मणिपुर में 28 दिन बाद मिले छह लापता नागा लोगों के शव,समुदाय में शोक और आक्रोश (तस्वीर क्रेडिट@manipur_army)

मणिपुर में 28 दिन बाद मिले छह लापता नागा लोगों के शव,समुदाय में शोक और आक्रोश

इंफाल, 11 जून (युआईटीवी)- मणिपुर में पिछले महीने कथित अपहरण के बाद लापता हुए नागा समुदाय के छह लोगों के शव बरामद होने से पूरे क्षेत्र में शोक,आक्रोश और चिंता का माहौल है। लगभग 28 दिनों तक चले इंतजार के बाद शवों के मिलने की खबर ने पीड़ित परिवारों को गहरा सदमा पहुँचाया है। शवों को इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान के शवगृह में रखा गया है,जहाँ उनकी पहचान और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी की जा रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर मणिपुर के संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सामुदायिक तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार,ये छह लोग 13 मई 2026 को लीलोन वैफेई गाँव से कथित तौर पर अपहरण के बाद लापता हो गए थे। उस समय क्षेत्र में कुकी और नागा समुदायों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी। इसी दौरान हिंसा की कई घटनाएँ सामने आई थीं,जिनमें तीन कुकी चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे। उसी घटनाक्रम के दौरान इन छह लोगों के भी कथित रूप से बंधक बनाए जाने की बात सामने आई थी। तब से उनके परिजन और समुदाय के लोग लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए थे।

शवों के बरामद होने के बाद नागा समुदाय में गहरा दुख फैल गया है। समुदाय के नेताओं ने कहा है कि सबसे पहले यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि बरामद शव वास्तव में उन्हीं छह लोगों के हैं जो पिछले महीने से लापता थे। लियांगमाई नागा काउंसिल मणिपुर के अध्यक्ष टिमोथी विजुनामाई ने कहा कि पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अभी सबसे महत्वपूर्ण कार्य शवों की स्थिति का आकलन करना और उनकी पहचान की पुष्टि करना है। उनके अनुसार,समुदाय इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रहा है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किया जाना चाहिए। विजुनामाई ने कहा कि यदि यह पुष्टि हो जाती है कि शव उन्हीं छह लोगों के हैं,तो उसके बाद पीड़ित परिवारों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समुदाय केवल शवों की बरामदगी से संतुष्ट नहीं है। उनके अनुसार,जिस तरह से पूरे मामले को सँभाला गया,उससे लोगों में गहरी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि शवों को इंफाल तक लाने में 28 दिन लग जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो स्थिति अलग हो सकती थी।

विजुनामाई ने सरकार की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि समुदाय अब यह देखना चाहता है कि आगे सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है। उन्होंने कहा कि केवल शवों की बरामदगी पर्याप्त नहीं है,बल्कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी जरूरी है। साथ ही उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच की माँग दोहराई।

दूसरी ओर,मणिपुर पुलिस का कहना है कि शवों की बरामदगी के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया था। पुलिस के अनुसार,मणिपुर पुलिस,केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और असम राइफल्स के लगभग 450 जवानों ने इस अभियान में हिस्सा लिया। अभियान के दौरान खोजी कुत्तों और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद भी ली गई। लगभग 24 घंटे तक लगातार चले संयुक्त अभियान के बाद छह शवों को बरामद किया गया।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार,प्रारंभिक जानकारी से संकेत मिलता है कि बरामद शव उन लोगों के हो सकते हैं,जिन्हें 13 मई को बंधक बनाया गया था। हालाँकि,अंतिम पुष्टि पहचान और फोरेंसिक जाँच पूरी होने के बाद ही की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जाँच के सभी पहलुओं पर काम किया जा रहा है और मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है,जब मणिपुर लंबे समय से विभिन्न समुदायों के बीच तनाव और हिंसा की घटनाओं से जूझ रहा है। राज्य के पहाड़ी इलाकों में समय-समय पर जातीय और सामुदायिक संघर्ष सामने आते रहे हैं,जिनका असर आम लोगों के जीवन पर भी पड़ता है। हाल के महीनों में कई इलाकों में तनाव बढ़ा है,जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चुनौतियाँ भी बढ़ गई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मणिपुर में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए केवल सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली,संवाद और राजनीतिक समाधान की दिशा में भी प्रयास आवश्यक हैं। लगातार होने वाली हिंसक घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि राज्य में सामाजिक और सामुदायिक संबंधों को मजबूत करने की जरूरत है।

इस मामले ने मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक समूहों का भी ध्यान आकर्षित किया है। कई संगठनों ने घटना की स्वतंत्र जाँच की माँग की है और कहा है कि लापता लोगों के परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।

फिलहाल सभी की निगाहें शवों की पहचान प्रक्रिया और जाँच के अगले चरण पर टिकी हैं। पीड़ित परिवार अपने प्रियजनों के बारे में अंतिम पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं,जबकि समुदाय न्याय और जवाबदेही की माँग कर रहा है। इस दुखद घटना ने मणिपुर के लोगों को एक बार फिर झकझोर दिया है और राज्य में शांति एवं सुरक्षा की आवश्यकता को पहले से अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

आने वाले दिनों में जाँच की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि इस संवेदनशील मामले में लोगों का भरोसा किस हद तक बहाल हो पाता है। फिलहाल छह लोगों की मौत की आशंका ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है और प्रभावित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।