ट्रंप और शी जिनपिंग (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

चीन-रूस रिश्तों को नई मजबूती,शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की वार्ता में रणनीतिक साझेदारी पर बड़ा जोर

बीजिंग,21 मई (युआईटीवी)- चीन की राजधानी पेइचिंग में गुरुवार को वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद अहम मुलाकात देखने को मिली,जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ जन वृहद भवन में विस्तृत वार्ता की। दोनों नेताओं ने चीन और रूस के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने तथा दीर्घकालिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई दिशा देने पर सहमति जताई। इस उच्चस्तरीय बैठक को ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है,जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन चीन की राजकीय यात्रा पर पेइचिंग पहुँचे थे,जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया। वार्ता से पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जन वृहद भवन के पूर्वी द्वार चौक पर उनके सम्मान में एक औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया और इसके बाद लघु स्तर तथा वृहत स्तर की वार्ताएँ शुरू हुईं। इस दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहे।

वार्ता के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि यह वर्ष चीन और रूस के संबंधों के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि इस साल चीन-रूस रणनीतिक सहयोग साझेदारी की स्थापना की 30वीं वर्षगांठ और दोनों देशों के बीच अच्छे पड़ोसी और मैत्रीपूर्ण सहयोग संधि पर हस्ताक्षर की 25वीं वर्षगांठ है। उन्होंने कहा कि इस संधि ने दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक मित्रता और व्यापक रणनीतिक सहयोग के लिए मजबूत कानूनी और राजनीतिक आधार तैयार किया,जिसकी वजह से चीन और रूस के संबंध अभूतपूर्व ऊँचाइयों तक पहुँचे हैं।

शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि चीन और रूस समानता,पारस्परिक सम्मान,आपसी विश्वास और साझा लाभ के सिद्धांतों पर आधारित सहयोग को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास पहले की तुलना में और मजबूत हुआ है। साथ ही व्यापार,निवेश,ऊर्जा,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी,संस्कृति और क्षेत्रीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रगति हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध और सामाजिक जुड़ाव पहले से अधिक मजबूत हुए हैं।

चीनी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि चीन और रूस केवल पारंपरिक साझेदार नहीं हैं,बल्कि वे एक नए युग की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आकार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों का सहयोग अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता और संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है।

वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी चीन के साथ बढ़ते संबंधों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संयुक्त प्रयासों की वजह से रूस-चीन संबंध इतिहास के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच चुके हैं। पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद लगातार बढ़ रहा है और पारस्परिक विश्वास बेहद मजबूत हुआ है।

पुतिन ने कहा कि रूस और चीन के बीच व्यापार में लगातार वृद्धि हो रही है और ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देश एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने परिवहन,रसद,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और औद्योगिक सहयोग को दोनों देशों के संबंधों का मजबूत आधार बताया। रूसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सांस्कृतिक और शैक्षिक सहयोग में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

उन्होंने जानकारी दी कि सफल ‘रूस-चीन संस्कृति वर्ष’ के बाद अब दोनों देश ‘रूस-चीन शिक्षा वर्ष’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के छात्रों,शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी। रूस और चीन पिछले कुछ वर्षों से शिक्षा और तकनीकी शोध के क्षेत्र में भी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं।

इस उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों नेताओं ने केवल द्विपक्षीय मुद्दों पर ही चर्चा नहीं की,बल्कि मध्य पूर्व की स्थिति समेत कई प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विषयों पर भी विचार-विमर्श किया। वैश्विक राजनीति में जारी तनाव,पश्चिमी देशों के साथ संबंधों और बदलती अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच गहन चर्चा हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और रूस लगातार ऐसी वैश्विक व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं,जिसमें किसी एक शक्ति का प्रभुत्व न हो और सभी देशों को बराबरी का महत्व मिले। इसी दिशा में दोनों देशों ने बहुध्रुवीय दुनिया और नए प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का समर्थन करते हुए एक संयुक्त बयान भी जारी किया।

वार्ता के बाद दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने ‘व्यापक रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने और अच्छे पड़ोसी तथा मैत्रीपूर्ण सहयोग को गहरा करने पर चीन और रूस के बीच संयुक्त वक्तव्य’ पर हस्ताक्षर किए। इस संयुक्त बयान को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसमें आर्थिक,तकनीकी,राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को और विस्तार देने की प्रतिबद्धता दिखाई गई है।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था,व्यापार,शिक्षा,विज्ञान और प्रौद्योगिकी समेत कई क्षेत्रों में कुल 20 सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाना,तकनीकी सहयोग को मजबूत करना और साझा विकास को नई दिशा देना बताया गया है।

चीन और रूस के बीच बढ़ती निकटता को वैश्विक राजनीति के संदर्भ में भी काफी अहम माना जा रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बीच चीन रूस का सबसे बड़ा आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है। वहीं चीन भी अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच रूस के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार दोनों देशों की यह साझेदारी केवल आर्थिक हितों तक सीमित नहीं है,बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाली रणनीतिक साझेदारी बन चुकी है। ऊर्जा,रक्षा,तकनीक और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सहयोग के जरिए चीन और रूस दुनिया की मौजूदा व्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने पत्रकारों से भी मुलाकात की और संबंधों को भविष्य में और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान दोनों पक्षों ने यह संकेत भी दिया कि आने वाले समय में चीन और रूस के बीच सहयोग के नए आयाम खुल सकते हैं।

पेइचिंग में हुई यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है,जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक बदलावों से गुजर रही है। ऐसे में चीन और रूस की बढ़ती नजदीकियों को वैश्विक राजनीति में एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। यह यात्रा और वार्ता आने वाले वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और शक्ति संतुलन पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।