गंगटोक,21 जुलाई (युआईटीवी)- सिक्किम के दक्षिणी जिले में निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग के भीतर हुए भूस्खलन और उसके बाद मीथेन गैस के रिसाव ने एक बड़े हादसे का रूप ले लिया है। इस दुर्घटना में करीब 27 लोगों के सुरंग के भीतर फँसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और जिला प्रशासन ने तत्काल राष्ट्रीय आपदा मोचन बल,राज्य आपदा मोचन बल,सिक्किम पुलिस तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की टीमों को राहत एवं बचाव कार्य में लगा दिया। हालांकि सुरंग के भीतर अत्यधिक मात्रा में मौजूद मीथेन गैस के कारण बचाव अभियान बेहद कठिन और जोखिमपूर्ण बना हुआ है। बचाव दल लगातार फँसे हुए लोगों तक पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं,लेकिन विषैली गैस और अवरुद्ध रास्ते अभियान की सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार यह हादसा सोमवार दोपहर लगभग 3 बजकर 9 मिनट पर ममरिंग क्षेत्र में स्थित निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग के भीतर हुआ। यह सुरंग तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है,जिसका निर्माण पटेल इंजीनियरिंग द्वारा किया जा रहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार सुरंग के भीतर अचानक भूस्खलन हुआ,जिससे बड़ी मात्रा में मलबा गिर गया और सुरंग का एक हिस्सा अवरुद्ध हो गया। इसी दौरान कई मजदूर और कर्मचारी अंदर ही फँस गए। हादसे के कुछ ही समय बाद सुरंग के भीतर मीथेन गैस का रिसाव भी शुरू हो गया,जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।
मीथेन गैस का उच्च स्तर राहत एवं बचाव कार्य के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है। अधिकारियों के अनुसार गैस की मात्रा इतनी अधिक है कि बिना विशेष सुरक्षा उपकरणों के सुरंग के भीतर प्रवेश करना जीवन के लिए बेहद खतरनाक है। प्रारंभिक प्रयासों के दौरान अग्निशमन विभाग और पुलिस के जवानों ने साहस दिखाते हुए दो बार सुरंग के भीतर प्रवेश करने की कोशिश की,लेकिन अंदर की विषाक्त परिस्थितियों के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। इस दौरान फँसे लोगों तक पहुँचना संभव नहीं हो सका।
नमची जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि जैसे ही हादसे की सूचना मिली,प्रशासन ने तत्काल सिलिगुड़ी और पाक्योंग में तैनात राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमों के साथ-साथ राज्य आपदा मोचन बल को भी अलर्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता शुरुआत से ही बचाव अभियान को तेज गति से शुरू करना था। घटना की सूचना मिलते ही संबंधित सभी एजेंसियों को सक्रिय कर दिया गया और राहत दल तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।
जिला कलेक्टर ने बताया कि सुरंग के भीतर मौजूद मीथेन गैस के कारण बचाव कार्य सामान्य तरीके से नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पहली राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीम ने सबसे पहले उन अग्निशमन कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला जो प्रारंभिक बचाव प्रयास के दौरान अंदर चले गए थे। इसके बाद दूसरी विशेष टीम सुरंग के भीतर प्रवेश कर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। हालाँकि,अब तक बचाव दल उस स्थान तक नहीं पहुँच पाए हैं,जहाँ मजदूरों के फँसे होने की आशंका जताई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार सुरंग के भीतर ऑक्सीजन की स्थिति,गैस की मात्रा और मलबे की स्थिति का लगातार आकलन किया जा रहा है। बचाव दल विशेष गैस मॉनिटरिंग उपकरणों और सुरक्षा संसाधनों की मदद से धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। हालाँकि,गैस का स्तर लगातार ऊँचा बने रहने के कारण अभियान में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। कई बार बचावकर्मियों को कुछ दूरी तक पहुँचने के बाद सुरक्षा कारणों से वापस लौटना पड़ा है।
