होर्मुज जलडमरूमध्य (तस्वीर क्रेडिट@TheLallantop)

होर्मुज स्ट्रेट के पास टैंकर पर हमला,तीन भारतीय लापता; अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ने जताई गहरी चिंता

लंदन,11 जून (युआईटीवी)- होर्मुज स्ट्रेट के निकट एक वाणिज्यिक टैंकर पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। इस घटना के बाद तीन भारतीय चालक दल के सदस्य कथित तौर पर लापता बताए जा रहे हैं,जबकि शेष भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे समुद्री सुरक्षा,अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बताया है। संगठन ने घटना की निष्पक्ष,व्यापक और पारदर्शी जांच की मांग की है।

जानकारी के अनुसार,पलाऊ के झंडे वाले टैंकर एमटी सेटेबेलो पर ओमान के तट के पास हमला हुआ। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई,जिससे चालक दल के सदस्यों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया। प्रारंभिक रिपोर्टों में कहा गया कि जहाज को किसी प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया,जिसके कारण आग भड़क उठी और जहाज को भारी नुकसान पहुँचा। घटना ऐसे समय में हुई है,जब पश्चिम एशिया क्षेत्र पहले से ही बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिक जहाजों,नाविकों और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री यातायात को खतरे में डालने वाली गतिविधियाँ स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। उन्होंने कहा कि समुद्र में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार के हमले से न केवल मानव जीवन खतरे में पड़ता है, बल्कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता भी प्रभावित होती है।

डोमिंग्वेज ने यह भी कहा कि समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ है। ऐसे में जहाजों को निशाना बनाने वाली घटनाएँ पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और समुद्र में जीवन की सुरक्षा से जुड़े नियमों का हर परिस्थिति में सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने संबंधित पक्षों से संयम बरतने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, इस वर्ष 28 फरवरी से लेकर अब तक होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग से जुड़े कम से कम 43 हमलों की पुष्टि हो चुकी है। यह आँकड़ा इस महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में लगातार बढ़ते खतरे को दर्शाता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है,जहाँ से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में तेल और अन्य वस्तुओं का परिवहन होता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।

घटना के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी एक बयान जारी किया। उसके अनुसार अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में स्थित टैंकर को मंगलवार देर रात निष्क्रिय कर दिया था। सेंट्रल कमांड का दावा है कि जहाज के चालक दल ने अमेरिकी सेना के निर्देशों का कई बार पालन करने से इनकार किया था,जिसके बाद सैन्य कार्रवाई की गई। बयान में कहा गया कि अमेरिकी सैन्य विमान ने जहाज के इंजन रूम को लक्ष्य बनाकर सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया,जिससे जहाज को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

अमेरिकी पक्ष के इस दावे ने घटना को और जटिल बना दिया है। फिलहाल विभिन्न एजेंसियाँ और संबंधित देश इस पूरे घटनाक्रम की जाँच कर रहे हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले की वास्तविक परिस्थितियाँ क्या थीं और घटनाओं का क्रम किस प्रकार विकसित हुआ। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ने स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच की माँग की है,ताकि तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

इस बीच भारत ने भी इस हमले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय के अनुसार जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। इनमें से 21 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है,जबकि तीन भारतीय अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ओमान स्थित भारतीय दूतावास पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और स्थानीय अधिकारियों के साथ निकट समन्वय में काम कर रहा है। लापता भारतीयों की तलाश के लिए खोज एवं बचाव अभियान जारी है और भारतीय अधिकारी हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि चल रहे अभियान के माध्यम से लापता नाविकों का जल्द पता लगाया जा सकेगा।

भारत ने इस घटना को क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संघर्षों का प्रत्यक्ष परिणाम बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता का असर अब समुद्री व्यापार और नागरिक जहाजों पर भी दिखाई देने लगा है,जो बेहद चिंताजनक है। मंत्रालय ने दोहराया कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए तत्काल तनाव कम करना आवश्यक है।

भारत ने सभी पक्षों से कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है। बयान में कहा गया कि संवाद और बातचीत ही क्षेत्रीय संकटों का स्थायी समाधान प्रदान कर सकते हैं। मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढाँचे को किसी भी परिस्थिति में निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे हमले न केवल मानव जीवन को खतरे में डालते हैं,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पूरी दुनिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यदि इस क्षेत्र में हमलों और सैन्य गतिविधियों का सिलसिला जारी रहता है,तो ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति में बाधा और व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ सकती है। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय लंबे समय से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर देता रहा है।

वर्तमान घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि समुद्री सुरक्षा केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं,बल्कि वैश्विक चिंता का विषय है। टैंकर पर हमला,चालक दल के सदस्यों का लापता होना और विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाएँ इस बात को रेखांकित करती हैं कि समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें खोज एवं बचाव अभियान,जाँच प्रक्रिया और क्षेत्र में जारी कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं।

जब तक लापता नाविकों का पता नहीं चल जाता और हमले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आती,तब तक यह घटना अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण चिंताओं में बनी रहेगी। वहीं भारत सहित कई देश उम्मीद कर रहे हैं कि क्षेत्र में तनाव कम होगा,समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप स्वतंत्र तथा निर्बाध व्यापारिक आवाजाही जल्द बहाल हो सकेगी।