मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय (तस्वीर क्रेडिट@Surendr0032083)

तमिलनाडु में 1 जुलाई से लागू होगी वीबी-जी राम जी योजना,बढ़े वित्तीय बोझ को लेकर सरकार चिंतित

चेन्नई,11 जून (युआईटीवी)- तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार की संशोधित ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन’ (वीबी-जी राम जी योजना) को आगामी 1 जुलाई से राज्य में लागू करने का फैसला किया है। हालाँकि,राज्य सरकार ने इस योजना के तहत निर्धारित नई वित्तीय व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएँ भी जाहिर की हैं। अधिकारियों का कहना है कि योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करना है,लेकिन इसके लिए राज्यों पर डाला गया अतिरिक्त वित्तीय बोझ भविष्य में गंभीर चुनौती बन सकता है।

राज्य सरकार के अनुसार,योजना को लागू करने का निर्णय ग्रामीण परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। तमिलनाडु लंबे समय से ग्रामीण रोजगार और आजीविका कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता रहा है। ऐसे में सरकार नहीं चाहती कि नई व्यवस्था के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की प्रक्रिया प्रभावित हो। इसी वजह से तमिलनाडु ने अपनी आपत्तियों के बावजूद योजना को लागू करने की सहमति दी है।

केंद्र सरकार द्वारा संशोधित योजना के तहत अब खर्च का वहन 60:40 के अनुपात में किया जाएगा। इसका अर्थ है कि कुल लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को वहन करना होगा। नई व्यवस्था के अंतर्गत केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के लिए 7,585.49 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। हालाँकि,राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था के कारण राज्य को अपने संसाधनों से बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी।

अधिकारियों के मुताबिक,चालू वित्तीय वर्ष के शेष नौ महीनों में योजना के प्रभावी संचालन के लिए तमिलनाडु सरकार को लगभग 3,034.19 करोड़ रुपये का योगदान देना होगा। यह राशि राज्य के बजट पर अतिरिक्त दबाव डालेगी। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इस योजना के कारण तमिलनाडु पर हर वर्ष 4,500 से 5,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। ऐसे समय में जब राज्य पहले से ही कई कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर भारी खर्च कर रहा है,यह अतिरिक्त दायित्व वित्तीय प्रबंधन को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि तमिलनाडु ने पिछले दो दशकों के दौरान ग्रामीण विकास और रोजगार कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राज्य ने लाखों ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी आय बढ़ाने और आजीविका को मजबूत करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। यही कारण है कि सरकार इस योजना को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है,ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति बनी रहे।

हालाँकि,अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि नई फंडिंग व्यवस्था पहले की तुलना में एक बड़ा बदलाव है। पूर्व में राज्य का वित्तीय योगदान अपेक्षाकृत कम था,जिससे योजनाओं के संचालन में अधिक लचीलापन बना रहता था,लेकिन अब 40 प्रतिशत लागत वहन करने की बाध्यता राज्य के लिए अतिरिक्त वित्तीय दबाव पैदा करेगी। उनका मानना है कि इस प्रकार की व्यवस्था विशेष रूप से उन राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है जो पहले से ही विभिन्न सामाजिक और विकास योजनाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च कर रहे हैं।

तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष इस विषय पर अपनी चिंताओं को पहले भी रखा था। राज्य का कहना है कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं की वित्तीय संरचना में किए गए बदलावों का राज्यों की वित्तीय स्थिति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। सरकार का तर्क है कि यदि राज्यों पर लगातार अधिक आर्थिक जिम्मेदारी डाली जाती है,तो इससे अन्य विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर असर पड़ सकता है।

वित्तीय पहलुओं के अलावा तमिलनाडु सरकार ने योजना के कुछ संचालन संबंधी प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। अधिकारियों के अनुसार,कुछ जिलों में 60 दिनों तक रोजगार संबंधी गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रावधान व्यवहारिक दृष्टि से समस्याएँ पैदा कर सकता है। उनका मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सीमित हो सकते हैं और आजीविका पर निर्भर परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

राज्य सरकार का कहना है कि तमिलनाडु के कई जिलों में कृषि गतिविधियों का स्वरूप राष्ट्रीय औसत से अलग है। यहाँ की फसल चक्र प्रणाली और मौसमी रोजगार की जरूरतें विशिष्ट हैं। ऐसे में यदि रोजगार गतिविधियों पर लंबे समय तक रोक लगाई जाती है,तो इसका प्रतिकूल प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अधिक लचीला दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

इसके बावजूद राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। इसी कारण प्रशासनिक स्तर पर योजना को लागू करने की तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि 1 जुलाई से योजना का संचालन बिना किसी बाधा के शुरू किया जा सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नई व्यवस्था के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करें और लाभार्थियों तक योजना का लाभ समय पर पहुँचाए।

सरकार का मानना है कि ग्रामीण रोजगार और आजीविका कार्यक्रम केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं हैं,बल्कि ये ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर बनाने और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण साधन भी हैं। इसलिए वित्तीय चुनौतियों के बावजूद योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई वित्तीय व्यवस्था के तहत राज्य सरकार किस प्रकार अपने संसाधनों का प्रबंधन करती है और योजना के उद्देश्यों को पूरा करने में कितनी सफल रहती है। यदि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय बना रहता है,तो यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

फिलहाल तमिलनाडु सरकार ने संकेत दिया है कि वह नई व्यवस्था के अनुरूप खुद को ढालते हुए भी ग्रामीण परिवारों के कल्याण और रोजगार सृजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बरकरार रखेगी। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय दबाव के बावजूद ग्रामीण विकास की गति प्रभावित न हो और जरूरतमंद परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के पर्याप्त अवसर मिलते रहें।