वॉशिंगटन,4 जून (युआईटीवी)- ईरान को लेकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उन खबरों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है,जिनमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने अमेरिका को एक संदेश भेजकर चेतावनी दी थी कि यदि मौजूदा संघर्ष और अधिक बढ़ता है तो ईरान अपनी परमाणु क्षमता का प्रदर्शन कर सकता है। रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन को इस प्रकार का कोई संदेश प्राप्त नहीं हुआ है और न ही उन्हें ऐसी किसी आधिकारिक सूचना की जानकारी है।
यह मुद्दा उस समय चर्चा में आया,जब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति की सुनवाई के दौरान सांसदों ने ईरान,परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान प्रतिनिधि स्कॉट पेरी ने विदेश मंत्री से सीधे सवाल किया कि क्या पाकिस्तान की ओर से अमेरिका को कोई ऐसा संदेश भेजा गया था,जिसमें ईरान द्वारा परमाणु क्षमता प्रदर्शित करने की संभावित चेतावनी दी गई हो।
स्कॉट पेरी ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं,जिनमें दावा किया गया है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अमेरिका को यह संदेश पहुँचाया था कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा कदम उठा सकता है। उन्होंने विदेश मंत्री से पूछा कि क्या उन्हें व्यक्तिगत रूप से ऐसा कोई संदेश प्राप्त हुआ था या इस संबंध में प्रशासन को कोई आधिकारिक जानकारी दी गई थी।
इस सवाल के जवाब में मार्को रुबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं देखी है और उन्हें किसी भी प्रकार के ऐसे संदेश की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह का कोई संदेश वास्तव में भेजा गया होता,तो विदेश मंत्री होने के नाते उन्हें इसकी जानकारी अवश्य होती। उनके बयान ने उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की,जो हाल के दिनों में मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक चर्चाओं के कारण तेज हो गई थीं।
जब स्कॉट पेरी ने दोबारा इस विषय को उठाते हुए मीडिया में प्रकाशित खबरों का हवाला दिया,तब भी रुबियो अपने रुख पर कायम रहे। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में ऐसा कोई संदेश भेजा गया होता तो यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक सूचना होती और उन्हें इसके बारे में अवश्य अवगत कराया जाता। उन्होंने दोहराया कि उनके पास ऐसी किसी सूचना का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है,जब अमेरिका और ईरान के बीच संबंध एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। पिछले कई महीनों से दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। क्षेत्रीय संघर्षों, प्रतिबंधों और सैन्य गतिविधियों के कारण हालात संवेदनशील बने हुए हैं। इसी बीच अमेरिका एक नए कूटनीतिक समझौते की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है,जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं तय करना और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।
सुनवाई के दौरान बातचीत केवल पाकिस्तान से जुड़े कथित संदेश तक सीमित नहीं रही। सांसदों ने यह भी जानना चाहा कि यदि कूटनीतिक प्रयास असफल हो जाते हैं और ईरान परमाणु क्षमता के प्रदर्शन या परीक्षण की दिशा में आगे बढ़ने की धमकी देता है,तो अमेरिकी प्रशासन की रणनीति क्या होगी। इस सवाल का जवाब देते हुए मार्को रुबियो ने कहा कि ऐसी कोई भी कार्रवाई उन आशंकाओं को सही साबित करेगी,जो लंबे समय से ईरान के परमाणु इरादों को लेकर व्यक्त की जाती रही हैं।
उन्होंने कहा कि यदि ईरान वास्तव में इस तरह का कदम उठाता है,तो यह इस बात का संकेत होगा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ निराधार नहीं थीं। उनके अनुसार ऐसी स्थिति वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकती है और इससे क्षेत्रीय तनाव में और वृद्धि होने की संभावना रहेगी।
रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि यदि कूटनीतिक प्रक्रिया विफल होती है और ईरान आक्रामक रुख अपनाता है,तो अमेरिकी राष्ट्रपति को अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है। हालाँकि,उन्होंने किसी विशेष कदम का उल्लेख नहीं किया,लेकिन इतना जरूर कहा कि ऐसी परिस्थिति में उपलब्ध सभी विकल्पों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाएगा। उनके बयान को अमेरिका की संभावित रणनीतिक तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से वैश्विक राजनीति का संवेदनशील मुद्दा रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप रहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक सीमित नहीं है,जबकि ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका कार्यक्रम ऊर्जा उत्पादन और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
हाल के वर्षों में कई बार ऐसे अवसर आए जब दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ती दिखाई दी,लेकिन विभिन्न राजनीतिक और सुरक्षा कारणों से समझौते की दिशा में ठोस प्रगति नहीं हो सकी। यही वजह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी हर नई खबर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बन जाती है।
पाकिस्तान से जुड़े कथित संदेश को लेकर सामने आई खबरों ने भी इसी कारण ध्यान आकर्षित किया था। यदि ऐसा कोई संदेश वास्तव में भेजा गया होता,तो उसका असर क्षेत्रीय कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता था। हालाँकि,अमेरिकी विदेश मंत्री के ताजा बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके पास ऐसी किसी आधिकारिक सूचना की पुष्टि नहीं है।
विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका की प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान तलाशना है,लेकिन साथ ही वह संभावित सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संकेत भी देता रहा है। कांग्रेस में हुई यह चर्चा इस बात को दर्शाती है कि ईरान से जुड़ा मुद्दा अमेरिकी राजनीति और विदेश नीति दोनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
फिलहाल मार्को रुबियो के बयान के बाद पाकिस्तान द्वारा कथित रूप से भेजे गए संदेश की खबरों पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं,ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उससे जुड़े कूटनीतिक प्रयासों पर दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में अमेरिका,ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच होने वाले घटनाक्रम वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
