बोले- ईरान पर हमला शुरू करने से सिर्फ एक घंटे दूर था अमेरिका

वाशिंगटन,20 मई (युआईटीवी)- डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने से केवल एक घंटे की दूरी पर था,लेकिन खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों के अनुरोध पर इस फैसले को कुछ समय के लिए टाल दिया गया। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहती और यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका कठोर सैन्य कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

व्हाइट हाउस में बन रहे नए बॉलरूम और सुरक्षा परिसर के निर्माण स्थल का दौरा करते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार थी और कार्रवाई शुरू होने ही वाली थी। उन्होंने बताया कि नौसेना के जहाज,सैन्य उपकरण और हथियार पूरी तरह तैनात किए जा चुके थे। ट्रंप ने कहा, “मैं आज कार्रवाई का फैसला लेने से सिर्फ एक घंटे दूर था। हम पूरी तरह तैयार थे। नाव,जहाज और हथियार सब तैयार थे।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इसी दौरान खाड़ी क्षेत्र के कुछ प्रमुख सहयोगी देशों के नेताओं ने उनसे संपर्क किया और ईरान के साथ बातचीत के लिए थोड़ा और समय देने की अपील की। ट्रंप के अनुसार,इन देशों का मानना था कि ईरान हालिया वार्ताओं में पहले की तुलना में अधिक “समझदारी” दिखा रहा है और कूटनीतिक समाधान की संभावना अब भी बनी हुई है।

ट्रंप ने बताया कि उन्हें फोन कर कहा गया, “क्या आप हमें दो-तीन दिन और दे सकते हैं? हमें लगता है कि वे अब ठीक तरीके से बात कर रहे हैं।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने क्षेत्रीय सहयोगियों की बात को ध्यान में रखते हुए फैसला कुछ समय के लिए टाल दिया,लेकिन यह मोहलत बहुत सीमित होगी।

उन्होंने कहा, “मैं कह रहा हूँ दो या तीन दिन,शायद शुक्रवार,शनिवार,रविवार या अगले हफ्ते की शुरुआत तक। बहुत सीमित समय। क्योंकि हम उन्हें परमाणु हथियार नहीं रखने दे सकते।” ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने देना पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा होगा।

ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ गया,तो मध्य पूर्व में अस्थिरता खतरनाक स्तर तक बढ़ सकती है। उन्होंने दावा किया कि ईरान सबसे पहले इजरायल को निशाना बनाएगा और उसके बाद खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों पर खतरा बढ़ जाएगा।

उन्होंने कहा, “अगर उनके पास परमाणु हथियार हुआ,तो वे सबसे पहले इजरायल पर हमला करेंगे और बहुत तेजी से करेंगे। फिर वे सऊदी अरब,कुवैत,यूएई और कतर को निशाना बनाएँगे। यह परमाणु तबाही होगी। मुझे पूरा यकीन है कि वे इसका इस्तेमाल करेंगे।”

ट्रंप के इन बयानों को ईरान के खिलाफ अमेरिका की आक्रामक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन लगातार यह कहता रहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। अमेरिका का आरोप है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है,लेकिन वास्तव में वह सैन्य क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर भी बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी आकलन के मुताबिक ईरान की अधिकांश मिसाइल क्षमता खत्म हो चुकी है और उसकी नौसेना तथा वायुसेना बेहद कमजोर स्थिति में पहुँच चुकी हैं।

ट्रंप ने कहा, “हमारे अनुमान के मुताबिक उनकी 82 प्रतिशत मिसाइलें खत्म हो चुकी हैं। उनकी नौसेना लगभग खत्म है और वायुसेना भी लगभग खत्म हो चुकी है।” हालाँकि,उन्होंने यह भी माना कि ईरान के पास अभी कुछ जवाबी क्षमता मौजूद है,लेकिन वह पहले जैसी स्थिति में नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान की नई सैन्य क्षमता विकसित करने की ताकत काफी कमजोर हो चुकी है,क्योंकि उसके कई सैन्य निर्माण केंद्र और बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया जा चुका है। ट्रंप के अनुसार,अमेरिका लगातार ईरान की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और किसी भी खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

इस दौरान ट्रंप ने शी जिनपिंग का भी जिक्र किया और कहा कि चीन के राष्ट्रपति ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि बीजिंग ईरान को हथियार नहीं भेज रहा है। ट्रंप ने कहा कि यह अमेरिका के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति शी ने मुझसे वादा किया है कि वे ईरान को कोई हथियार नहीं भेज रहे। यह बहुत अच्छी बात है। मैं उनकी बात पर भरोसा करता हूँ।” ट्रंप के इस बयान को अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक संवाद के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि चीन ईरान का एक बड़ा आर्थिक साझेदार माना जाता है और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद वह ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार बना हुआ है। ऐसे में चीन की भूमिका मध्य पूर्व की राजनीति और ईरान से जुड़े मामलों में काफी अहम मानी जाती है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि सऊदी अरब,कतर,संयुक्त अरब अमीरात,कुवैत और बहरीन जैसे देश ईरान से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों के साथ लगातार बातचीत हो रही है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर साझा रणनीति बनाई जा रही है।

ट्रंप ने कहा, “हम सब मिलकर बातचीत कर रहे हैं। इजरायल एक बहुत अच्छा साझेदार रहा है।” उन्होंने इजरायल की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और अमेरिका,ईरान तथा इजरायल के बीच संबंध बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है,जबकि तेहरान भी अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,ट्रंप की यह चेतावनी केवल ईरान को संदेश देने तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य अमेरिकी सहयोगियों को यह भरोसा दिलाना भी है कि वॉशिंगटन क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालाँकि,साथ ही अमेरिका बातचीत के रास्ते भी खुले रखना चाहता है,ताकि बड़े सैन्य संघर्ष से बचा जा सके।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है। आने वाले कुछ दिन यह तय कर सकते हैं कि क्षेत्र में तनाव कम होगा या हालात फिर किसी बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ेंगे।