ट्रंप ने तीन सैन्य वीरों को दिया ‘मेडल ऑफ ऑनर’ (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

ट्रंप ने तीन सैन्य वीरों को दिया ‘मेडल ऑफ ऑनर’,वियतनाम और अफगानिस्तान युद्ध की बहादुरी को मिला सर्वोच्च सम्मान

वाशिंगटन,19 जून (युआईटीवी)- अमेरिका अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ की तैयारियों में जुटा हुआ है और इसी ऐतिहासिक अवसर से पहले व्हाइट हाउस में आयोजित एक विशेष समारोह में देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘मेडल ऑफ ऑनर’ से तीन सैनिकों को सम्मानित किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वियतनाम युद्ध और अफगानिस्तान युद्ध में असाधारण साहस,नेतृत्व और बलिदान का परिचय देने वाले तीन सैन्य अधिकारियों को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। इनमें सेवानिवृत्त मरीन मेजर जेम्स कैपर्स जूनियर, सेवानिवृत्त आर्मी मेजर निकोलस डॉकरी और मरणोपरांत मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू. रिप्ले शामिल हैं।

व्हाइट हाउस में आयोजित समारोह के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने तीनों सैन्य अधिकारियों की वीरता का विस्तार से उल्लेख किया और कहा कि अमेरिका की सैन्य परंपरा उन बहादुर पुरुषों और महिलाओं के बलिदान पर आधारित है,जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने जीवन को जोखिम में डाला। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सुरक्षा बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में ऐसे नायकों को सम्मानित करना उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है।

अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के इतिहास में अनगिनत सैनिकों ने असाधारण साहस का प्रदर्शन किया है,लेकिन केवल चुनिंदा लोगों को ही ‘मेडल ऑफ ऑनर’ प्राप्त करने का गौरव मिलता है। उनके अनुसार यह सम्मान केवल वीरता का प्रतीक नहीं है,बल्कि उन मूल्यों का भी प्रतिनिधित्व करता है,जिन पर अमेरिकी सेना और राष्ट्र की नींव टिकी हुई है।

समारोह का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब राष्ट्रपति ने जेम्स कैपर्स जूनियर की कहानी सुनाई। कैपर्स को यह सम्मान वियतनाम युद्ध के दौरान वर्ष 1967 में किए गए साहसिक अभियान के लिए प्रदान किया गया। उस समय वह सेकंड लेफ्टिनेंट के पद पर थे और उन्हें एक अत्यंत खतरनाक टोही मिशन का नेतृत्व सौंपा गया था। मिशन का उद्देश्य उत्तरी वियतनामी सेना के एक महत्वपूर्ण बेस कैंप का पता लगाना था।

व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार,यह मिशन चार दिनों तक चला और इस दौरान कैपर्स तथा उनकी टीम को कई बार दुश्मन की भारी संख्या वाली सेना का सामना करना पड़ा। दुश्मन की लगातार गोलीबारी और हमलों के बीच कैपर्स ने न केवल अपने साथियों का नेतृत्व किया,बल्कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मिशन को जारी रखा। युद्ध के दौरान उनके शरीर पर कई गंभीर चोटें आईं,फिर भी उन्होंने अपने सैनिकों को सुरक्षित निकालने और हवाई सहायता का समन्वय करने की जिम्मेदारी निभाई।

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया,जब लगभग पूरी टीम घायल हो चुकी थी। कैपर्स स्वयं भी गंभीर रूप से जख्मी थे और उनका एक पैर ठीक से काम नहीं कर रहा था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार अपने साथियों का मनोबल बनाए रखा और युद्ध क्षेत्र में बने रहे। ट्रंप ने कहा कि मुश्किल से होश में होने के बावजूद कैपर्स ने लगभग एक घंटे तक हवाई सहायता के लिए निर्देश दिए और अपने साथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया।

राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि कैपर्स को वास्तव में वर्ष 1967 में ही ‘मेडल ऑफ ऑनर’ के लिए नामित किया गया था,लेकिन प्रशासनिक कारणों से यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। उनके कमांडिंग अधिकारी की मृत्यु हो जाने के कारण आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया अधूरी रह गई और सम्मान का निर्णय वर्षों तक लंबित रहा। ट्रंप ने समारोह के दौरान कहा कि देश ने कैपर्स को यह सम्मान देने में बहुत लंबा समय लगा दिया,लेकिन अंततः उन्हें वह पहचान मिल रही है जिसके वे हकदार थे।

समारोह में दूसरे सम्मानित सैन्य अधिकारी मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू. रिप्ले थे,जिन्हें मरणोपरांत ‘मेडल ऑफ ऑनर’ प्रदान किया गया। रिप्ले की वीरता की कहानी वियतनाम युद्ध के दौरान वर्ष 1972 की है,जब उत्तरी वियतनामी सेना ने बड़े पैमाने पर हमला किया था। उस समय रिप्ले एक वरिष्ठ मरीन सलाहकार के रूप में तैनात थे और उन्हें एक महत्वपूर्ण रणनीतिक जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

युद्ध के दौरान दुश्मन सेना तेजी से आगे बढ़ रही थी और यदि उसे नहीं रोका जाता तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी। ऐसे में रिप्ले ने अत्यंत जोखिम भरा निर्णय लिया। दुश्मन की लगातार गोलीबारी के बीच उन्होंने एक महत्वपूर्ण पुल को नष्ट करने का मिशन अपने हाथ में लिया। यह कार्य बेहद कठिन और जानलेवा था क्योंकि पुल के नीचे जाकर भारी मात्रा में विस्फोटक लगाना था।

