नीट यूजी 2026 पुनर्परीक्षा में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा (तस्वीर क्रेडिट@sanjoychakra)

नीट यूजी 2026 पुनर्परीक्षा में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, लखीसराय से 30 गिरफ्तार; डमी अभ्यर्थियों,मेडिकल छात्रों और बायोमेट्रिक कर्मचारियों पर शिकंजा

पटना/लखीसराय/नालंदा,23 जून (युआईटीवी)- राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा के दौरान बिहार के लखीसराय जिले से सामने आया कथित फर्जीवाड़ा देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस और जाँच एजेंसियों की कार्रवाई में अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें डमी परीक्षार्थी,मूल अभ्यर्थी,कथित नेटवर्क संचालक, मडिकल छात्र और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। जाँच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा में दूसरे व्यक्ति को बैठाकर सफलता दिलाने के लिए लाखों रुपये के सौदे किए जा रहे थे और इस पूरे नेटवर्क के तार कई जिलों तथा संभवतः अन्य राज्यों तक फैले हो सकते हैं।

पुलिस के अनुसार मामला उस समय सामने आया जब पुनर्परीक्षा के दौरान कुछ परीक्षा केंद्रों पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन ने कई केंद्रों पर निगरानी बढ़ा दी। जाँच के दौरान लखीसराय जिले के तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से नौ ऐसे लोगों को पकड़ा गया,जिन पर आरोप है कि वे वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुँचे थे। प्रारंभिक जाँच में पता चला कि इन लोगों की पहचान और दस्तावेज वास्तविक उम्मीदवारों से मेल नहीं खा रहे थे,जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।

बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए नौ डमी अभ्यर्थियों के अलावा एक मूल अभ्यर्थी को भी पकड़ा गया है,जिसने कथित रूप से अपनी जगह किसी अन्य व्यक्ति को परीक्षा में बैठाने की साजिश रची थी। जाँच में यह भी सामने आया कि यह कोई अकेली घटना नहीं थी,बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था,जो अभ्यर्थियों और तथाकथित सॉल्वरों के बीच संपर्क स्थापित कर रहा था।

मामले में सबसे अहम गिरफ्तारी गया मेडिकल कॉलेज के छात्र अर्पित राज की मानी जा रही है। जाँच एजेंसियों का दावा है कि वह इस पूरे नेटवर्क का कथित संचालक और समन्वयक था। आरोप है कि वह ऐसे लोगों की व्यवस्था करता था,जो परीक्षा में दूसरे अभ्यर्थियों की जगह बैठ सकें। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों तक पहुँच,पहचान संबंधी व्यवस्थाएँ और अन्य जरूरी समन्वय भी उसके माध्यम से किया जाता था। पुलिस का मानना है कि अर्पित राज इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी था और उसकी गिरफ्तारी से कई नए खुलासे हो सकते हैं।

जाँच को और गंभीर तब माना गया,जब बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में भी अनियमितताओं के संकेत मिले। नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन को सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है,ताकि किसी अन्य व्यक्ति के परीक्षा में बैठने की संभावना समाप्त हो सके,लेकिन इस मामले में बायोमेट्रिक प्रक्रिया से जुड़े 18 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन कर्मचारियों की भूमिका केवल लापरवाही तक सीमित थी या उन्होंने जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर कथित फर्जी नेटवर्क को मदद पहुँचाई।

अधिकारियों का कहना है कि यदि बायोमेट्रिक प्रणाली में किसी स्तर पर समझौता किया गया है,तो यह बेहद गंभीर मामला है क्योंकि इससे परीक्षा की पूरी सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। जाँच टीम कर्मचारियों के मोबाइल फोन,कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है,ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें किसी प्रकार का आर्थिक लाभ तो नहीं पहुँचाया गया था।

पुलिस जाँच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के माध्यम से अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली जा रही थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कुछ मामलों में 10 से 12 लाख रुपये तक के सौदे हुए,जबकि कुछ उम्मीदवारों से 30 से 40 लाख रुपये तक की डील किए जाने की बात सामने आई है। हालाँकि,पुलिस का कहना है कि रकम से जुड़ी सभी जानकारियों का सत्यापन अभी जारी है और जाँच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

जाँच का दायरा तब और बढ़ गया,जब इसमें विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के छात्रों के नाम सामने आने लगे। नालंदा जिले स्थित विम्स पावापुरी मेडिकल कॉलेज के 2022 बैच के छात्र रविशंकर कुमार का नाम भी जाँच में उभरकर सामने आया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जानकारी के अनुसार वह पुनर्परीक्षा से एक दिन पहले हॉस्टल से निकल गया था और बाद में जब जाँच एजेंसियाँ उसके कमरे तक पहुँचीं,तो वह वहाँ मौजूद नहीं मिला।