हादसे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भूस्खलन किस वजह से हुआ,इसकी जाँच की जाएगी। प्रारंभिक स्तर पर माना जा रहा है कि सुरंग के भीतर अचानक चट्टानों के खिसकने से यह दुर्घटना हुई। वहीं सुरंग से बाहर निकलने में सफल कुछ मजदूरों ने प्रशासन को बताया कि हादसे से ठीक पहले उन्होंने अंदर से विस्फोट जैसी तेज आवाज सुनी थी। इसके बाद वहाँ अफरा-तफरी मच गई और जो लोग बाहर निकल सकते थे,वे तत्काल सुरंग से बाहर भाग आए। हालाँकि,कई अन्य कर्मचारी और मजदूर मलबे तथा गैस के कारण बाहर नहीं निकल सके।
फँसे हुए लोगों की संख्या को लेकर भी प्रशासन अभी अंतिम पुष्टि नहीं कर पाया है। जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगभग 19 मजदूर सुरंग के भीतर मौजूद थे। हादसे के बाद राहत कार्य के लिए पटेल इंजीनियरिंग के तीन कर्मचारी अंदर गए,लेकिन उनमें से दो भी वापस नहीं लौट सके और उनके भी भीतर फँसे होने की आशंका है। इस प्रकार कंपनी से जुड़े कुल 21 लोगों के अंदर होने की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा राष्ट्रीय जलविद्युत निगम के छह कर्मचारियों के भी सुरंग के भीतर मौजूद होने की जानकारी सामने आई है। इन आँकड़ों के आधार पर कुल 27 लोगों के फँसे होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालाँकि,प्रशासन का कहना है कि यह संख्या अंतिम नहीं है। वास्तविक संख्या इससे कम या अधिक हो सकती है,क्योंकि सुरंग के भीतर मौजूद सभी कर्मचारियों का सटीक रिकॉर्ड अभी एकत्र किया जा रहा है। जब तक बचाव दल अंदर पहुँचकर स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन नहीं कर लेते,तब तक किसी भी संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती।
घटनास्थल पर प्रशासन,पुलिस,आपदा प्रबंधन एजेंसियों और परियोजना से जुड़े अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है। जिला प्रशासन ने परियोजना प्रबंधन से सुरंग का पूरा नक्शा,अंदर मौजूद कर्मचारियों की सूची तथा सुरक्षा संबंधी सभी तकनीकी जानकारी भी माँगी है,ताकि बचाव अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। विशेषज्ञों की टीम भी सुरंग के भीतर गैस के स्तर और संरचनात्मक स्थिति का अध्ययन कर रही है।
राहत एवं बचाव अभियान में आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। गैस डिटेक्टर,ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, सुरक्षात्मक पोशाक और संचार उपकरणों की सहायता से बचाव दल अंदर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बचाव अभियान में जल्दबाजी नहीं की जा सकती,क्योंकि इससे बचावकर्मियों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। इसलिए प्रत्येक कदम पूरी सावधानी और तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उठाया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने घटनास्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। केवल अधिकृत अधिकारियों और राहत एजेंसियों को ही सुरंग के निकट जाने की अनुमति दी गई है। साथ ही फँसे हुए लोगों के परिजनों को लगातार स्थिति की जानकारी दी जा रही है ताकि अफवाहों से बचा जा सके। प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
समारदुंग सुरंग तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है और इसके निर्माण का उद्देश्य क्षेत्र में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना है,लेकिन इस दुर्घटना ने निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों और जोखिम प्रबंधन को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियों का लगातार मूल्यांकन और गैस की निगरानी अत्यंत आवश्यक होती है।
फिलहाल जिला प्रशासन की पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंग के भीतर फँसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल,राज्य आपदा मोचन बल, पुलिस,अग्निशमन विभाग और अन्य विशेषज्ञ एजेंसियाँ लगातार अभियान में जुटी हुई हैं। पूरे राज्य की निगाहें इस बचाव अभियान पर टिकी हैं और सभी को उम्मीद है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद फँसे हुए लोगों तक जल्द पहुँचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा,जब तक सुरंग के भीतर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती और सभी को सुरक्षित निकालने का हर संभव प्रयास पूरा नहीं कर लिया जाता।