व्हाइट हाउस के अनुसार रिप्ले कई घंटों तक लगातार खतरे के बीच काम करते रहे। उन्होंने लगभग 500 पाउंड से अधिक विस्फोटक सामग्री को पुल के नीचे पहुँचाया,उसे सावधानीपूर्वक स्थापित किया और विस्फोट के लिए आवश्यक व्यवस्था की। इस दौरान उन पर लगातार दुश्मन की गोलीबारी होती रही,लेकिन उन्होंने अपना मिशन नहीं छोड़ा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि रिप्ले ने लगभग पांच घंटे तक लगातार विस्फोटक सामग्री को ढोने,उसे लगाने और पूरी प्रणाली को तैयार करने का काम किया। अंततः जब विस्फोट हुआ तो पुल ध्वस्त हो गया और दुश्मन की आगे बढ़ती सेना को रोक दिया गया। इस कार्रवाई ने युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ प्रदान किया और अनेक सैनिकों की जान बचाने में मदद की। ट्रंप ने कहा कि रिप्ले का साहस सैन्य इतिहास के सबसे प्रेरणादायक उदाहरणों में से एक है।

तीसरे सम्मानित अधिकारी निकोलस डॉकरी थे,जिन्हें अफगानिस्तान युद्ध में दिखाई गई वीरता के लिए ‘मेडल ऑफ ऑनर’ प्रदान किया गया। डॉकरी ने अक्टूबर 2012 में अफगानिस्तान के कपिसा प्रांत में तालिबान के एक भीषण हमले के दौरान असाधारण नेतृत्व और साहस का परिचय दिया था।

उस समय अमेरिकी और सहयोगी बलों पर भारी हमला हुआ था। स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर होती जा रही थी और कई सैनिक घायल हो गए थे। ऐसे कठिन समय में डॉकरी ने स्वयं को खतरे में डालते हुए घायल साथियों को बचाने का कार्य शुरू किया। उन्होंने न केवल घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया,बल्कि दुश्मन की गोलीबारी के बीच जवाबी कार्रवाई का नेतृत्व भी किया।

व्हाइट हाउस के अनुसार डॉकरी ने कई बार खुली गोलीबारी वाले क्षेत्रों में जाकर अपने साथियों की मदद की। उन्होंने हवाई सहायता का समन्वय किया और लगातार लड़ाई का नेतृत्व करते रहे। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन की परवाह किए बिना अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि जब युद्ध क्षेत्र में चारों ओर मोर्टार हमलों और गोलियों की आवाज गूँज रही थी,तब डॉकरी ने अपने घायल साथी को बचाने के लिए अपने शरीर को ढाल बना लिया। उन्होंने कहा कि डॉकरी केवल एक अधिकारी नहीं थे,बल्कि एक ऐसे नेता थे,जिन्होंने संकट की घड़ी में अपने साथियों की रक्षा के लिए हर संभव जोखिम उठाया।

ट्रंप ने कहा कि डॉकरी युद्ध क्षेत्र से निकलने वाले अंतिम सैनिक थे। उन्होंने अपने साथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही वहाँ से हटने का निर्णय लिया। राष्ट्रपति के अनुसार यह नेतृत्व,जिम्मेदारी और साहस का ऐसा उदाहरण है,जिसे आने वाली पीढ़ियाँ भी याद रखेंगी।

समारोह के समापन पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों का हमेशा ऋणी रहेगा। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता, सुरक्षा और समृद्धि उन लोगों की वजह से संभव है,जिन्होंने युद्ध के मैदान में अपना सब कुछ दांव पर लगाया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे अमेरिका अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ के करीब पहुँच रहा है,वैसे-वैसे यह याद करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि राष्ट्र के इतिहास को महान बनाने में ऐसे वीरों की कितनी बड़ी भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका उन सैनिकों को कभी नहीं भूलेगा,जिन्होंने अपने कर्तव्य के लिए असाधारण बलिदान दिए। राष्ट्रपति ने तीनों सम्मानित सैन्य अधिकारियों और उनके परिवारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी कहानियाँ देश के युवाओं को प्रेरित करती रहेंगी।

‘मेडल ऑफ ऑनर’ अमेरिका का सर्वोच्च सैन्य सम्मान माना जाता है। यह उन सैनिकों को दिया जाता है जिन्होंने अपने कर्तव्य से कहीं बढ़कर साहस,वीरता और निडरता का प्रदर्शन किया हो। इस सम्मान को प्राप्त करना किसी भी सैनिक के लिए सर्वोच्च उपलब्धि मानी जाती है। अमेरिकी इतिहास में अब तक सीमित संख्या में ही सैनिकों को यह सम्मान मिला है और प्रत्येक सम्मान के पीछे असाधारण साहस और बलिदान की कहानी जुड़ी होती है।

व्हाइट हाउस में आयोजित यह समारोह केवल तीन सैनिकों को सम्मानित करने का अवसर नहीं था,बल्कि अमेरिकी सैन्य इतिहास की उन परंपराओं को याद करने का भी क्षण था जो साहस,समर्पण और राष्ट्रभक्ति पर आधारित हैं। जेम्स कैपर्स जूनियर,जॉन डब्ल्यू. रिप्ले और निकोलस डॉकरी की कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि युद्ध के सबसे कठिन क्षणों में भी कुछ लोग ऐसे होते हैं,जो अपने साथियों और अपने देश के लिए हर खतरे का सामना करने को तैयार रहते हैं।

अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के निकट आयोजित यह सम्मान समारोह देश के सैन्य इतिहास के गौरवशाली अध्यायों को सामने लाने वाला अवसर बन गया। इन तीनों सैनिकों की वीरता और बलिदान की गाथाएँ आने वाले वर्षों तक अमेरिकी सेना और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।