कॉलेज प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सर्विल कुमारी ने बताया कि परीक्षा से पहले छात्रों को हॉस्टल नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद रविशंकर कुमार हॉस्टल से बाहर चला गया। प्रशासन ने उसके परिजनों को भी सूचना दे दी है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अब यह जाँच कर रही है कि उसकी भूमिका क्या थी और क्या वह सीधे तौर पर इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।

दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है,जब किसी मेडिकल कॉलेज के छात्रों के नाम परीक्षा फर्जीवाड़े में सामने आए हों। इससे पहले मार्च में आयोजित नीट यूजी परीक्षा के दौरान कटिहार में पकड़े गए कथित सॉल्वर गैंग मामले में भी पावापुरी मेडिकल कॉलेज से जुड़े कुछ छात्रों के नाम सामने आए थे। उस मामले ने भी परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। अब एक बार फिर उसी संस्थान से जुड़े छात्र का नाम सामने आने से जाँच एजेंसियाँ पुराने मामलों और वर्तमान घटनाक्रम के बीच संबंध तलाशने में जुट गई हैं।

पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं है। गिरफ्तार और संदिग्ध लोगों की पृष्ठभूमि खंगालने पर कई ऐसे संकेत मिले हैं,जो दूसरे राज्यों के मेडिकल संस्थानों से संभावित संबंधों की ओर इशारा करते हैं। इसी दिशा में जाँच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने कई मोबाइल फोन,इलेक्ट्रॉनिक उपकरण,दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। साइबर विशेषज्ञ इन उपकरणों की फॉरेंसिक जाँच कर रहे हैं,ताकि नेटवर्क की वास्तविक संरचना और उसके संचालन के तरीकों का पता लगाया जा सके।

कार्रवाई के दौरान राजकीय उच्च विद्यालय हसनपुर,केंद्रीय विद्यालय लखीसराय और अन्य परीक्षा केंद्रों से कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ लोग लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा कराने वाले गिरोहों के संपर्क में थे। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह नेटवर्क केवल नीट परीक्षा तक सीमित था या फिर अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सक्रिय रहा है।

मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में मयंक उपाध्याय का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। वह पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का छात्र बताया जा रहा है। जाँच एजेंसियों के अनुसार उसकी भूमिका अभ्यर्थियों और सॉल्वरों के बीच संपर्क स्थापित करने में थी। पुलिस का दावा है कि वह नेटवर्क के कई लोगों से लगातार संपर्क में था और परीक्षा से पहले तथा परीक्षा के दिन हुई गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी रखता है।

इसके अलावा पूनम कुमारी नामक महिला को भी गिरफ्तार किया गया है। उस पर बायोमेट्रिक और पहचान सत्यापन प्रक्रिया में गड़बड़ी करने का आरोप है।जाँचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या उसने किसी दबाव या लालच में आकर नियमों की अनदेखी की या वह पहले से ही नेटवर्क का हिस्सा थी।

एक अन्य गिरफ्तार आरोपी सौरभ एस है,जो रायबरेली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान का छात्र बताया जा रहा है। वहीं अमन अग्रवाल नामक छात्र,जो उत्तर प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है,उसे भी गिरफ्तार किया गया है। इन गिरफ्तारियों ने जाँच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे कुछ छात्रों का इस्तेमाल सॉल्वर के रूप में किया जा रहा था। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं,तो यह मेडिकल शिक्षा प्रणाली और प्रवेश प्रक्रिया दोनों के लिए गंभीर चुनौती होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मेडिकल सीटों की सीमित संख्या के कारण कुछ अभ्यर्थी गलत रास्तों का सहारा लेने लगते हैं। ऐसे में परीक्षा माफिया सक्रिय होकर आर्थिक लाभ के लिए प्रतिभाशाली छात्रों को सॉल्वर के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यह न केवल ईमानदार अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन है,बल्कि भविष्य की चिकित्सा व्यवस्था के लिए भी खतरा पैदा करता है।

फिलहाल पुलिस और अन्य जाँच एजेंसियाँ पूरे मामले की गहराई से जाँच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी कई महत्वपूर्ण कड़ियाँ सामने आनी बाकी हैं और कुछ अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। सभी परीक्षा केंद्रों के रिकॉर्ड,सीसीटीवी फुटेज, बायोमेट्रिक डेटा और संदिग्धों के डिजिटल संचार की जाँच की जा रही है।

पुलिस का स्पष्ट कहना है कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह अभ्यर्थी हो,सॉल्वर हो,मेडिकल छात्र हो या परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ा कोई कर्मचारी,सभी की भूमिका की निष्पक्ष जाँच की जाएगी। लखीसराय से सामने आया यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि देश की महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है,ताकि मेहनत और योग्यता के आधार पर सफलता पाने वाले लाखों छात्रों का विश्वास कायम रह सके। फिलहाल पूरे मामले पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं और जाँच के आगे बढ़ने के साथ कई और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।