नई दिल्ली,21 मई (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पाँच दिवसीय विदेश यात्रा भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित होती नजर आ रही है। अधिकारियों के मुताबिक इस दौरे के दौरान भारत को करीब 40 अरब डॉलर के नए निवेश और व्यापार विस्तार संबंधी प्रतिबद्धताएँ हासिल हुई हैं। इन निवेश योजनाओं में दुनिया की कई बड़ी कंपनियों ने भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने और नए क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब भारत तेजी से दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और वैश्विक कंपनियाँ भारतीय बाजार को भविष्य के बड़े अवसर के रूप में देख रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में संयुक्त अरब अमीरात,नीदरलैंड,स्वीडन,नॉर्वे और इटली शामिल थे। पाँच दिनों तक चली इस यात्रा के दौरान उन्होंने सेमीकंडक्टर,इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,ऊर्जा और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों से जुड़ी 50 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। अधिकारियों के अनुसार इन कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर से 3 ट्रिलियन डॉलर के बीच आंका गया है,जो इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारत को लेकर विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि इन कंपनियों में से कई पहले से ही भारत में सक्रिय हैं और उन्होंने यहाँ बड़े पैमाने पर निवेश किया हुआ है। अनुमान के मुताबिक इन वैश्विक कंपनियों का भारत में कुल निवेश और कारोबार करीब 180 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है। अब ये कंपनियाँ भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज विकास दर और तेजी से बढ़ती घरेलू खपत को देखते हुए अपने कारोबार को और विस्तार देना चाहती हैं।
इस यात्रा के दौरान सबसे अहम घोषणाओं में से एक संयुक्त अरब अमीरात की ओर से सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक यूएई ने भारत में लगभग 5 अरब डॉलर के नए निवेश की घोषणा की है। माना जा रहा है कि यह निवेश बुनियादी ढाँचे,लॉजिस्टिक्स,ऊर्जा और नई तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और यूएई के बीच आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं और दोनों देश रणनीतिक साझेदार के रूप में उभर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में व्यापार और निवेश के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी को भी विशेष महत्व दिया गया। भारत और नीदरलैंड ने मिलकर व्यापार,रक्षा,सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर केंद्रित एक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप का अनावरण किया। इस समझौते को भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सेमीकंडक्टर और एआई जैसे क्षेत्र आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे अहम स्तंभ बनने जा रहे हैं।
नीदरलैंड लंबे समय से तकनीकी नवाचार और हाई-टेक उद्योगों के लिए जाना जाता है। ऐसे में भारत के साथ उसका सहयोग देश की तकनीकी क्षमताओं को नई दिशा दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता को मजबूती मिलेगी और देश को वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा भारत और स्वीडन के संबंधों को भी नई ऊँचाई मिली। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई। स्वीडन तकनीक,हरित ऊर्जा और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी देशों में गिना जाता है। ऐसे में भारत के साथ उसकी बढ़ती साझेदारी को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान नॉर्वे में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में नॉर्डिक देशों के नेताओं के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि इस बैठक से भारत और नॉर्डिक देशों के बीच ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन,हरित तकनीक और डिजिटल सहयोग के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे। नॉर्डिक देशों को दुनिया के सबसे विकसित और नवाचार आधारित क्षेत्रों में गिना जाता है,इसलिए भारत के लिए उनके साथ सहयोग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इटली के साथ भी भारत के संबंधों में नई प्रगति देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई वार्ता के बाद दोनों देशों ने विशेष रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने का फैसला किया। यह कदम रक्षा,व्यापार,तकनीक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को और मजबूत करेगा। पिछले कुछ वर्षों में भारत और इटली के रिश्तों में तेजी से सुधार हुआ है और दोनों देश कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी एक-दूसरे के करीब आए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे दौरे के दौरान जिन नई निवेश प्रतिबद्धताओं और व्यापार विस्तार योजनाओं पर चर्चा हुई,उनका कुल अनुमानित मूल्य करीब 40 अरब डॉलर है। इसे भारत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है,खासकर ऐसे समय में जब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं,बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद सफल रही है। इससे भारत की वैश्विक छवि एक स्थिर,तेज़ी से बढ़ती और निवेश के लिए भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में और मजबूत हुई है। दुनिया की बड़ी कंपनियां अब भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं,बल्कि भविष्य के वैश्विक उत्पादन और तकनीकी केंद्र के रूप में भी देखने लगी हैं।
भारत सरकार लंबे समय से ‘मेक इन इंडिया’,डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं के जरिए वैश्विक निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। अब इस यात्रा के बाद यह संकेत और मजबूत हुआ है कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन सकता है। आने वाले समय में इन निवेश योजनाओं का असर रोजगार,तकनीकी विकास और देश की आर्थिक वृद्धि पर भी दिखाई देने की उम्मीद है।
