वॉशिंगटन,11 जून (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर उत्तरी अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों में से एक,अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (यूएसएमसीए) के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि जब यह समझौता समीक्षा के लिए आएगा,तब यह निश्चित नहीं है कि उनकी सरकार इसे आगे भी जारी रखने का समर्थन करेगी या नहीं। ट्रंप के इस बयान ने व्यापार जगत,उद्योगों और निवेशकों के बीच नई चिंताएं पैदा कर दी हैं,क्योंकि अमेरिका,कनाडा और मेक्सिको की अर्थव्यवस्थाएँ इस समझौते के माध्यम से एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
व्हाइट हाउस में ‘सिक्योर अमेरिका एक्ट’ पर हस्ताक्षर करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यूएसएमसीए का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसके व्यापारिक नियम नहीं हैं,बल्कि यह है कि इसमें समय-समय पर समीक्षा का प्रावधान रखा गया है। उनके अनुसार,यह व्यवस्था अमेरिका को यह अधिकार देती है कि वह भविष्य में समझौते का पुनर्मूल्यांकन कर सके और आवश्यकता पड़ने पर इससे बाहर निकलने का फैसला भी ले सके।
जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या वह अपने वर्तमान कार्यकाल के दौरान यूएसएमसीए को नवीनीकृत करेंगे,तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया। ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं पता कि मैं इसे रिन्यू करूँगा या नहीं।” उनके इस संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण बयान ने यह संकेत दिया कि उनकी सरकार समझौते के भविष्य को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से उत्तरी अमेरिका की व्यापार व्यवस्था को लेकर आलोचनात्मक रुख रखते आए हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने पुराने नॉर्थ अमेरिकन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एनएएफटीए को अमेरिका के लिए नुकसानदेह बताया था। उसी आलोचना के आधार पर उन्होंने कनाडा और मेक्सिको के साथ नई बातचीत शुरू की थी,जिसके परिणामस्वरूप यूएसएमसीए अस्तित्व में आया। वर्ष 2020 में लागू हुआ यह समझौता ट्रंप प्रशासन की प्रमुख आर्थिक उपलब्धियों में गिना जाता है।
हालिया बयान में भी ट्रंप ने एनएएफटीए की आलोचना दोहराई। उन्होंने कहा कि वह समझौता अमेरिका के लिए एक बड़ी आर्थिक आपदा साबित हुआ था। उनके अनुसार,एनएएफटीए ने अमेरिकी उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र को नुकसान पहुँचाया तथा कई नौकरियाँ देश से बाहर चली गईं। ट्रंप का कहना है कि यूएसएमसीए ने इन कमियों को दूर करने की कोशिश की और व्यापारिक संबंधों को अधिक संतुलित बनाने का प्रयास किया।
हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूएसएमसीए की सबसे बड़ी विशेषता उसके व्यापारिक प्रावधान नहीं,बल्कि उसका समीक्षा तंत्र है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस समझौते में सबसे अधिक पसंद यही बात आई थी कि छह साल बाद इसे दोबारा समीक्षा और नवीनीकरण के लिए लाया जाता है। उनके अनुसार,यह व्यवस्था अमेरिका को बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार अपने हितों की रक्षा करने का अवसर प्रदान करती है।
राष्ट्रपति ने कनाडा और मेक्सिको के साथ अमेरिका के आर्थिक संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका दोनों पड़ोसी देशों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत आर्थिक स्थिति में है और उसे बातचीत के दौरान इस ताकत का उपयोग करना चाहिए। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका को कनाडा और मेक्सिको से उतनी आवश्यकता नहीं है,जितनी इन देशों को अमेरिकी बाजार की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अमेरिका के साथ बेहतर व्यवहार करना चाहिए और व्यापारिक संबंधों में अधिक संतुलन दिखाना चाहिए।
ट्रंप ने व्यापार घाटे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को मेक्सिको और कनाडा के साथ व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है,जबकि उनकी राय में अमेरिका को इन देशों के साथ व्यापारिक लाभ की स्थिति में होना चाहिए। राष्ट्रपति का मानना है कि यदि व्यापारिक समझौते वास्तव में अमेरिकी हितों की रक्षा करते हैं,तो अमेरिका को अधिक आर्थिक फायदा मिलना चाहिए।
हालाँकि,ट्रंप ने अभी तक यूएसएमसीए की औपचारिक समीक्षा शुरू करने या समझौते से बाहर निकलने की कोई प्रक्रिया घोषित नहीं की है,लेकिन उनके बयान ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। तीनों देशों के बीच व्यापार करने वाली कंपनियाँ और निवेशक इस समझौते को क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता की आधारशिला मानते हैं। ऐसे में यदि इसके भविष्य को लेकर सवाल खड़े होते हैं,तो इसका असर निवेश योजनाओं,उत्पादन रणनीतियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कई वर्षों में अमेरिका,कनाडा और मेक्सिको के बीच विनिर्माण और व्यापारिक गतिविधियाँ काफी हद तक एकीकृत हो चुकी हैं। ऑटोमोबाइल उद्योग इसका सबसे बड़ा उदाहरण है,जहाँ एक वाहन के विभिन्न हिस्से तीनों देशों में तैयार होकर अंतिम उत्पाद का रूप लेते हैं। इसी तरह कृषि,ऊर्जा,तकनीक और उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र भी इस समझौते से गहराई से प्रभावित होते हैं। इसलिए यूएसएमसीए में किसी भी प्रकार का बदलाव व्यापक आर्थिक प्रभाव पैदा कर सकता है।
यूएसएमसीए को लागू करने का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक नियमों को आधुनिक बनाना था। इसमें डिजिटल व्यापार,बौद्धिक संपदा अधिकार,श्रम मानकों और पर्यावरणीय प्रावधानों से जुड़े नए नियम शामिल किए गए थे। इसके अलावा यह समझौता बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुरूप व्यापार को अधिक प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
इस समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी समीक्षा व्यवस्था है। निर्धारित समय पर सदस्य देशों को इसके कामकाज का मूल्यांकन करने और आवश्यकता पड़ने पर बदलाव करने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि ट्रंप इस व्यवस्था को समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हैं। उनका मानना है कि किसी भी व्यापार समझौते को स्थायी और अपरिवर्तनीय नहीं होना चाहिए,बल्कि उसे समय-समय पर राष्ट्रीय हितों के आधार पर परखा जाना चाहिए।
फिलहाल ट्रंप के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यूएसएमसीए का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। हालाँकि,कोई आधिकारिक निर्णय अभी सामने नहीं आया है,लेकिन राष्ट्रपति की टिप्पणियों ने इस महत्वपूर्ण व्यापार समझौते को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका की सरकार समीक्षा प्रक्रिया के दौरान किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या यूएसएमसीए उत्तरी अमेरिका की आर्थिक साझेदारी का आधार बना रहेगा या फिर इसमें बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
