मुंबई,25 जून (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिज से जुड़े 200 करोड़ रुपये के बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अभिनेत्री को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी, जिसके बाद अब उनके खिलाफ चल रहे मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगी। इस फैसले के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि अभिनेत्री को अब निचली अदालत में मुकदमे का सामना करना होगा और मामले की सुनवाई सबूतों तथा गवाहों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
यह मामला पिछले कई वर्षों से देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में शामिल रहा है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही जाँच के केंद्र में कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर और उससे जुड़े कई अन्य लोग हैं। जाँच एजेंसी का आरोप है कि करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े धन का उपयोग और उसके लेन-देन को छिपाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग की गई। इसी जाँच के दौरान अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिज का नाम भी सामने आया था,जिसके बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अभिनेत्री की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया कि उन्हें अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाए। शीर्ष अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की मंजूरी दे दी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने की। अदालत ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद अभिनेत्री के अनुरोध को स्वीकार कर लिया और याचिका को वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी।
जैकलीन फर्नांडिज ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी,जिसमें उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की अभियोजन शिकायत को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने यह भी माना था कि ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों को समाप्त करने का कोई आधार नहीं है। इसी आदेश के खिलाफ अभिनेत्री ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। हालाँकि,अब उन्होंने स्वयं अपनी याचिका वापस ले ली है,जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।
इस घटनाक्रम को मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि याचिका वापस लेने का निर्णय इस बात का संकेत हो सकता है कि अभिनेत्री अब अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सीधे ट्रायल की प्रक्रिया में हिस्सा लेना चाहती हैं। हालाँकि,इस निर्णय के पीछे वास्तविक कानूनी रणनीति क्या है,इस पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
जैकलीन फर्नांडिज शुरू से ही अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करती रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कोई गैरकानूनी कार्य नहीं किया और वह स्वयं को निर्दोष मानती हैं। हाल ही में तीन जून को दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में पेशी के दौरान भी उन्होंने अदालत के सामने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं और न्यायिक प्रक्रिया पर उन्हें पूरा भरोसा है।
अदालत में उन्होंने यह भी कहा था कि मामले का फैसला तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। उनके वकीलों ने भी लगातार यह दलील दी है कि अभिनेत्री का इस कथित आर्थिक अपराध में कोई प्रत्यक्ष या आपराधिक उद्देश्य नहीं था। हालाँकि,जाँच एजेंसियों का रुख इससे अलग रहा है और उन्होंने अदालत के सामने विभिन्न दस्तावेज तथा अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं।
इस मामले में केवल जैकलीन फर्नांडिज ही नहीं,बल्कि कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर,उनकी पत्नी लीना मारिया पॉल और कई अन्य आरोपी भी शामिल हैं। ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित आरोप तय किए हैं। अदालत में सभी आरोपियों ने स्वयं को निर्दोष बताया है और मुकदमे की माँग की है। अब यह मामला साक्ष्यों,गवाहों और कानूनी दलीलों के आधार पर आगे बढ़ेगा।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 जुलाई की तारीख निर्धारित की है। इस दौरान अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेगा और बचाव पक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर अदालत में विस्तार से चर्चा होगी।
सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेने का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है,जब कुछ सप्ताह पहले ही अभिनेत्री ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया था। उन्होंने इस मामले में सरकारी गवाह बनने के लिए दायर अपनी अर्जी भी वापस ले ली थी। उस समय यह मामला भी काफी चर्चा में रहा था क्योंकि इससे यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि अभिनेत्री जाँच एजेंसी के साथ सहयोग करते हुए मामले में अलग कानूनी रास्ता अपनाने की कोशिश कर सकती हैं।
हालाँकि,प्रवर्तन निदेशालय ने उस अर्जी का विरोध किया था। एजेंसी का कहना था कि जांच के दौरान अभिनेत्री का रवैया पूरी तरह सहयोगात्मक नहीं रहा। ईडी ने अदालत में यह भी कहा था कि जाँच प्रक्रिया के दौरान उनका व्यवहार संतोषजनक नहीं पाया गया और इसलिए उन्हें सरकारी गवाह का दर्जा देने का कोई आधार नहीं बनता। एजेंसी ने अदालत से आग्रह किया था कि इस प्रकार की माँग को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
यह मामला देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में गिना जाता है। जाँच एजेंसियों के अनुसार कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर ने स्वयं को प्रभावशाली व्यक्ति और सरकारी अधिकारी बताकर कई लोगों को धोखा दिया। आरोप है कि उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया। जाँच के दौरान यह भी सामने आया कि धोखाधड़ी से प्राप्त धन का इस्तेमाल विभिन्न माध्यमों से किया गया और उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई।
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि इस कथित धोखाधड़ी का संबंध लगभग 200 करोड़ रुपये की रकम से है। एजेंसी का कहना है कि इस धन के स्रोत,उपयोग और लेन-देन को छिपाने के लिए कई स्तरों पर गतिविधियाँ की गईं। इसी आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया और विस्तृत जाँच शुरू की गई।
जाँच के दौरान कई हाई-प्रोफाइल नामों का उल्लेख सामने आया,जिसके कारण यह मामला लगातार मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का विषय बना रहा। जैकलीन फर्नांडिज का नाम सामने आने के बाद मामले को और अधिक सुर्खियाँ मिलीं। हालाँकि,अभिनेत्री लगातार यह कहती रही हैं कि वह किसी भी अवैध गतिविधि का हिस्सा नहीं थीं और उन्हें किसी प्रकार की आपराधिक साजिश की जानकारी नहीं थी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेने के बाद मामला एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। अब ध्यान ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर केंद्रित होगा,जहाँ अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों अपने-अपने तर्क और साक्ष्य पेश करेंगे। अदालत में होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि आरोपों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य कितने मजबूत हैं और आरोपियों की कानूनी दलीलों का क्या प्रभाव पड़ता है।
देशभर की निगाहें अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं। आने वाले समय में अदालत में कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज हो सकते हैं और जाँच से जुड़े नए तथ्य भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल इतना तय है कि जैकलीन फर्नांडिज को अब ट्रायल कोर्ट में मुकदमे का सामना करना होगा और उनकी कानूनी लड़ाई का अगला अध्याय वहीं से आगे बढ़ेगा। यह मामला न केवल एक चर्चित अभिनेत्री से जुड़ा है,बल्कि देश में आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ चल रही कार्रवाई के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
